कोर्ट ने आयोग से पूछा- 20 विधायकों का केस आप हल्के में कैसे ले सकते हैं

कोर्ट की टिप्पणी के बाद चुनाव आयोग ने कहा कि मुख्य याचिका के संबंध में दो हफ्ते में जवाब दाखिल किया जाएगा.

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शुक्रवार को हाईकोर्ट में हुई थी सुनवाई शुक्रवार को हाईकोर्ट में हुई थी सुनवाई

जावेद अख़्तर

  • नई दिल्ली,
  • 20 जनवरी 2018,
  • अपडेटेड 9:15 AM IST

दिल्ली में आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों पर लाभ का पद रखने के मामले में तलवार लटक रही है. चुनाव आयोग ने इस संबंध में राष्ट्रपति को भेजी गई अपनी रिपोर्ट में इन विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने की सिफारिश की है. जिसके बाद आम आदमी पार्टी ने बीजेपी की साजिश करार देते हुए चुनाव आयुक्त पर भी सवाल खड़े किए हैं. वहीं इस मामले में भले ही आप को कोर्ट से राहत न मिली हो, लेकिन चुनाव आयोग पर कोर्ट ने गंभीर टिप्पणी की है.

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शुक्रवार को चुनाव आयोग की मांग सामने आने के बाद आम आदमी पार्टी ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और स्टे की मांग की. कोर्ट ने पार्टी की इस मांग को इनकार कर दिया. सुनवाई के दौरान अयोग्य ठहराए गए विधायकों में से एक शरद कुमार की तरफ से अधिवक्ता मनीष वशिष्ठ ने अदालत से कहा कि अयोग्य ठहराने का फैसला करने से पहले चुनाव आयोग ने उनका पक्ष नहीं सुना. उन्होंने यह भी कहा कि अब तक चुनाव आयोग ने पिछले साल अगस्त में दायर उनकी याचिकाओं पर जवाब दाखिल नहीं किया है.

कोर्ट ने आयोग के वकील से पूछा

न्जूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, आप विधायक के वकील की इस दलील पर कोर्ट ने आयोग के वकील से पूछा कि क्यों अब तक कोई जवाब नहीं दाखिल किया है. कोर्ट ने कहा, 'इसमें 20 लोग शामिल हैं. आप कैसे इसे इतने हल्के में ले सकते हैं.'

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इसके बाद चुनाव आयोग ने कहा कि मुख्य याचिका के संबंध में दो हफ्ते में जवाब दाखिल किया जाएगा. इसी मुख्य याचिका में आज (शुक्रवार) आवेदन दिया गया. इस आवेदन में विधायकों ने चुनाव आयोग की उस सिफारिश को चुनौती दी है जिसमें उसने राष्ट्रपति से उन्हें अयोग्य ठहराने की राय दी है.

बता दें कि इस मामले में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को भेजी गई अपनी राय में चुनाव आयोग ने कहा कि संसदीय सचिव होने के नाते इन विधायकों ने लाभ का पद रखा और वे दिल्ली विधानसभा के विधायक के पद से अयोग्य ठहराए जाने के योग्य हैं.

आप के 21 विधायकों के खिलाफ चुनाव आयोग में नाम के एक वकील ने दायर की थी. इन विधायकों को दिल्ली की आप सरकार ने संसदीय सचिव नियुक्त किया था.

अब ये मामला राष्ट्रपति के पास है. अगर राष्ट्रपति चुनाव आयोग की राय पर मुहर लगा देते हैं तो आम आदमी पार्टी और उसके विधायकों के मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं और दिल्ली में उपचुनाव की नौबत आ सकती है.

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