पूर्व बीजेपी प्रवक्ता नूपुर शर्मा और में देश भर में प्रदर्शन चल रहे हैं. पिछले दिनों इन प्रदर्शनों में काफी हिंसा भी देखने को मिली.और अब देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के नाम पर एक फर्जी बयान जिसमें प्रदर्शनकारियों को सीधे बम से उड़ा देने की बात कही गई है.
देखने में ये बयान एक फेसबुक पोस्ट जैसा लग रहा है जिसमें अजीत डोभाल की प्रोफाइल फोटो लगी हुई है.
बहुत सारे लोग इसे सच समझ कर रहे हैं.
इसमें लिखा है,“आज जिस दौर से भारत गुजर रहा है, बिलकुल वैसे ही ५ साल पहले इजराइल भी गुजरा था. वहां भी एक आतंकी की मौत पर हजारों की भीड़ जमा हो जाती थी, और फिर सैनिकों पर पथराव करती थी.
इससे निपटने के लिए इजराइल ने एक छोटी सी बैठक की थी. मोसाद फ़ोर्स ने कहा हम मात्र तीन दिन में ये समस्या हल कर देंगे. अगले ही दिन मोसाद ने ५-६ अलग अलग शहरों में सिर्फ एक एक आतंकी को चौराहें पर गोली मारी. शहर के हर चौराहे पर हजारों की संख्या में आतंकी जुलूस करने लगे.
मोसाद ने मात्र तीनतीन बम हर जुलूस पर फेंका और हजारों आतंकियों की लाशें बिछ गई. परिणाम आज भी इजराइल में लोग भीड़ बनने से डरते हैं.
मोसाद का यह तरीका रूस को इतना पसंद आया था, कि रूस ने भी इसे कई बार आजमाया. दोस्तों क्या समय आ गया है कि यही फार्मूला अब भारत मे भी आजमाया जाये?”
इंडिया टुडे की फैक्ट चेक टीम ने पाया कि अजीत डोभाल ने न तो इस तरह का कोई बयान दिया है और न ही उनका फेसबुक पर कोई अकाउंट है.
2016 से सोशल मीडिया पर घूम रही है ये कहानी
कीवर्ड सर्च के जरिये तलाशने पर हमें पता लगा कि साल 2016 में को कई ने शेयर किया था. उस वक्त इसके साथ अजीत डोभाल का नाम नहीं लिखा गया था. तब जो पोस्ट शेयर हो रही थी और अभी जो पोस्ट शेयर हो रही है, उन दोनों में कॉमा और फुल स्टॉप तक एक ही जगह लगे हैं. यहां तक कि कुछ व्याकरण की गलतियां भी एक-जैसी हैं.
हमने वायरल पोस्ट की तुलना एक असली फेसबुक पोस्ट से की. साफ देखा जा सकता है कि फेसबुक का फॉन्ट, वायरल पोस्ट वाले फॉन्ट से एकदम अलग है. एक और खास बात ये है कि वायरल पोस्ट में टाइम '14hrs' लिखा है, यानी 14 घंटे पहले. लेकिन, फेसबुक पर टाइम के साथ 'hrs' नहीं, बल्कि 'h' लिखा होता है.
विदेश मंत्रालय ने कहा, फेसबुक पर नहीं हैं डोभाल
अजीत डोभाल के नाम पर वैसे तो कई फेसबुक अकाउंट बने हुए हैं, पर कोई भी वेरिफाइड नहीं है. पिछले साल विदेश मंत्रालय ने भी बताया था कि अजीत का कोई फेसबुक अकाउंट नहीं है.
क्या है इजरायल वाली कहानी का सच?
हमें ऐसी किसी घटना का सबूत नहीं मिला जिसमें इजरायल ने पहले 5-6 अलगअलग शहरों में आतंकियों को गोली मारी हो और फिर बम फेंककर सड़क पर उमड़े उनके हजारों समर्थकों को मार डाला हो.
लेकिन, ै कि 1970 और 80 के दशक में इजरायल ने ‘फलस्तीन लिबरेशन ऑर्गेनाइजेशन’ नाम के आतंकी संगठन से अपने ओलंपिक खिलाडि़यों की हत्या का बदला लिया था. इजरायल ने हत्या के मिशन में शामिल आतंकियों को चुन-चुन कर मारा था. इसे 'ऑपरेशन रॉथ ऑफ गॉड' नाम दिया गया था.
निर्देशक स्टीवन स्पीलबर्ग की 2005 में आई फिल्म ‘म्यूनिख’ इसी ऑपरेशन परआधारित है.जाहिर है, अजीत डोभाल के नाम पर एक आधी सच्ची, आधी झूठी कहानी शेयर करके हिंसा भड़काने की कोशिश की जा रही है.
ज्योति द्विवेदी