Beat Report: जहां इंटरनेट भी नहीं पहुंचा था, अब वहां शुरू होगा 'जन जन सुविधा केंद्र', बदलेगी बस्तर की तस्वीर

बस्तर के कई गांवों में आज भी बैंक, इंटरनेट और अस्पताल जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, जिसके चलते लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है. अब सरकार के जन जन सुविधा केंद्र मॉडल की मदद से लोगों को कई सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी.

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बस्तर के कई गांवों में आज भी बैंक, इंटरनेट की सुविधा नहीं है. (Photo: ITG) बस्तर के कई गांवों में आज भी बैंक, इंटरनेट की सुविधा नहीं है. (Photo: ITG)

जितेंद्र बहादुर सिंह

  • बस्तर,
  • 18 मई 2026,
  • अपडेटेड 9:08 AM IST

कभी गोलियों और सुरक्षा अभियानों की पहचान रहे बस्तर के जंगल आज एक नई कहानी लिखने जा रहे हैं. गृह मंत्री अमित शाह नेतानार, बस्तर से जन जन सुविधा केंद्र मॉडल का शुभारंभ करेंगे. यह केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि उस बदलते हुए बस्तर का प्रतीक है जहां अब सुरक्षा शिविरों को विकास और जनसेवा के केंद्रों में बदला जा रहा है.

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छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा तैयार किए गए इस मॉडल के पीछे सोच साफ है. जिन दूरस्थ आदिवासी इलाकों में सालों तक शासन की सामान्य सुविधाएं नहीं पहुंच पाईं, वहां अब सरकार खुद लोगों के दरवाजे तक पहुंचेगी. यह मॉडल विशेष रूप से उन गांवों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां आज भी लोगों को छोटी-छोटी सरकारी सुविधाओं के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है. इस मॉडल के तहत चयनित सुरक्षा शिविर परिसरों में नागरिकों को एक ही परिसर में अनेक सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी.

विशेष रूप से उन गांवों को प्राथमिकता दी जाएगी जहां प्रशासनिक कार्यालय, बैंकिंग सुविधा, स्वास्थ्य सेवाएं और डिजिटल सेवाएं अब तक सीमित रही हैं.

इन केंद्रों में कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) आधारित सेवाएं उपलब्ध होंगी, जिनमें आधार अपडेट, बैंकिंग सेवाएं, आय-जाति-निवास प्रमाण पत्र आवेदन, राशन कार्ड सेवाएं, आयुष्मान भारत कार्ड, ई-श्रम पंजीयन, बिजली बिल भुगतान, ऑनलाइन आवेदन, रेलवे और बस टिकट बुकिंग जैसी सुविधाएं शामिल होंगी. साथ ही प्रिंटिंग, स्कैनिंग और अन्य डिजिटल सेवाएं भी उपलब्ध रहेंगी.

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर तैयार इस योजना को सुरक्षा से विकास की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है. पिछले दो दशकों में नक्सल हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों में CAPF और राज्य पुलिस के कैंप स्थापित किए गए थे. इन कैंपों ने सुरक्षा बहाल करने, सड़कें बनाने और प्रशासन की पहुंच बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई. अब जब कई क्षेत्रों में हालात सामान्य हो रहे हैं, तो उन्हीं परिसरों को जन जन सुविधा केंद्र में बदलने की तैयारी की गई है.

बस्तर के गांवों में आज भी इंटरनेट सुविधा नहीं

पहल का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि दूर-दराज के आदिवासी गांवों के लोगों को अब छोटी जरूरतों के लिए जिला मुख्यालय या ब्लॉक कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. बस्तर के कई गांवों में आज भी बैंक, इंटरनेट, अस्पताल या सरकारी कार्यालय नहीं हैं. ऐसे में अगर गांव के पास ही एक केंद्र में बैंकिंग, आधार, राशन कार्ड, स्वास्थ्य और पेंशन जैसी सेवाएं मिलेंगी, तो इससे लोगों का समय, पैसा और मेहनत तीनों बचेंगे.

इन केंद्रों में कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) आधारित सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी. आधार अपडेट, बैंकिंग सुविधा, आय-जाति-निवास प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, आयुष्मान भारत कार्ड, बिजली बिल भुगतान, ऑनलाइन आवेदन, रेलवे और बस टिकट बुकिंग जैसी सुविधाएं एक ही परिसर में मिलेंगी. इसका सीधा असर उन ग्रामीण परिवारों पर पड़ेगा जो डिजिटल व्यवस्था से अब तक काफी दूर रहे हैं. 

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विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल बस्तर में डिजिटल समावेशन को भी तेजी देगा. अभी तक जिन इलाकों में इंटरनेट और ऑनलाइन सेवाएं केवल नाम भर थीं, वहां अब लोग सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे अपने क्षेत्र में ले सकेंगे. इससे दलाल व्यवस्था और अनावश्यक खर्च भी कम होगा.

स्वास्थ्य सेवाओं के लिहाज से भी यह पहल बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है. इन केंद्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं, यहां उपलब्ध कराए जाएंगी. बस्तर जैसे क्षेत्रों में जहां कई गांव स्वास्थ्य सुविधाओं से दूर हैं, वहां यह मॉडल ग्रामीणों के लिए जीवन बदलने वाला साबित हो सकता है. गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को अब इलाज और जांच के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी.

सरकार इस मॉडल को केवल सरकारी काउंटर तक सीमित नहीं रखना चाहती. योजना में कौशल विकास प्रशिक्षण, युवाओं के लिए रोजगार मार्गदर्शन, कृषि परामर्श, पीएम किसान सम्मान निधि सहायता और वन उपज संबंधी जानकारी भी शामिल की गई है. इसका मतलब यह है कि यह केंद्र गांवों में रोजगार और आत्मनिर्भरता का माध्यम भी बनेंगे.

विकास के लिए चुनौती

विशेषज्ञ मानते हैं कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की सबसे बड़ी चुनौती केवल सुरक्षा नहीं, बल्कि अवसरों की कमी भी रही है. जब गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग और रोजगार जैसी सुविधाएं पहुंचेंगी, तो युवाओं का भरोसा व्यवस्था पर और मजबूत होगा. यही वजह है कि इस मॉडल को विकास आधारित स्थायी समाधान के रूप में भी देखा जा रहा है.

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इन केंद्रों में उचित मूल्य दुकान, पेयजल सुविधा, इंटरनेट कनेक्टिविटी, सामुदायिक बैठक स्थल, प्राथमिक स्कूल और आश्रम छात्रावास जैसी सुविधाओं को भी जोड़ा जाएगा. यानी यह केवल सेवा केंद्र नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन का नया विकास केंद्र बनेंगे.

सरकार के अनुसार इस योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. पहले ऐसे कैंपों की पहचान होगी जिनकी ऑपरेशनल आवश्यकता कम हो चुकी है. इसके बाद वहां बिजली, पानी, इंटरनेट और अन्य आधारभूत सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा, फिर विभिन्न विभागों की सेवाओं को एकीकृत कर स्थानीय युवाओं और स्वयं-सहायता समूहों के माध्यम से संचालन शुरू किया जाएगा.

बस्तर में आज होने वाला यह शुभारंभ इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि यह उस बदलाव की तस्वीर पेश करता है, जहां कभी सुरक्षा बलों की तैनाती व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी थी, वहीं अब उसी स्थान से विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा और जनसेवा की नई शुरुआत होगी.

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