सफेद चीनी या शहद...गर्मी के मौसम में आपके लिए क्या है सुरक्षित?

बदलते लाइफस्टाइल और बढ़ती बीमारियों के बीच भारतीय अब अपनी डाइट को लेकर अलर्ट हो गए हैं. इस गर्मी के सीजन में रिफाइंड शुगर यानी सफेद चीनी की जगह शहद (Raw Honey) का चलन तेजी से बढ़ा है.

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कच्चे शहद की डिमांड भारत में बढ़ गई है. (Photo: ITG) कच्चे शहद की डिमांड भारत में बढ़ गई है. (Photo: ITG)

आजतक हेल्थ डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 08 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 4:42 PM IST

गर्मियां आते ही भारत के कई हिस्सों में गर्मी का देसी हथियार यानी शिकंजी, लस्सी और ठंडे शरबतों की खपत बढ़ जाती है. लेकिन पिछले कुछ समय से आपने देखा होगा भारत में अब लोग धीरे-धीरे रिफाइंड शुगर से दूरी बना रहे हैं और उसकी जगह शहद का इस्तेमाल कर रहे हैं. दरअसल, हेल्थ के प्रति जागरूक भारतीय अब रिफाइंड शुगर के नुकसानों से अवेयर हैं और इस बात को समझने की कोशिश कर रहे हैं कि रिफाइंड शुगर के हेल्दी अल्टरनेटिव यानी शहद का इस्तेमाल करना अधिक सुरक्षित है.

हेल्थ एक्सपर्ट्स भी मानते हैं कि प्रोसेस की गई चीनी की तुलना में प्राकृतिक शहद शरीर के लिए कहीं अधिक सुरक्षित और फायदेमंद है. लेकिन क्या सच में शहद, चीनी से बेहतर है? और इसका इस्तेमाल कितना सुरक्षित है? इस बारे में भी जान लीजिए.

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शहद और चीनी का मार्केट

इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) और मार्केट रिसर्च रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में चीनी की कुल घरेलू खपत 2025-26 के सीजन के लिए लगभग 27.7 करोड़ क्विंटल रहने का अनुमान है जो पिछले अनुमानों से थोड़ी कम है. 

दूसरी ओर भारतीय शहद बाजार 2026 से 2034 के बीच करीब 6.7 प्रतिशत से 10 प्रतिशत की वार्षिक दर (CAGR) से बढ़ सकता है जिसका वर्तमान बाजार मूल्य लगभग 2889 करोड़ रुपये का है. चीनी की खपत पिछले सालों की अपेक्षा थोड़ी कम है लेकिन शहद की मांग स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण तेजी से बढ़ रही है.

क्यों फायदेमंद है कच्चा शहद?

कच्चा शहद छत्ते से निकाला गया बिना गरम किया हुआ प्राकृतिक रूप है जिसमें सभी पोषक तत्व और पराग सुरक्षित रहते हैं. इसके विपरीत, नॉर्मल शहद को फिल्टर और पाश्चुरीकृत (गर्म) किया जाता है, जिससे यह साफ तो दिखता है लेकिन इसके कई प्राकृतिक गुण नष्ट हो जाते हैं.

कच्चा शहद सीधे मधुमक्खी के छत्ते से ही प्राप्त किया जाता है जिसे बिना गर्म किए या बिना किसी प्रोसेसिंग के ही इस्तेमाल किया जाता है. कच्चे शहद में विटामिन, मिनरल्स और एंजाइम्स की भरपूर मात्रा होती है. वहीं इसके विपरीत रिफाइंड शुगर को बनाने की प्रोसेस में सारे प्राकृतिक पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं और उसमें सिर्फ कैलोरी और मिठास ही बचती है. 

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शहद में मौजूद एंटी-बैक्टीरियल गुण इसे गर्मियों में होने वाले संक्रमणों से लड़ने की ताकत देते हैं. यही वजह है कि जिम जाने वाले युवाओं से लेकर घर के बुजुर्गों तक, हर कोई अब अपनी चाय और जूस में शहद को प्राथमिकता दे रहा है.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

डॉ. पी. सिंह के अनुसार, 'सफेद चीनी शरीर में इन्फ्लेमेशन यानी सूजन बढ़ाती है. इसके मुकाबले कच्चा शहद एक लो-ग्लाइसेमिक ऑपशंस है जो शुगर लेवल को अचानक नहीं बढ़ाता. गर्मियों में शहद का सेवन पेट को ठंडा रखने और मेटाबॉलिज्म को सुधारने में भी मदद करता है. 

विशेषज्ञों का मानना है कि शहद में मौजूद प्राकृतिक एंजाइम्स पाचन क्रिया को नियमित रखते हैं जो गर्मी में समस्या पैदा नहीं करता. इसके अलावा गर आप मीठा पूरी तरह छोड़ नहीं सकते, तो शहद बेहतर विकल्प हो सकता है, लेकिन मात्रा कंट्रोल करना जरूरी है. 

लेकिन यह समझना भी जरूरी है कि शहद भी शुगर का ही एक रूप है. इसमें भी कैलोरी अधिक होती है और ओवरयूज वजन बढ़ा सकता है. नेचुरल होने का मतलब यह नहीं कि इसे बिना लिमिट खाया जाए. आप शहद का भी लिमिट में ही सेवन करें.

रॉ हनी का अधिक इस्तेमाल सिर्फ ट्रेंड नहीं, बल्कि हेल्दी लाइफस्टाइल की ओर एक कदम है. लेकिन असली फायदा तभी मिलेगा जब इसे सीमित मात्रा में और संतुलित डाइट के साथ लिया जाए.

कच्चे और शुद्ध शहद की पहचान कैसे करें?

  • एक गिलास पानी में 1 चम्मच शहद डालें. असली शहद नीचे बैठ जाएगा, जबकि मिलावटी शहद तुरंत घुलने लगेगा.
  • अंगूठे पर एक बूंद शहद रखें. असली शहद टिका रहेगा जबकि मिलावटी शहद तुरंत फैलकर बह जाएगा.
  • माचिस की तीली पर शहद लगाकर जलाएं. शुद्ध शहद होने पर तीली जल जाएगी, मिलावट होने पर नमी के कारण तीली नहीं जलेगी.
  • शहद में पानी और सिरके की कुछ बूंदें मिलाएं. अगर झाग बनता है तो समझ लें कि शहद मिलावटी है.
  • शहद को टिश्यू पेपर या कपड़े पर रखें. शुद्ध शहद कागज को गीला नहीं करेगा और न ही सोखा जाएगा.
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