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सनी देओल की गदर के वो 15 डायलॉग्स जो आज भी 'गदर' मचाए हुए हैं

aajtak.in
  • 15 जून 2019,
  • अपडेटेड 5:24 PM IST
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साल 2001 में आई सनी देओल की फिल्म गदर के बारे में कहा जाता है कि इसे साढ़े पांच करोड़ लोगों ने सिनेमाघरों में देखा है. इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस फिल्म के लिए दर्शकों में कितनी दीवानगी थी. भारत-पाक विभाजन जैसे संवेदनशील मुद्दे पर बनी इस फिल्म में सनी देओल के तेजतर्रार डायलॉग्स ने फिल्म की सफलता में जबरदस्त सहयोग किया. फिल्म में कई डायलॉग्स ऐसे भी थे जो शांति और अमन का पैगाम लिए हुए थे और जो कहीं ना कहीं आज के दौर में भी प्रासंगिक हैं. गदर के 18वें  के वो दमदार 15 डायलॉग्स जिसके चलते ये फिल्म आज भी दर्शकों के दिलों पर छाई है.

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अगर मैं अपने बीवी-बच्चे के लिए सर झुका सकता हूं, तो मैं सबके सर काट भी सकता हूं.

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किसी को हिंदुस्तान चाहिए तो किसी को पाकिस्तान, इंसानों की तो इंसानों को जरूरत ही नहीं

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आदमी का सबसे बड़ा मज़हब है अपनी बीवी और बच्चों की हिफाज़त करना.

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सियासतें बदल गईं, मुल्क के नाम बदल गए, पर दिल के जज्बात तो नहीं बदले जा सकते ना

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मुझ गरीब पर रहम तुमने क्या किया, जो कुछ था मेरे पास सब लूट लिया.    

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अशरफ अली! आपका पाकिस्तान ज़िंदाबाद है, इससे हमें कोई ऐतराज़ नहीं लेकिन हमारा हिंदुस्तान ज़िंदाबाद है, ज़िंदाबाद था और ज़िंदाबाद रहेगा! 

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बाप बनकर बेटी को विदा कर दीजिए, इसी में सबकी भलाई है, वरना अगर आज ये जट बिगड़ गया तो सैकड़ों को ले मरेगा.

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रब एक, खुदा एक, तो उसके बनाए हुए सब बंदे भी एक हुए ना, फिर क्या सिंह और क्या खान

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  • 10/15

जब पानी पुल के नीचे से एक बार निकल जाता है तो वो वापस नहीं आता

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इस मुल्क से ज़्यादा मुसलमान हिन्दुस्तान में हैं. उनके होंठ और दिलों की धड़कनें हमेशा यही कहती हैं ‘हिन्दुस्तान ज़िंदाबाद’. तो क्या वो पक्के मुसलमान नहीं हैं?

  • 12/15

बरसात से बचने की हैसियत नहीं और गोलीबारी की बात कर रहे हैं आप लोग

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ये मुल्क है कोई खेत का टुकड़ा नहीं, जो यूं ही बंट जाएगा.

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एक कागज़ पर मोहर नहीं लगेगी तो क्या तारा पाकिस्तान नहीं जाएगा? मुझे मेरे बच्चे को उसकी मां से मिलाने से कोई ताकत, कोई सरहद नहीं रोक सकती.  

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ज़िंदगी कितनी ही बेरहम क्यों न हो, जीना तो पड़ता है मैडम जी, जीना तो पड़ता है.     

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