मॉब लिंचिंग पर पीएम मोदी को चिट्ठी लिखने वाली 49 हस्तियों के खिलाफ FIR दर्ज

बीते दिनों पीएम मोदी को मॉब लिंचिंग पर चिंता जताते हुए ओपन लेटर लिखा था.  इस मामले में गुरूवार को लगभग 50 सेलिब्रिटीज के खिलाफ FIR दर्ज करवाई गई. इसमें रामचंद्र गुहा, मणि रत्नम, अनुराग कश्यप और अपर्णा सेन जैसे सेलेब्स का नाम शामिल है.

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डायरेक्टर मणि रत्नम और अनुराग कश्यप डायरेक्टर मणि रत्नम और अनुराग कश्यप

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 04 अक्टूबर 2019,
  • अपडेटेड 3:10 PM IST

मॉब लिंचिंग के खिलाफ बॉलीवुड और अन्य इंडस्ट्री के स्टार्स द्वारा पीएम मोदी लिखे खत के मामले ने नया मोड़ ले लिया है. खबर है कि गुरूवार को लगभग 50 सेलिब्रिटीज के खिलाफ FIR दर्ज करवाई गई. इसमें रामचंद्र गुहा, मणि रत्नम, अनुराग कश्यप और अपर्णा सेन जैसे सेलेब्स मौजूद हैं, जिन्होंने मोदी को मॉब लिंचिंग पर चिंता जताते हुए ओपन लेटर लिखा था.

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किसने की FIR?

खबर में बताया गया है कि लोकल अधिवक्ता सुधीर कुमार ओझा द्वारा फाइल किए गए केस पर सुनवाई करते हुए चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट सूर्य कान्त तिवारी ने ये फैसला सुनाया था, जिसके बाद ये FIR फाइल की गई है. सुधीर कुमार ओझा ने बताया, 'चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने 20 अगस्त को ये आर्डर पास किया था. मेरी पेटिशन को स्वीकार किया गया था, जिसकी रसीद देकर आज सदर पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई है.'

उन्होंने बताया लगभग 50 दस्तखत करने वाले लोगों के नाम पर उन्होंने पेटिशन डाली थी. खबर है कि इस पेटिशन में उन्होंने देश की इमेज को खराब करने और प्रधानमंत्री के बढ़िया काम को कम आंकने का इल्जाम लगाया था.

पुलिस के मुताबिक, ये FIR भारतीय पीनल कोड के सेक्शंस के तहत दर्ज की गई है, जिसमें देशद्रोह, सार्वजनिक उपद्रव, धार्मिक भावनाओं को आहत करना और शांति भंग करने के इरादे से अपमान करना शामिल है.

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क्या है मामला?

बता दें कि ने पीएम मोदी को इस  साल जुलाई में ओपन लेटर लिखा था. इसमें उन्होंने मांग की थी कि वे मॉब लिंचिंग की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कानून बनाए और आरोपियों को कड़ी सजा दी जाए.

लेटर में लिखा है, हमारा संविधान भारत को एक धर्मनिरपेक्ष गणतंत्र बताता है, जहां हर धर्म, समूह, लिंग, जाति के लोगों के बराबर अधिकार हैं. इस पत्र में मांग की गई है कि दलितों, मुस्लिमों और दूसरे अल्पसंख्यकों की लिंचिंग की रोकथाम हो. ये भी लिखा है कि पीएम मोदी के मात्र ऐसी घटनाओं की आलोचना कर देने भर से काम नहीं चलेगा.

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