काम पहले मंजूरी बाद में, 342% ज्यादा खर्च... केजरीवाल के 'सरकारी बंगले' पर CAG की रिपोर्ट

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के कार्यकाल के दौरान आधिकारिक सीएम आवास के रेनोवेशन को लेकर कैग रिपोर्ट ने कई अनियमितताएं सामने आई हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बंगले के रेनोवेशन पर अनुमानित लागत से 342% अधिक खर्च हुआ.

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अरविंद केजरीवाल जब दिल्ली के मुख्यमंत्री थे, तब 6 फ्लैग स्टाफ रोड के बंगले को आधिकारिक आवास के तौर पर इस्तेमाल करते थे. (Photo: PTI) अरविंद केजरीवाल जब दिल्ली के मुख्यमंत्री थे, तब 6 फ्लैग स्टाफ रोड के बंगले को आधिकारिक आवास के तौर पर इस्तेमाल करते थे. (Photo: PTI)

सुशांत मेहरा

  • नई दिल्ली,
  • 23 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 11:44 PM IST

दिल्ली विधानसभा में सोमवार को पेश भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के कार्यकाल के दौरान आधिकारिक आवास '6, फ्लैगस्टाफ रोड' के रेनोवेशन को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. कैग रिपोर्ट के मुताबिक इस प्रोजेक्ट पर कुल ₹33.66 करोड़ खर्च किए गए, जो तय अनुमानित लागत से 342% अधिक था.

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कैग की यह रिपोर्ट 2022 की है, जिसे पूर्ववर्ती आम आदमी सरकार ने विधानसभा के पटल पर नहीं रखा था. दिल्ली की वर्तमान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विधानसभा में सोमवार को इसे पेश किया. रिपोर्ट में बताया गया है कि बंगले के रिनोवेशन पर हुए कुल खर्च में से ₹18.88 करोड़ 'हाई क्वालिटी, आर्टिजन, एंटीक और डेकोरेटिव' आइटम्स पर खर्च किए गए. अरविंद केजरीवाल 2015 से 2024 तक मुख्यमंत्री के रूप में रहे, जो राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया था.

भाजपा ने इसे 'शीश महल' करार देते हुए आम आदमी पार्टी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए. फरवरी 2025 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी यह प्रमुख मुद्दा रहा. इस चुनाव में भाजपा ने आम आदमी पार्टी को हराकर सत्ता से बाहर कर दिया. कैग रिपोर्ट में दिल्ली लोक निर्माण विभाग (PWD) की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं. इसमें कहा गया कि कई चरणों में सीमित निविदा (Restricted Tendering) प्रक्रिया अपनाई गई, जिसके लिए पर्याप्त कारण दर्ज नहीं थे. 

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कंसल्टेंसी फर्मों के चयन में पारदर्शिता नहीं

कंसल्टेंसी सर्विस के लिए तीन फर्मों के चयन का भी कोई स्पष्ट आधार नहीं मिला. लागत निर्धारण में भी अनियमितताएं सामने आईं. अनुमान तय करते समय एक साल पुराने रेट का इस्तेमाल कर उन्हें 50 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया, जिससे कुल लागत में इजाफा हुआ. कैग रिपोर्ट में बंगले के रेनोवेशन के लिए ठेकेदारों के चयन में भी पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं. पांच ठेकेदारों को चुना गया, लेकिन जांच में पाया गया कि केवल एक ही निर्धारित मानकों पर खरा उतरता था. इसके अलावा, निर्माण क्षेत्र 1,397 वर्ग मीटर से बढ़ाकर 1,905 वर्ग मीटर कर दिया गया, यानी करीब 36 प्रतिशत की वृद्धि की गई.

कैग रिपोर्ट के मुताबिक, इस रेनोवेशन प्रोजेक्ट के दौरान काम के दायरे में बड़े बदलाव किए गए और कई अतिरिक्त काम जोड़े गए, जिन पर ₹18.88 करोड़ खर्च किए गए. इन खर्चों का कोई स्पष्ट औचित्य नहीं बताया गया. लागत बढ़ने के कारण प्रारंभिक अनुमान को चार बार संशोधित किया गया. बाद में ₹25.80 करोड़ के काम बिना नई निविदा प्रक्रिया अपनाए उसी ठेकेदार से कराए गए, जिससे प्रतिस्पर्धी दरों की संभावना खत्म हो गई. एक अन्य मामले में ₹9.34 करोड़ के संशोधित अनुमान को काम पूरा होने के दो महीने बाद मंजूरी दी गई. इससे बिना अनुमति के सरकारी खजाने से खर्च की स्थिति बनी.

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स्वीकृत धनराशि का इस्तेमाल दूसरे काम में

स्टाफ ब्लॉक और कैंप ऑफिस से जुड़े दूसरे प्रोजेक्ट में भी अनियमितताएं सामने आईं. इस कार्य के लिए ₹19.87 करोड़ में ठेका दिया गया, लेकिन इसमें भी सीमित निविदा प्रक्रिया अपनाई गई और इसके कारणों का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था. कैग रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि स्वीकृत ₹19.87 करोड़ में से पैसे का इस्तेमाल अन्य कार्यों के लिए किया गया. स्टाफ ब्लॉक का निर्माण नहीं हुआ, जबकि 7 सर्वेंट क्वार्टर किसी अन्य स्थान पर बनाए गए. कैंप ऑफिस को भी परमानेंट इंफ्रास्ट्रक्चर से बदलकर सेमी-परमानेंट कर दिया गया और वह भी अधूरा रह गया. पैसे की कमी के चलते जून 2023 में काम बंद कर दिया गया.

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