अस्सी फीसदी बर्फ से ढंके ग्रीनलैंड में कैसे काम करती है सेना, क्यों कुत्तों की एक टुकड़ी मानी जाती है सबसे अहम और खतरनाक?

डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा चाहते हैं. उनका मानना है कि डेनमार्क के अधीन आने वाला यह अर्द्ध स्वायत्त देश अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी है. इसे पाने के लिए वे सैन्य जोर भी लगा सकते हैं. इधर ग्रीनलैंड के पास सेना के नाम पर डेनिश मिलिट्री है. साथ ही बर्फीले इलाके हैं, जहां आम सैनिक नहीं पहुंच सकते.

Advertisement
ग्रीनलैंड में सिरियस डॉग पेट्रोल गश्त करते हुए बारीक से बारीक बदलाव पर नजर रखता है. (Photo- Pexels) ग्रीनलैंड में सिरियस डॉग पेट्रोल गश्त करते हुए बारीक से बारीक बदलाव पर नजर रखता है. (Photo- Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 20 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:52 AM IST

ग्रीनलैंड अभी खासा चर्चा में है. डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन उसे पाने के लिए पूरा जोर लगाए हुए है. पुचकारने से लेकर धमकाने तक के दांव खेले जा रहे हैं. इस बीच इस द्वीपीय देश की फौज पर भी बात हो रही है. ग्रीनलैंड चूंकि सेमी-ऑटोनॉमस देश है, जो डेनमार्क के अधीन है, लिहाजा उसे बचाने का जिम्मा भी डेनिश सेना के पास है. ये सेना भारी बर्फबारी और आबादीशून्य इलाकों में लगातार पेट्रोलिंग करती है.

Advertisement

बर्फीले हिस्से में किसी भी विदेशी हलचल पर नजर रखने के लिए डॉग पेट्रोल है. इस टुकड़ी को सिरियस डॉग स्लेज पेट्रोल भी कहते हैं. सिरियस एक लैटिन शब्द है, जिसका मतलब है चमकता हुआ या अलर्ट. सैनिकों और कुत्तों की टीम तूफानी इलाकों में पूरी सावधानी से घूमती रहती है. 

क्यों पड़ी इस तरह की फौज की जरूरत

ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप देश है. भारत के मुकाबले देखें तो यह देश के करीब दो तिहाई आकार का है. इतने बड़े आकार के बावजूद यहां की आबादी पचपन हजार से कुछ ही ज्यादा है. इसकी वजह ये है कि देश का 80 फीसदी हिस्सा मोटी बर्फ से ढंका हुआ है. यह भी मामूली बर्फ नहीं कि सही जा सके. बर्फ की चादरें कई किलोमीटर मोटी होती हैं. महीनों तक तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से भी कम होता है. ऐसे में सैन्य उपकरणों और वाहन नहीं पहुंच सकते. और पहुंच भी जाएं तो गश्त तो नहीं ही हो सकती क्योंकि न तो वहां सड़कें हैं, न ही पुल. लेकिन सुरक्षा तो जरूरी है. तो इसका एक तरीका खोजा गया- डॉग स्लेज. 

Advertisement

सिरियस डॉग स्लेज पेट्रोल दुनिया की सबसे अनोखी और एलीट मिलिट्री यूनिट्स में गिनी जाती है, जो ग्रीनलैंड के उत्तर पूर्वी हिस्से की जमी हुई जमीन पर तैनात रहती है. ये वो इलाका है,  जिसे दुनिया के सबसे ठंडे, सुनसान और दुर्गम क्षेत्रों में रखा जाता है.

दूसरे वर्ल्ड वॉर के बाद डेनमार्क ने आर्कटिक इलाके में डॉग पेट्रोलिंग शुरू की. (Photo- Pixabay)

डेनमार्क सरकार ने स्लेज पेट्रोल यूनिट को साल 1950 में बनाया था. यह दस्ता किसी भी विदेशी गतिविधि, अवैध घुसपैठ, चुपचाप हो रहे रिसर्च मिशन या संदिग्ध मूवमेंट पर नजर रखता है. खास बात यह है कि यहां आधुनिक टैंक या बख्तरबंद गाड़ियां नहीं चल सकतीं, इसलिए गश्त आज भी पुराने तरीके से होती है. 

किस नस्ल के डॉग्स होते हैं और क्या प्रशिक्षण मिलता है

सिरियस पेट्रोल में ग्रीनलैंडिक स्लेज डॉग नस्ल के कुत्तों का इस्तेमाल होता है. ये कुत्ते बेहद मजबूत और ठंड में काम करने के लिए खास तौर पर पाले जाते हैं. इन्हें छोटी उम्र से बर्फ में चलने, स्लेज खींचने और झुंड में काम करने की आदत डलवाई जाती है. उन्हें इंसानों की मौजूदगी में रहने और आदेशों पर प्रतिक्रिया देने की ट्रेनिंग दी जाती है, लेकिन यहां कुत्तों को बहुत सख्त कंट्रोल में नहीं रखा जाता. इन्हें काम के दौरान काफी हद तक अपनी कुदरती समझ का इस्तेमाल करने दिया जाता है क्योंकि वे जो समझ पाते हैं,

Advertisement

कई बार सैनिक भी वहां चूक जाते हैं. डॉग्स को सिखाया जाता है कि बर्फीले रास्तों पर कैसे संतुलन बनाए रखना है, गहरी बर्फ और ढलानों में स्लेज खींचनी है और बर्फ की गहरी दरारों से कैसे बचना है. इन्हें तूफानी हवाओं और लंबे अंधेरे में भी रहने की ट्रेनिंग मिलती है ताकि वे कंफर्टेबल हो सकें. 

सैनिकों को भी कुत्तों के साथ काम करने की ट्रेनिंग दी जाती है. उन्हें  यह सीखना होता है कि कुत्तों की भाषा, उनके व्यवहार और संकेतों को कैसे समझा जाए. स्लेज पेट्रोल में सैनिक और डॉग्स एक टीम की तरह काम करते हैं. 

स्पेशल आर्कटिक फोर्सेज के अलावा डेनमार्क के पास रॉयल गार्ड्स भी हैं. (Photo- Pixabay)

अब बात करें स्लेज की, तो यह लकड़ी और हल्के मेटल का बना हुआ फ्रेम होता है, जिसके नीचे बर्फ पर फिसलने वाले पैड लगे होते हैं. सैनिक इसपर अपना सामान और जरूरी चीजें रखते हैं, कई बार वे इसपर बैठते भी हैं, लेकिन ज्यादातर पैदल चलते हुए ये गश्त होती है. 

एक टीम में आमतौर पर 2 सैनिक होते हैं और उनके साथ 10 से 14 कुत्तों की एक स्लेज होती है. ये कुत्ते बर्फीले मैदान, ग्लेशियर और पहाड़ी रास्तों पर सैकड़ों किलोमीटर तक स्लेज खींचते हैं. मिशन पर सैनिक रोटेशन पर रखे हैं और एक सैनिक दो से तीन महीनों तक बर्फ में रहता है. ठहराव के लिए बीच-बीच में तंबू लगाए जाते हैं, जहां टीम आराम कर सके. 

Advertisement

सेना की आंख-कान बने रहना है काम

सिरियस पेट्रोल का काम बेहद मुश्किल तो है लेकिन इसकी क्षमताएं सीमित हैं. यह यूनिट लड़ाकू सेना नहीं है. इसके पास न फाइटर जेट हैं,  न मिसाइलें हैं. यहां तक कि सैनिक भी काफी नहीं हैं. इसका काम दूसरा है. यह गश्त दल ग्रीनलैंड की आंख और कान बना रहता है. दरअसल ग्रीनलैंड का उत्तर-पूर्वी इलाका किलोमीटर तक खाली है. ऐसे में यहां अगर कोई चुपचाप कोई भी गतिविधि करे या सेंसर ही लगा दे तो उसे पकड़ना मुश्किल हो सकता है. यहीं डॉग स्लेज पेट्रोल काम आती है. कुत्ते गंध और हलचल पहले पकड़ लेते हैं, यानी कोई बाहरी आए तो छिपना आसान नहीं. यहां से दल सीधे सैन्य टुकड़ियों को खबर भेज देता है. 

और भी कई खास सैन्य दस्ते सक्रिय

जैगर कॉर्प्स का सीधा मतलब है शिकारी. यह टुकड़ी इतनी खतरनाक है कि इसकी तुलना यूएस आर्मी रेंजर्स से होती रही. ये लोग एक्सट्रीम आर्कटिक वॉरफेयर के लिए प्रशिक्षित हैं. 

फ्रॉगमेन कॉर्प्स रॉयल डेनिश नेवी के तहत काम करने वाला दल है. यह भी यूएस की नेवी की टक्कर का माना जाता रहा. ये लोग जमे हुए पानी में भी जंग लड़ सकते हैं. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement