'20 साल पहले ओटीटी होता तो मैं आज हीरो होता' बोले धुरंधर 2 एक्टर सुविंदर विक्की

धुरंधर 2 में ब्रिगेडियर जहांगीर बनकर चर्चा बटोर रहे सुविंदर विक्की ने बताया कि 20 साल के संघर्ष के बाद मिली ये पहचान उनके लिए कितनी खास है. कोहरा और मील पत्थर जैसे प्रोजेक्ट्स से नोटिस हुए सुविंदर का मानना है कि अगर ओटीटी का दौर पहले आया होता, तो शायद आज वो लीड स्टार के तौर पर देखे जाते.

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20 साल स्ट्रगल के बाद धुरंधर 2 ने सुविंदर विक्की को दिलाई फ़ेम (Photo: Instagram/@suvindervicky) 20 साल स्ट्रगल के बाद धुरंधर 2 ने सुविंदर विक्की को दिलाई फ़ेम (Photo: Instagram/@suvindervicky)

सुबोध मिश्रा

  • नई दिल्ली ,
  • 08 मई 2026,
  • अपडेटेड 8:00 AM IST

धुरंधर 2 के विलेन मेजर इकबाल को घर में अपने बाप, ब्रिगेडियर जहांगीर से लगातार गाली खाते देखकर जनता को मजा ही आ गया था. फिल्म देखने के बाद लोग ब्रिगेडियर जहांगीर का किरदार निभाने वाले एक्टर सुविंदर विक्की के बारे में सोशल मीडिया पर खूब बातें करते दिखे. अब सुविंदर ने एक खास बातचीत में AajTak.In को बताया है कि धुरंधर 2 से मिली फ़ेम का उनके लिए क्या मतलब है. 20 साल के स्ट्रगल के बाद मिला ये फ़ेम कैसे उनके लिए गेम चेंजर साबित हो रहा है. और क्यों उन्हें लगता है कि ओटीटी पहले आया होता तो उनका जलवा आज कुछ और होता.

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धुरंधर 2 से मिली फ़ेम एन्जॉय कर रहे सुविंदर
सुविंदर को बड़े पर्दे की ऑडियंस में अब धुरंधर 2 से तगड़ी पॉपुलैरिटी मिली है. लेकिन धुरंधर 2 से पहले ओटीटी कंटेंट खपाने वाली जनता ने सुविंदर का काम खूब नोटिस किया था. मील पत्थर (2020) फिल्म में ज्यादातर चुप रहने वाले सुविंदर ने जैसे खामोश रहते हुए भी दमदार तरीके से सिर्फ चेहरे के एक्सप्रेशन से इमोशन दिखाए, उसकी क्रिटिक्स ने बहुत तारीफ की थी.

नेटफ्लिक्स की सीरीज कैट (2022) में उन्होंने इंस्पेक्टर का रोल निभाकर इंप्रेस किया और कोहरा (2023) में उनके किरदार को कहानी का लीड किरदार कहा जा सकता है. सुविंदर अपने इस फ़ेम को बहुत एन्जॉय कर रहे हैं. वो कहते हैं, 'मुझे बहुत आनंद आ रहा है इस नई पॉपुलैरिटी में. कोहरा नेटफ्लिक्स पर था, ओटीटी कई देशों में जाता है. लेकिन बड़े पर्दे पर जब आदमी लार्जर दैन लाइफ नजर आता है, तो उसका अलग मजा है. अपने आप को स्क्रीन पर बड़ा देखना एक अलग अनुभव होता है. जब मैंने धुरंधर 2 में खुद को देखा तो लगा— ओ वाओ, ये क्या ही कमाल हो गया!'

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20 साल की मेहनत के बाद मिली फ़ेम
सिरसा में जन्मे और चंडीगढ़ में बड़े हुए सुविंदर को अपने पिता से एक्टिंग की इंसपिरेशन मिली, जो खुद थिएटर करते थे और भांगड़ा आर्टिस्ट भी थे. ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने NSD (नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा) से एक्टिंग सीखने का सोचा, लेकिन एडमिशन की फॉर्मैलिटी पूरी करने में लेट हो गए. इसलिए पंजाब यूनिवर्सिटी से मास्टर्स इन थिएटर एंड टेलीविजन की पढ़ाई की. पहला ब्रेक उन्हें गुरदास मान की फिल्म देस होया परदेस (2004) से मिला, जिसमें उन्होंने एक आतंकवादी का किरदार निभाया.

पंजाबी फिल्मों और टीवी सीरियल्स में छोटे-छोटे किरदारों से उनका करियर आगे बढ़ने लगा. इस बीच सुविंदर को कई हिंदी फिल्मों में भी छोटे-छोटे रोल मिले जैसे— शाहिद (2012), भाग मिल्खा भाग (2013) और उड़ता पंजाब (2016). लेकिन कान्स फिल्म फेस्टिवल में दिखाई जाने वाली पहली पंजाबी फिल्म चौथी कूट (2015) ने उनके लिए बड़े दरवाजे खोल दिए. इस फिल्म में डायरेक्टर अनुराग सिंह ने उन्हें नोटिस किया और अपनी फिल्म केसरी (2019) में महत्वपूर्ण रोल दिया.

'ओटीटी पहले होता तो मैं स्टार होता'
धुरंधर 2 तक सुविंदर के पहुंचने में उनके ओटीटी प्रोजेक्ट्स का बड़ा रोल रहा. लेकिन उन्हें ये मलाल भी है कि ओटीटी पहले होता तो शायद उन्हें पहले ही पहचान मिल चुकी होती.

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उन्होंने कहा, 'मैं आज पक्का हीरो होता. उस वक्त मेरे कंधे पर रखकर लोग फिल्म बना सकते थे कि ये फिल्म का वजन उठा लेगा. उस वक्त उम्र भी पूरी हीरो वाली थी. उम्र के उस दौर में जब आपको पहचान मिल जाती है तो आदमी फिर बड़ी कामयाबी पाता है. उम्र के साथ आदमी का चेहरा बदल जाता है, आपको सूट करने वाले किरदार बदल जाते हैं. हालांकि, कोहरा में बलबीर या मील पत्थर में गालिब हीरो ही हैं. लेकिन ये मलाल जरूर है कि उस वक्त फ़ेम मिलती तो थोड़ा हम भी स्क्रीन पर कुछ डांस-वांस कर लेते, पेड़ों के आसपास गाने गा लेते. अभी ये सब मौके कहां मिलेंगे, अभी यही गालियां देकर गोली मारकर काम चलाना है!'

सुविंदर को लगता है कि अपने किरदार के अलावा, धुरंधर 2 में अगर उन्हें जमील जमाली या मेजर इकबाल का किरदार करने को मिलता तो और मजा आता. बातचीत खत्म करते हुए सुविंदर बोले, 'मुझे लगता है कि इन किरदारों में भी मेरा टैलेंट और निकलकर आता. मुझे और मेहनत करने वाला किरदार मिलता तो मैं और कमाल करता, ये लालच हर आर्टिस्ट को हमेशा रहता है.'

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