फैक्ट चेक: मुंबई की 10 साल पुरानी फोटो को यूपी का बताकर सपा ने साधा योगी सरकार पर निशाना

पोस्टकार्ड में दो तस्वीरें हैं. पहली तस्वीर किसी ऑफिस की है जहां कुछ लोगों को लैपटॉप-कंप्यूटर पर काम करते देखा जा सकता है. इसे 2017 से पहले की यूपी की तस्वीर बताया गया है जब राज्य में अखिलेश यादव की सरकार थी.

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आजतक फैक्ट चेक

दावा
इन तस्वीरों से पता चलता है कि कैसे यूपी में सपा कार्यकाल के दौरान युवाओं को रोजगार मिलता था. लेकिन बीजेपी के शासनकाल में उन्हें लाठियां खानी पड़ती हैं.
सच्चाई
पहली तस्वीर यूपी की नहीं है. ये साल 2011 की मुंबई के एक ऑफिस की फोटो है. हालांकि, दूसरी फोटो यूपी में योगी कार्यकाल के दौरान ही ली गई थी जब 2018 में लखनऊ में प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया था.

अर्जुन डियोडिया

  • लखनऊ,
  • 13 जनवरी 2022,
  • अपडेटेड 1:12 AM IST

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक आते आते आरोप प्रत्यारोप की राजनीति तेज हो गई है. इसी बीच समाजवादी पार्टी के मीडिया सेल ने एक पोस्टकार्ड करते हुए योगी सरकार पर निशाना साधा है. पोस्टकार्ड में 2017 से पहले यूपी में सत्ता पर काबिज सपा सरकार की तुलना 2017 में बनी योगी सरकार से की गई है. पोस्ट के जरिए ऐसा बताने की कोशिश की गई है कि यूपी में सपा कार्यकाल के दौरान युवाओं को रोजगार मिलता था. लेकिन बीजेपी के शासनकाल में उन्हें लाठियां खानी पड़ती हैं.  

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पोस्टकार्ड में दो तस्वीरें हैं. पहली तस्वीर किसी ऑफिस की है जहां कुछ लोगों को लैपटॉप-कंप्यूटर पर काम करते देखा जा सकता है. इसे 2017 से पहले की यूपी की तस्वीर बताया गया है जब राज्य में अखिलेश यादव की सरकार थी.

वहीं दूसरी फोटो में कुछ पुलिसकर्मी युवाओं की भीड़ पर लाठी चलाते नजर आ रहे हैं. इस फोटो को 2017 के बाद, यानी योगी कार्यकाल का बताया गया है. पोस्टकार्ड में बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा है "".

क्या है सच्चाई?

इंडिया टुडे की जांच में सामने आया कि पहली तस्वीर यूपी की है ही नहीं. ये साल 2011 की मुंबई के एक ऑफिस की फोटो है. हालांकि, दूसरी फोटो योगी कार्यकाल के दौरान ही ली गई थी जब लखनऊ में प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया था.

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पहली फोटो

रिवर्स सर्च करने पर हमें ये फोटो "" वेबसाइट पर मिली. यहां दी गई जानकारी के अनुसार, ये तस्वीर मुंबई की एक सॉफ्टवेयर कंपनी 'मोफर्स्ट सॉल्यूशंस' के ऑफिस में 20 अगस्त 2011 को ली गई थी.

फोटो में दिख रहे लोग प्रोग्रामर हैं जो आईफोन और एंड्रॉइड के लिए सॉफ्टवेयर बना रहे हैं. कुछ न्यूज  ने भी इस फोटो को मुंबई का बताकर छापा है.

दूसरी तस्वीर

खोजने पर हमें ये फोटो न्यूज वेबसाइट "" के 3 नवंबर 2018 को छपे एक आर्टिकल में मिली.

आर्टिकल में बताया गया है कि लखनऊ में सहायक अध्यापक भर्ती के रिक्त पदों को भरे जाने  को लेकर विधान भवन के सामने कई अभ्यर्थी प्रदर्शन कर रहे थे. पुलिसकर्मियों ने उन्हें समझा- बुझाकर प्रदर्शन खत्म कराने की कोशिश की लेकिन वो नहीं माने.

प्रदर्शन उग्र हो गया जिसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा. लाठीचार्ज में दर्जनों अभ्यर्थी घायल हो गए. खून से लथपथ कुछ अभ्यर्थियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया. उस समय इस घटना पर काफी बवाल हुआ था. वायरल फोटो सहित घायल अभ्यर्थियों की तस्वीरें राहुल गांधी ने भी शेयर की थीं.

 

कुल मिलाकर निष्कर्ष ये निकलता है कि समाजवादी पार्टी मीडिया सेल ने जो पोस्टकार्ड शेयर किया है वो आधा सच बताता है. पोस्टकार्ड की एक फोटो तो योगी कार्यकाल की ही है लेकिन दूसरी का यूपी या सपा से कोई लेना-देना नहीं है.

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