छठ पूजा: मुस्मिल महिलाओं ने की गंगा किनारे घाटों और सड़कों की सफार्ई

बिहार में छठ पूजा की तैयारियां शुरू हो चुकी है. इस मौके मुस्लिम महिलाओं की घाट की सफाई करते हुए तस्वीरें सामने आई है. सोमवार को मुस्लिम महिलाओं ने गंगा किनारे छठ घाटों और आस-पास की जगहों की सफाई की.

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मुस्लिम महिलाओं ने गंगा किनारे घाटों की  सफाई की मुस्लिम महिलाओं ने गंगा किनारे घाटों की सफाई की

केशवानंद धर दुबे

  • पटना,
  • 24 अक्टूबर 2017,
  • अपडेटेड 12:11 PM IST

बिहार में छठ पूजा की तैयारियां शुरू हो चुकी है. इस मौके मुस्लिम महिलाओं की घाट की सफाई करते हुए तस्वीरें सामने आई है. सोमवार को मुस्लिम महिलाओं ने गंगा किनारे छठ घाटों और आस-पास की जगहों की सफाई की. उन्होंने घाट पर झाड़ू लगाकर साफ-सफाई की, ताकि घाट पहुंचने में लोगों को गंदगी का सामना ना करना पड़े.  उनकी इस निष्ठा को देखकर स्थानीय लोगों ने उनकी काफी सराहना की.

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छठ को कई नामों से जाना जाता है

छठ कई नामों से जाना जाता है जैसे छठी, डाला छठ, डाला पूजा, सूर्य षष्ठी. दिवाली के ठीक 6 दिन बाद कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की षष्ठी को "सूर्य षष्ठी का व्रत" करने का विधान है. इस दिन भगवान सूर्य व छठी देवी की पूजा की जाती है. इस दौरान वे पानी भी ग्रहण नहीं करते हैं.

36 घंटे निर्जला रहती हैं स्त्रियां    

यह व्रत चार दिन तक चलता है. चार दिनों का यह व्रत दुनिया का सबसे कठिन व्रतों में से एक होता है. यह व्रत बड़े नियम तथा निष्ठा से किया जाता है. व्रती अपने हाथ से ही सारा काम करती हैं. नहाय-खाय से लेकर सुबह के अर्घ्य तक व्रती पूरे निष्ठा का पालन करती हैं. भगवान सूर्य के लिए 36 घंटों का निर्जला व्रत स्त्रियों इसलिए रखती हैं ताकि वहीं, भगवान सूर्य धन, धान्य, समृद्धि आदि प्रदान करते हैं.

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छठ पूजा के दौरान इन बातों का रखें ख्याल

नहाय खाय के दिन व्रती को हमेशा साफ सुथरे और धुले कपड़े ही पहनना चाहिए. नहाय खाय से छठ समाप्त होने तक व्रती महिला और पुरुष को बिस्तर पर नहीं सोना चाहिए. घर में भूलकर भी मांस मदिरा का सेवन न हो. साफ सफाई पर विशेष ध्यान दें. पूजा की किसी भी वस्तु को जूठे या गंदे हाथों से ना छूएं.

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