फैक्ट चेक: विनेश और संगीता फोगाट की इन फर्जी तस्वीरों पर न करें यकीन

एक ट्विटर यूजर ने इस फोटो को पोस्ट करते हुए लिखा, “देश के लिए महिला रेसलिंग में पहला ओलंपिक मेडल दिलाने वाली @SakshiMalik है ये! ऐसी तस्वीर तो तालीबान में भी देखने को नहीं मिली. दरअसल यह घटना साल 2021 की है, जिसमें पुलिस ने एक युवक के मुंह पर पैर रखा हुआ है.

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आजतक फैक्ट चेक

दावा
फोटो में देखा जा सकता है कि पुलिसवाले ने किस तरह पहलवान साक्षी मलिक के चेहरे को अपने जूते के नीचे दबा रखा है.  
सच्चाई
साल 2021 की ये फोटो किसान आंदोलन से संबंधित है. इसमें जिस व्यक्ति के चेहरे पर पुलिसवाले ने जूता रखा है उसका नाम रणजीत सिंह है.

ज्योति द्विवेदी

  • नई दिल्ली,
  • 29 मई 2023,
  • अपडेटेड 12:41 PM IST

28 मई को नए संसद भवन के सामने महिला सम्मान महापंचायत से पहले पु​लिस ने विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया को हिरासत में ले लिया. हालांकि बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया. 

इन घटनाक्रमों के बीच सोशल मीडिया पर '#WrestlersProtest' हैशटैग के साथ दो तस्वीरें खूब वायरल हो रही हैं. इनमें से पहली फोटो में एक पुलिसवाला किसी व्यक्ति के चेहरे पर जूता रखे हुए दिखाई दे रहा है. कुछ लोगों को कहना है कि ये तस्वीर साक्षी मलिक की है और देश के लिए मेडल लाने वाली पहलवान साक्षी के साथ पुलिस का ऐसा व्यवहार बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है.

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एक ट्विटर  ने इस फोटो को पोस्ट करते हुए लिखा, “देश के लिए महिला रेसलिंग में पहला ओलंपिक मेडल दिलाने वाली @SakshiMalik है ये! ऐसी तस्वीर तो तालीबान में भी देखने को नहीं मिली. देश का जमीर जिंदा है या मर गया या फिर बिक गया.” इस पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन  देखा जा सकता है. 

इसी तरह दो तस्वीरें का एक कोलाज भी खूब शेयर हो रही है. कोलाज की पहली फोटो में संगीता और विनेश फोगाट सड़क पर लेटी हुई दिख रही हैं. वहीं दूसरी फोटो में दोनों बहनें मुस्कुराती हुई दिखाई दे रही हैं. इस तस्वीर को शेयर करते हुए तंज कसा जा रहा है कि दोनों महिला पहलवान सिर्फ एक्टिंग कर रही थीं ​कि उन पर पुलिस अत्याचार कर रही है और वो परेशान हैं.

एक ट्विटर ने इस कोलाज को शेयर करते हुए लिखा, “क्या स्पोर्ट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (NSFOI) एक्टिंग क्लासेस भी देती है?” इस पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन  देखा जा सकता है. 

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इंडिया टुडे फैक्ट चेक ने पाया कि पहली वायरल फोटो जिसमें एक पुलिसवाला किसी के चेहरे पर जूता रखे है, वो साल 2021 की है और किसान आंदोलन से संबंधित है. वहीं दूसरी फोटो जिसमें विनेश और संगीता फोगाट मुस्कुराती दिख रही हैं, वो फेसऐप नामक एक एप्लीकेशन से बनाई गई थी. असली फोटो में दोनों बहनें परेशान नजर आ रही हैं.

रणजीत सिंह नामक शख्स की है पहली फोटो 

पहली फोटो जिसमें एक पुलिसवाला एक व्यक्ति के चेहरे पर जूता रखे हुए दिख रहा है, उसे रिवर्स सर्च करने पर ये हमें "द टाइम्स ऑफ इंडिया" की एक फरवरी, 2021 की एक  में मिली. इसमें बताया गया है कि फोटो में जिस व्यक्ति के चेहरे पर पुलिसवाले ने जूता रखा हुआ है, वो 22 साल का रणजीत सिंह नाम का युवक है. रणजीत पंजाब के नवांशहर जिले में स्थित काजमपुर गांव का रहने वाला था.

दरअसल उस वक्त किसान आंदोलन के दौरान दिल्ली पुलिस ने आरोप लगाया था कि रणजीत सिंह ने तलवार से एक एसएचओ पर हमला कर दिया.


"दी लल्लनटॉप" की एक  में इस घटना के बारे में विस्तार से बताया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, ये तस्वीर 29 जनवरी, 2021 को ​दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर पुलिस और किसान आंदोलन में हिस्सा ले रहे प्रदर्शनकारियों के बीच हुए टकराव की है. इस दिन किसानों और वहां जुटे कुछ स्थानीय लोगों के बीच झड़प हो गई. स्थानीय लोग सड़क खाली कराना चाह रहे थे. इसी बीच अलीपुर थाने के एसएचओ प्रदीप पालीवाल दोनों पक्षों के बीच चल रही झड़प को शांत कराने लगे. है कि इसी बीच रणजीत सिंह नाम के शख्स ने उन पर तलवार से हमला कर दिया जिसमें वो घायल हो गए. इसके बाद पुलिस ने रणजीत सिंह को जमकर पीटा. ये फोटो तभी की है. उस वक्त पुलिस ने रणजीत सहित 44 लोगों को गिरफ्तार किया था.

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क्या है दूसरी फोटो की कहानी?

दूसरी फोटो को रिवर्स सर्च करने पर ये हमें मनदीप पुनिया नामक पत्रकार के एक  में मिली. यहां मौजूद फोटो में विनेश और संगीता के चेहरे पर कोई मुस्कुराहट नहीं है, बल्कि वो चिंतित दिख रही हैं. वायरल फोटो पर कमेंट करते हुए बहुत सारे लोगों ने लिखा है कि विनेश और संगीता को फेस एप नामक एप्लिकेशन की मदद से मुस्कुराते हुए दिखाया गया है.

हमने फेसऐप के जरिये मनदीप पुनिया के ट्वीट में मौजूद फोटो को एडिट किया और विनेश-संगीता को मुस्कुराता हुआ दिखाया. इससे एकदम वैसी ही तस्वीर तैयार हो गई जैसी इस समय वायरल हो रही है. इसे नीचे देखा जा सकता है.

पहलवानों के प्रदर्शन को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार झूठी खबरें फैलाई जा रही हैं. कुछ समय पहले साक्षी मलिक ने प्रधानमंत्री मोदी की रैली की एक तस्वीर पहलवानों के आंदोलन के समर्थन में उमड़ी भीड़ बताकर शेयर की थी. उस वक्त भी हमने इसकी सच्चाई बताई थी. इससे संबंधित फैक्ट चेक यहां पढ़ा जा सकता है.  

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