पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राज्य में अब तक की सबसे ज्यादा अर्धसैनिक बल की तैनाती हुई है. ये संख्या लगभग ढाई लाख के आसपास बताई जा रही है.
इसी संदर्भ में एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इसमें दो लोग एक दुकान के शटर पर कुल्हाड़ी से वार करते देखे जा सकते हैं. कुछ ही पल बाद एक हरे रंग की जीप वहां रुकती है और उसमें से दो जवान निकलते हैं. उन्हें देखकर कुल्हाड़ी पकड़े हुए लोग रुक जाते हैं. बंदूक ताने जवान जैसे ही उनके पास आते हैं, दोनों कुल्हाड़ी छोड़ कर घुटने टेक देते हैं और कान पकड़ कर बैठ जाते हैं.
इसे शेयर करने वालों का कहना है कि ये लोग तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से जुड़े उपद्रवी थे जिन्हें सीआरपीएफ ने अच्छे से सबक सिखाया.
वीडियो को एक्स पर शेयर करते हुए एक व्यक्ति ने लिखा, “टीएमसी के गुंडे धमकाने आए थे, पर भूल गए बंगाल में अब सीआरपीएफ तैनात हैं. कर दिया इलाज.”
बंगाल पुलिस पर चुटकी लेते हुए एक फेसबुक यूजर ने लिखा, “दंगाई मजहबी गुंडे सोच रहे थे कि चुनावों की कमान अब भी लोकल पुलिस के ही हाथों में है. फिर सेना मौके पर पहुंच कर इन मजहबी गुंडों के चारों फिल्टर चौक कर दिए.”
आजतक फैक्ट चेक ने पाया कि इस घटना का भारत से कोई लेना-देना नहीं है. वीडियो बांग्लादेश के फरीदपुर जिले का है, जहां बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के एक गुट के कार्यकर्ताओं ने दूसरे गुट के कार्यकर्ता की दुकान पर हमला कर दिया था.
कैसे पता लगाई सच्चाई?
वीडियो के कीफ्रेम्स को रिवर्स सर्च करने पर हमें ये Independent Television और Kalbela News जैसे कई बांग्लादेशी न्यूज आउटलेट्स के यूट्यूब चैनल पर मिला. यहां इसे 17 अगस्त, 2024 को अपलोड किया गया था. इन वीडियो रिपोर्ट्स के मुताबिक ये मामला बांग्लादेश के फरीदपुर का है.
ढाका पोस्ट की रिपोर्ट में भी ये वीडियो देखा जा सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, ये घटना फरीदपुर के Boalmari में 14 अगस्त को हुई थी. वीडियो में नजर आ रहे बीएनपी के दोनों कार्यकर्ताओं - मोहम्मद हुसैन और दुखु मियां - को गिरफ्तार कर लिया गया.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इससे पहले फरीदपुर-1 चुनावी क्षेत्र से बीएनपी उम्मीदवार शमसुद्दीन मियां पर हमला हुआ था. शमसुद्दीन ने अपनी ही पार्टी के एक अन्य उम्मीदवार, नसरूल इस्लाम पर हमला कराने का आरोप लगाया था. दोनों नेताओं के बीच हुए इस विवाद के चलते पार्टी के कार्यकर्ता दो गुटों में बंट गए थे. उसके बाद ही ये घटना हुई थी.
साफ है कि बांग्लादेश के पुराने वीडियो को पश्चिम बंगाल का बताकर झूठ फैलाया जा रहा है.
फैक्ट चेक ब्यूरो