अगरबत्ती का धुआं बना कोहरा, रुई से बने बादल, रामानंद सागर की रामायण में दिखे ये जुगाड़

प्रेम सागर ने रामायण शूटिंग से जुड़ी कुछ ऐसी बातें बताई हैं, जिन्हें जानकर आप भी समझ जाएंगे कि उस जमाने में ऐसा सीरियल बनाना कितनी बड़ी चुनौती थी. प्रेम सागर बताते हैं कि शो में कई वीएफएक्स ऐसे थे जिनमें तकनीक कम और जुगाड़ ज्यादा था.

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रामायण में राम, लक्ष्मण और सीता रामायण में राम, लक्ष्मण और सीता

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 मई 2020,
  • अपडेटेड 10:29 AM IST

रामानंद सागर की रामायण तीन दशक पहले टीवी पर प्रसारित हुई थी. उस जमाने में कम संसाधन, छोटे बजट के बावजूद सीरियल ने दर्शकों को ऐसी भव्य प्रस्तुति दिखाई की हर कोई देखता ही रह गया. सीरियल में कलाकारों की एक्टिंग तो पसंद की ही गई, लेकिन वीएफएक्स भी चर्चा का विषय बने.

अगरबत्ती से बनाते थे कोहरा

अब प्रेम सागर ने रामायण शूटिंग से जुड़ी कुछ ऐसी बातें बताई हैं, जिन्हें जान आप भी समझ जाएंगे कि उस जमाने में ऐसा सीरियल बनाना कितनी बड़ी चुनौती थी. प्रेम सागर बताते हैं कि शो में कई वीएफएक्स ऐसे थे जिनमें तकनीक कम और जुगाड़ ज्यादा था.

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वो कहते हैं- अगर सुबह की शूटिंग होती थी, तो हम अगरबत्ती के धुंए के जरिए कोहरा दिखाया करते थे. वहीं अगर रात में शूटिंग होती थी तो रुइ के जरिए बादल बनाए जाते थे. प्रेम कहते हैं- हम कई बार रात की शूटिंग के समय शीशे पर रुई लगा दिया करते थे. फिर उसे कैमरे में फिट कर शूट करते थे. स्लाइड प्रोजेक्टर में कई ऐसी स्लाइड का इस्तेमाल किया गया, तब ऐसे इफेक्ट देखने को मिले.

रामायण में वैसे तो कई सीन्स यादगार हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी थे जिन्हें देख रोंगटे खड़े हो गए. ऐसा ही एक सीन था हिमालय पर भगवान शिव का नृत्य. अब उस सीन को दिखाने में कई तरह के जुगाड़ करने पड़े थे. इस बारे में प्रेम सागर बताते हैं- उस सीन को शूट करने के लिए हमने बैकग्राउंड में एक स्क्रीन का इस्तेमाल किया. फिर प्रोजेक्टर के जरिए छोटे ग्रहों की तस्वीरें दिखाई.

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ऐसे होते थे युद्ध के सीन शूट

वहीं रामायण में युद्ध के सीन्स भी काफी आकर्षक लगे थे. वो तीरों का एक दूसरे से टकराना, बादलों का गरजना, सभी इफेक्ट्स दर्शकों के मन में आज भी ताजा हैं. उस जमाने में उन सीन्स को शूट करने के लिए SEG 2000 का प्रयोग किया गया था. वो उस समय बाजार में नई-नई आई थी और ज्यादा लोग उसके बारे में जानते भी नहीं थे. प्रेम सागर के मुताबिक स्पेशल इफेक्ट्स के लिए ग्लास मैटिंग का भी सहारा लिया गया था.

बता दें कि रामायण की शूटिंग के समय हर कलाकार ने रात-दिन एक कर दिए थे. खुद रामानंद सागर भी कई बार सुबह 3 बजे तक किसी सीन की स्क्रिप्ट लिख पाते थे. लेकिन जैसे ही वो स्क्रिप्ट पूरी होती थी, सीन की शूटिंग शुरू कर दी जाती. मतलब समय कुछ भी हो, एपिसोड का समय पर प्रसारण होना बहुत जरूरी होता था. शुरू से आखिर तक यही सिलसिला जारी रहा था और करीब 100 आर्टिस्ट ने ये कठिन रूटीन फॉलो किया था.

इस समय जब देश में लॉकडाउन लगा हुआ है, तब फिर रामायण की काफी चर्चा हो रही है. शो की रिकॉर्ड तोड़ टीआरपी इस बात की ओर इशारा करती है कि शो जरूर पुराना हो, लेकिन अगर कंटेट अच्छा हो और एक्टिंग बेमिसाल, तो दर्शकों का दिल जरूर जीता जा सकता है.

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