टैबलेट या‍नी हथेली पर जादुई संसार

टैबलेट के बढ़ते चलन के कारण बाजार में विकल्पों की भरमार. जानें टैबलेट खरीदने के कुछ फंडे

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टैबलेट टैबलेट

आशीष भाटिया

  • नई दिल्‍ली,
  • 12 फरवरी 2012,
  • अपडेटेड 9:17 PM IST

वर्ष 2012 में बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक, सब टैबलेट चाहते हैं. यह ऐसी मोबाइल डिवाइस है जो स्मार्टफोन से काफी बड़ी है लेकिन लैपटॉप से छोटी है. यह मशीन उन तमाम लोगों के लिए है जो लैपटॉप जैसी सुविधा चाहते हैं लेकिन न तो उतना वजन साथ लेकर चलना चाहते हैं और न ही उतनी पेचीदगियां चाहते हैं. नॉन टेक लोगों को इसकी जो खासियत अपनी ओर आकर्षित करती है, वह है इसमें टच स्क्रीन वाला यूजर इंटरफेस, यानी की-बोर्ड का झमेला नहीं.

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बाजार में दर्जनों किस्म और कंपनियों के टैबलेट उपलब्ध हैं. लेकिन टैबलेट की दुनिया मुख्य रूप से एपल आइपैड और एंड्रॉयड टैबलेट के बीच बंटी हुई है. टैबलेट को घर-घर और दुनिया भर में लोकप्रिय बनाने का पूरा श्रेय एपल कंपनी को ही जाता है. मार्केट लीडर होने के बावजूद एपल लगातार नए मॉडल ला रही है और लोकप्रियता चार्ट में टॉप पर बनी हुई है. दूसरी ओर, एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम (ओएस) प्रयोग करने वाली कई कंपनियां बाजार में हैं. (रिम का ब्लैकबेरी प्लेबुक और विंडोज ओएस इस्तेमाल करने वाली कंपनियों को छोड़कर.)

ढेर सारी कंपनियां एंड्रॉयड ओएस इस्तेमाल करती हैं, इस वजह से टैबलेट मार्केट में विकल्प भी ढेरों हैं. ऐसे में एंड्रॉयड टैबलेट को खरीदना और भी मुश्किल काम हो जाता है. इनके बीच मामूली भेद, खुद की पसंद और दोस्तों की राय मामले को और अधिक उलझा देती है. लेकिन कुल मिलाकर मामला आइपैड बनाम अन्य का रहता है. यहां यही बताने की कोशिश की गई है कि टैबलेट खरीदते समय किन बातों का ख्याल रखें और इसका हमारे लिए क्या इस्तेमाल हो सकता है.

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टैबलेट है क्या

टैबलेट एक फ्लैट, सुपर स्लिम, तुरंत चालू होने वाला कंप्यूटर है, जिसकी स्क्रीन 7 से 10 इंच की होती है और इसे आसानी से अपने साथ रखा जा सकता है. इस पर वेब ब्राउजिंग, ई-मेल, ई-बुक रीडिंग, ऑडियो-वीडियो मल्टीमीडिया प्लेबैक के साथ ही जनरल एप्लीकेशंस और गेमिंग का लुत्फ भी ले सकते हैं. टैबलेट को लेकर जुनून एपल आइपैड की सफलता के कारण शुरू हुआ. टैबलेट के इस आगाज ने कंप्यूटर की दुनिया को बदलकर रख दिया है. इसकी लोकप्रियता इस कदर बढ़ी कि कंप्यूटर कंपनियों ने और अधिक फीचर के साथ अपने टैबलेट बाजार में उतारे. इनके हार्डवेयर में सुधार कर दिया गया और नए नए फीचर जोड़े गए, जैसे यूएसबी और एचडीएमआइ पोर्ट, सिम कार्ड/कॉलिंग कैपेबिलिटीज, और एडोबी फ्लैश सपोर्ट.

आइपैड का दबदबा अपनी जगह है, लेकिन इस बीच गूगल एंड्रॉयड वाले टैबलेट की बहार आ चुकी है. इसमें सैमसंग गैलेक्सी टैब, मोटोरोला जूम, एसर आइकनिया और इसके अलावा जाहिर तौर पर रिम के ब्लैकबेरी प्लेबुक प्रमुख हैं. ताइपे में आयोजित हुए कंप्यूटर एक्सपो 2011 में लगभग 50 नए और चमकते हुए टैबलेट बाजार में थे. टैबलेट मार्केट में हाथ आजमाने के लिए माइक्रोसॉफ्ट भी कमर कस रही है.

क्यों चाहिए टैबलेट?

जैसा हर डिवाइस के बारे में कहा जाता है कि उसे खरीदने से पहले आपको अपनी जरूरतों को समझना होता है क्योंकि आप अपनी जेब हल्की करने जा रहे हैं. अगर आप को लगता है कि टैबलेट खरीदने से लैपटॉप की जरूरत खत्म हो जाएगी तो ऐसा नहीं है. सोशल नेटवर्किंग, सर्फिंग और चैटिंग के लिए तो टैबलेट ठीक है लेकिन आपको स्‍प्रैडशीट पर ढेर सारे आंकड़ों पर काम करना हो या जटिल प्रेजेंटेशन बनाना हो तो आपको लैपटॉप या पीसी की जरूरत पड़ेगी. अगर आपको ढेर सारी टाइपिंग करनी है तो आपके लिए यह बेहतर होगा कि इसमें ब्लूटूथ कीबोर्ड लगा लें. यह बात याद रखें कि टैबलेट लाइटवेट लैपटॉप की तरह है, लेकिन यह मशीन हेवी टाइपिंग के लिए नहीं बनी है.कितना साइज? कितनी स्टोरेज?

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सात इंच के टैबलेट का फायदा यह है कि यह हल्का है, इसलिए अपने 10 इंच वाले वर्जन की तुलना में अधिक पोर्टेबल, थामने में आसान है और इसे बखूबी एक हाथ से ऑपरेट किया जा सकता है. दूसरी ओर, बड़ी स्क्रीन के अपने फायदे हैं. बड़ी स्क्रीन पर हर चीज बहुत बढ़िया और साफ दिखती है. टेक्स्ट को पढ़ने के लिए उसे बहुत ज्‍यादा जूम करने की जरूरत नहीं पड़ती. इमेज, ग्राफिक्स, वीडियो और गेम्स को इस पर प्रभावशाली और आकर्षक अंदाज में देख सकते हैं.

जब बात स्टोरेज क्षमता की आती है तो अधिकतर लोगों के लिए 8 जीबी से 16 जीबी काफी रहती है. अगर आप अपने टैबलेट पर ढेर सारे वीडियो और फिल्में रखना चाहते हैं, तो आपको बड़ी स्टोरेज क्षमता की जरूरत है. या फिर ऐसी चीज जो माइक्रोएसडी कार्ड सरीखे एक्सटर्नल स्टोरेज मीडिया को एक्सेप्ट करती हो.

क्या वाकई 3जी मेरी जरूरत है?

अगर आप आमतौर पर वाइफाइ एनवायर्नमेंट में रहते हैं तो आपको 3जी की जरूरत नहीं होगी. अगर आप कार, बस या रेलगाड़ी इत्यादि में सफर के दौरान समाचार, यूट्यूब, मेल और सोशल नेटवर्किंग का इस्तेमाल करना चाहते हैं तो 3जी मॉडल आपके लिए सही है. जाहिर है, यहां यह बात भी मायने रखती है कि आप कितना खर्च करना चाहते हैं. 3जी मॉडल अधिक महंगा है. आज मार्केट में 10,000 रु. से लेकर 50,000 रु. तक के टैबलेट मौजूद हैं. अगर आप बहुत ही सोच-समझकर इस्तेमाल करते हैं और इंटरनेट वीडियो और ग्राफिक्स इंटेंसिव मैग्जीन और एप्स जैसी बड़ी फाइलें डाउनलोड नहीं करते हैं तो 3जी का खर्च 100 रु. प्रतिमाह तक आ सकता है.टैबलेट बनाम लैपटॉप

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बेशक टैबलेट एकदम नई चीज है और इससे काफी काम आसान होते हैं, लेकिन इसके मायने यह नहीं कि यह आपके लैपटॉप की जगह ले सकता है. हां, टैबलेट बहुत ही कॉम्पैक्ट है, साथ रखने में ज्‍यादा आसान, मीडिया कंजम्प्शन की दृष्टि से बेहतरीन, जेब पर ज्‍यादा बोझ न डालने वाला और सफर के दौरान मजेदार हमसफर. पर इसे खरीदने का मतलब यह नहीं कि आप अपने लैपटॉप को दरकिनार कर सकते हैं. जहां तक टच स्क्रीन का इस्तेमाल करते हुए प्रेजेंटेशन बनाने का सवाल है तो यह बेहतरीन विकल्प है. यह रखने में लैपटॉप से आसान और स्मार्टफोन से ज्‍यादा सलियत भरा है.

टैबलेट सोशल नेटवर्किंग, आइएम और वीडियो कॉलिंग/चैटिंग में बढ़िया ढंग से काम करते हैं. इस बात से भी कतई इनकार नहीं किया जा सकता है कि लंबे समय तक चलने वाली बैटरी के कारण दो साल जैसी छोटी अवधि में गैजेट की दुनिया में टैबलेट ने एक नया संसार रच डाला है. इसमें आइपैड प्रमुख है.

काम करने के लिहाज से लैपटॉप अब भी बेहतरीन और कई तरह के विकल्प पेश करता है. लेकिन यकीनी तौर पर यह नहीं कहा जा सकता कि लगातार नई खूबियों को खुद में समेट रहे टैबलेट, लैपटॉप को कितनी जल्दी मुश्किल भरी राह पर धकेल देंगे. लेकिन इसके लिए टैबलेट को सस्ता होना पड़ेगा.

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टैबलेट का भविष्यः मोड़कर रख लीजिए जेब में!

कहीं भी और किसी भी समय जाइट, फ्लिपबोर्ड, एनवाइटी सरीखी एप्स के साथ ही टीवी ब्रॉडकास्टिंग का मजा लेने ने टैबलेट के महत्व को बखूबी जाहिर कर दिया है. वह दिन दूर नहीं जब हल्की और आसानी से मोड़े जाने वाली स्क्रीन आपकी जेब में होगी. इसमें ढेर सारे फंक्शंस होंगे. ऐसे समय जब अधिकतर लोग टच स्क्रीन उपकरणों के कारण पेन स्टाइलस से पल्ला झाड़ चुके थे, यह फिर वापसी करते दिखते हैं. उदाहरण के लिएः बड़ी स्क्रीन वाला सैमसंग नोट 'स्मार्टफोन' और एचटीसी फ्लायर. हार्डवेयर, ऑपरेटिंग सिस्टम्स और यूजर इंटरफेसेज और अधिक रिफाइन हो रहे हैं. उम्मीद कर सकते हैं कि भविष्य में स्क्रीन पर वर्चुअली लिखना उतना ही आसान हो जाएगा जितना कागज पर लिखना होता है.

टैबलेट हमारे जीवन में जितनी ज्‍यादा जगह बनाएंगे, ये उतने अधिक टिकाऊ होंगे. या ऐसे केस की उपलब्धता बढ़ेगी जो हाथ से गिरने पर टैब को नुकसान नहीं होने देंगे. भविष्य में यह भी संभव है कि आप अपने पीसी की तरह टैबलेट को भी असेंबल करवा सकें. लेनोवो के आइडियापैड यू1 हाइब्रिड और मोटोरोला के एट्रिक्स स्मार्टफोन ने दिखाया है कि टैबलेट आपके लैपटॉप का डिटैचेबल (जिसे अलग किया जा सके) कंपोनेंट हो सकता है. संभव है कि आप मैकबुक एयर के साथ डिटैचेबल स्क्रीन देखें जो आइपैड की तरह काम कर सकेगी.

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