'जुबान खींचने का दर्द दिखाना था' चैलेंजिंग था धुरंधर 2 का डेथ सीन, बोले सुविंदर विक्की

धुरंधर 2 में ब्रिगेडियर जहांगीर की खौफनाक मौत ने दर्शकों को चौंका दिया. लेकिन इस सीन के पीछे अभिनेता सुविंदर के लिए असली चुनौती सेफ़्टी, दर्द और इमोशन्स को साथ लेकर परफॉर्म करना था. ओटीटी पर गंभीर किरदार निभाने वाले सुविंदर ने बताया कि कैसे गालियों और हिंसा से भरा ये रोल उनके लिए बिल्कुल अलग अनुभव बना.

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सुविंदर विक्की ने बताया क्यों मुश्किल था धुरंधर 2 का डेथ सीन (Photo: Instagram/@suvindervicky) सुविंदर विक्की ने बताया क्यों मुश्किल था धुरंधर 2 का डेथ सीन (Photo: Instagram/@suvindervicky)

सुबोध मिश्रा

  • नई दिल्ली ,
  • 07 मई 2026,
  • अपडेटेड 8:47 AM IST

धुरंधर ने पहले ही ये टोन सेट कर दिया था कि मेजर इकबाल का किरदार, जिसे अर्जुन रामपाल ने निभाया है, एक खूंखार विलेन है. इसलिए जब धुरंधर 2 में रिवील हुआ कि मेजर इकबाल भले बाहर भयानक लगता हो लेकिन उसके ही घर में उससे भी बुरा एक एंटी-इंडिया विलेन है तो ऑडियंस काफी सरप्राइज हुई.

इकबाल को लगातार तानों और गालियों से नवाजते उसके बाप ब्रिगेडियर जहांगीर ने जनता को खूब एंटरटेन किया. और उनके किरदार की एंडिंग पिछले कुछ सालों में बॉलीवुड फिल्मों की सबसे चर्चित मौतों में से एक है. ये किरदार निभाने वाले सुविंदर विक्की ने AajTak.In को बताया कि कम टाइम के लिए स्क्रीन पर रहने वाले इस किरदार को निभाना कितना चैलेंजिंग था. 

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चुप्पी से सीधा गालियों की बौछार पर आ गए सुविंदर
धुरंधर 2 से पहले सुविंदर का काम जनता ने ओटीटी पर नोटिस किया था. कोहरा जैसी बेहतरीन वेब सीरीज में उनके किरदार को कहानी का लीड किरदार कहा जा सकता है. मील पत्थर फिल्म में ज्यादातर चुप रहने वाले सुविंदर ने जैसे खामोश रहते हुए भी दमदार तरीके से सिर्फ चेहरे के एक्सप्रेशन से इमोशन दिखाए, उसकी क्रिटिक्स ने बहुत तारीफ की थी.

लेकिन धुरंधर 2 में ब्रिगेडियर जहांगीर बहुत गालियां देने वाला किरदार था. सुविंदर ने बताया, 'मुझे लगा यार ये किस रोल में आ गया हूं! कहां मैं मील पत्थर फिल्म में गालिब बना था, बीच में कोहरा और कैट थे, जो बड़े इमोशन्स दिखाने वाले रोल थे. और यहां जुबान से गालियां ब्लास्ट करनी थीं. मुझे तो लग रहा था कि सारी गालियों को बीप कर दिया जाएगा तो मेरी एक सीधी लाइन फिल्म में नहीं बचेगी. मैंने आदित्य धर से कहा कि यार ये तो बहुत ज्यादा गालियां हैं. उन्होंने कहा कि पाजी मां और बहन को छोड़कर सब बक देना है. जितनी गालियां मैंने दी हैं, वो सब स्क्रिप्ट में थीं. बाकी आदमी एक्टिंग कर रहा होता है तो फ़्लो-फ़्लो में कुछ अपने आप निकल जाती हैं!'

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डेथ सीन में था असली चैलेंज
धुरंधर 2 में मेजर इकबाल जिस तरह अपने पिता की हत्या करता है, वो रोंगटे खड़े कर देने वाला था. गोली मार देने या काट-पीटकर हत्या कर देना तो अब फिल्मों में रूटीन हो चला है. लेकिन धुरंधर 2 में ब्रिगेडियर जहांगीर की मौत उसके अपने बेटे के हाथों बहुत भयानक तरीके से हुई. सुविंदर कहते हैं, 'उस किरदार के साथ होना भी ऐसे ही चाहिए था. उसकी जुबान जहर ही उगलती थी, इसलिए जुबान ही खींच ली गई. मेजर इकबाल की अपने पिता के लिए जो नफरत थी, उसे दिखाने के लिए इससे बेहतर डेथ सीन हो ही नहीं सकता था. जैसे उसने इकबाल को या उसकी मां को तड़पाया, उसी तरह उसे तड़प कर मरना था.'

सुविंदर ने बताया कि इस डेथ सीन में कितने चैलेंज थे और उन्हें दो-ढाई घंटे तो मेकअप में ही लग जाते थे. उन्होंने कहा, 'ऐसे सीन में सबसे बड़ी चिंता सेफ़्टी की होती है, लेकिन उसी के बीच में आपको एक्टिंग भी करनी है, इमोशन्स भी परफेक्ट रखने हैं. पानी में डूब के कुछ सेकंड्स के लिए सांस रोकना था, ताकि उतनी देर में कैमरा आगे आकर पीछे जा सके. एक्शन टीम ने पूरा ध्यान रखा. लेकिन फिर भी घबराहट तो होती ही है.'

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सुविंदर के लिए असली चैलेंज था सेफ़्टी की चिंता किनारे रखकर, इस सीन के पेंचीदा सेटअप में परफॉर्म करना. 'सबसे पेंचीदा चीज थी कि उसे जुबान खींचने का जो दर्द हो रहा है, वो उसके चेहरे पर और बॉडी में दिखाना है. उस दर्द को फ़ील भी करना है, लेकिन वो किरदार विकलांग है इसलिए उस दर्द में कहीं उसके हाथ या पैर ना मूव करने लगें ये भी ध्यान रखना है. ये बहुत चैलेंज था लेकिन मजा बहुत आया. इस सीन में प्रोस्थेटिक की जीभ लगाई गई थी, जब वो मरने लगता है तो उसकी पूरी नसें आपको बाहर आती हुई दिखती हैं, वो पेंट से तैयार किया गया था. इस पूरे मेकअप प्रोसेस में ही दो-ढाई घंटे लगते थे.'

छोटे से रोल में सुविंदर का ये काम जनता ने खूब नोटिस किया और इसकी तारीफ खूब हुई. पंजाबी फिल्मों, टीवी शोज से ओटीटी तक आए सुविंदर का काम क्रिटिक्स को बहुत पसंद आने लगा. अब धुरंधर 2 से बड़े पर्दे ने उन्हें लोगों की नजर के सामने खड़ा कर दिया है. वो अपनी इस नई फ़ेम से बहुत खुश हैं और कहते हैं, 'कोई भी एक्टर तारीफ का भूखा होता है, मुझे दो दशक तक छोटे किरदार निभाने के बाद ये फ़ेम मिल रहा है, तो बहुत ज्यादा खुशी हो रही है.'

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