फिल्म लवर्स ने बड़े पर्दे पर ईद सेलिब्रेशन की तैयारियां शुरू कर दी हैं. रणवीर सिंह की 'धुरंधर 2' और यश की 'टॉक्सिक' के क्लैश के लिए माहौल गर्माने लगा है. इंडिया में फिल्में सिर्फ एंटरटेनमेंट नहीं हैं, त्योहारों के सेलिब्रेशन का हिस्सा भी होती हैं. बिना बड़ी फिल्म रिलीज हुए, कोई बड़ा त्योहार पूरा ही नहीं होता. इसलिए जहां साल की दो सबसे बड़ी फिल्मों का क्लैश ईद के लिए माहौल बनाने लगा है, वहीं इससे पहले आ रही होली पर कोई 'बड़ी फिल्म' न आना जनता को खटकने लगा है.
कुछ लोग इसके लिए ईद पर टकरा रही 'धुरंधर 2' और 'टॉक्सिक' को दोष दे रहे हैं. कुछ बॉलीवुड के रिलीज प्लान को कोस रहे हैं और कुछ इस बात से नाराज हैं कि फिल्म इंडस्ट्री होली को, ईद के मुकाबले कम भाव क्यों देती है. लेकिन क्या सच में ईद की प्लानिंग की वजह से इस बार कोई होली रिलीज नहीं है?
15 साल बाद बिना फिल्मी रंग की होली!
सोशल मीडिया पर कई लोगों और कई मीडिया रिपोर्ट्स ने हाल ही में हाईलाइट किया कि 2011 के बाद पहली बार होली पर कोई बड़ी हिंदी फिल्म रिलीज नहीं होगी. आने वाले दिनों में थिएटर्स के लिए खर्च मैनेज करना मुश्किल होने वाला है. वेलेंटाइन डे पर आईं 'ओ रोमियो' और 'तू या मैं' थकने लगी हैं. 20 फरवरी को आई 'अस्सी' और 'दो दीवाने सहर में' से शोज भरने की उम्मीद ट्रेड को पहले ही नहीं थी. और फरवरी की आखिरी रिलीज 'द केरला स्टोरी 2' का कानूनी पंगे से छूटकर रिलीज हो पाना मुश्किल है.
बॉलीवुड हंगामा की रिपोर्ट बताती है, थिएटर्स का हाल ऐसा है कि की थिएटर्स ने दिन में शोज घटा दिए हैं. जबकि कई मल्टीप्लेक्स ईद तक अपनी कुछ स्क्रीन्स बंद करने जा रहे हैं. क्योंकि शोज चलाने पर, कमाई से ज्यादा खर्च हो रहा है. कोई होली रिलीज ना होने से इस बार थिएटर्स के रंग उड़ने वाले हैं. इससे पहले 2002, 2003 और 2011 में ही होली पर कोई नई फिल्म नहीं रिलीज हो पाई थी. जबकि पिछले 26 सालों में होली के मौके पर आईं कई फिल्में अच्छी हिट्स साबित हुई हैं. जैसे- 'तू झूठी मैं मक्कार' (2023), 'केसरी' (2019), 'बद्रीनाथ की दुल्हनिया' (2017) और 'कहानी' (2012) वगैरह.
बड़ी फिल्मों के लिए कितना बड़ा मौका है होली?
तस्वीर का दूसरा पहलू भी है. किसी भी दूसरे मौके की तरह होली पर हिट ही नहीं, तगड़ी फ्लॉप फिल्में भी आई हैं. अजय देवगन की ऐतिहासिक फ्लॉप 'हिम्मतवाला' (2013) और अक्षय कुमार की सुपर फ्लॉप फिल्मों में से एक 'बच्चन पांडे' (2022) होली पर ही आई हैं. पिछले 15 साल में हर होली पर बड़ी फिल्म रिलीज होने का दावा भी गोलमोल है. क्या 2015 की होली रिलीज रही मल्लिका शेरावत, ओम पुरी, नसीरुद्दीन शाह और अनुपम खेर की फिल्म 'डर्टी पॉलिटिक्स' भी अब 'बड़ी फिल्मों' में गिनी जाएगी? क्योंकि जब ये फिल्म आई थी, तब तो इसे किसी ने बड़ी फिल्म नहीं माना था.
होली हिट 'कहानी' को 2012 में सरप्राइज हिट ही कहा गया था क्योंकि इसने उम्मीद से कई गुना बेहतर बिजनेस किया था. लेकिन रिलीज से पहले किसी ने इस फिल्म से 100 करोड़ की उम्मीद नहीं लगाई थी. आयुष्मान खुराना की 'बेवकूफियां' (2014), अनुष्का शर्मा की 'परी' (2018), परिणीति चोपड़ा की 'साइना' (2021), रणदीप हुड्डा की 'स्वातंत्र्य वीर सावरकर' (2024) या फिर 'मडगांव एक्सप्रेस' (2024) के भरोसे होली को 'बड़ी फिल्मों' की रिलीज से नहीं जोड़ा जा सकता. क्योंकि असल में सच यही है कि इंडस्ट्री होली पर साल की सबसे बड़ी इवेंट फिल्में रिलीज करने से बचती है.
बदल गया मार्च की फिल्मों का शेड्यूल
2003 और 2011 में होली पर बड़ी फिल्मों ने इसलिए किनारा किया क्योंकि उसी समय क्रिकेट वर्ल्ड कप भी था. और वर्ल्ड कप के समय थिएटर्स में फुटफॉल कम होना आम बात है. इस साल भी होली रिलीज न आने की एक बड़ी वजह यही है. इसके साथ ही मार्च में बोर्ड एग्जाम भी फिल्मों की ऑडियंस घटाता है. लेकिन इन दो फैक्टर्स के बावजूद आयुष्मान खुराना की 'पति पत्नी और वो दो' 8 मार्च के लिए और सनी देओल की 'गबरू' 18 मार्च के लिए शेड्यूल थीं.
मगर 19 मार्च को 'टॉक्सिक' और 'धुरंधर 2' का क्लैश किसी भी दूसरी फिल्म के लिए बॉक्स ऑफिस पर सांस लेने की गुंजाइश नहीं छोड़ेगा. इसलिए इन दोनों फिल्मों की रिलीज डेट बदली गई. रिलीज कैलेंडर में ये पूरा शफल इसलिए हुआ है क्योंकि 'धुरंधर 2' की रिलीज 19 मार्च 2026 के लिए अचानक फिक्स की गई. कुछ लोग इस बात से भी खफा हैं कि दोनों फिल्मों ने अगर ईद की होड़ नहीं की होती, तो एक होली पर भी रिलीज की जा सकती थी. लेकिन असल में 19 मार्च सिर्फ ईद की वजह से बड़ी डेट नहीं है.
19 मार्च से ही नए विक्रम संवत यानी 'हिंदू नववर्ष' की भी शुरुआत है. देशभर में इसका अलग-अलग सेलिब्रेशन होता है- उगादि, गुड़ी पड़वा वगैरह. साउथ में उगादि का सेलिब्रेशन होली से ज्यादा महत्वपूर्ण होता है. 'टॉक्सिक' और 'धुरंधर 2' दोनों पैन इंडिया फिल्में हैं. इसलिए ईद के साथ उगादि या गुड़ी पड़वा सेलिब्रेशन का कॉम्बो इन्हें अच्छे बिजनेस के लिए ज्यादा बेहतर मौका देगा.
ईद पर रिलीज के लिए क्यों भागते हैं मेकर्स?
इन दिनों हर आदमी थोड़ा एक्स्ट्रा-पॉलिटिकल होकर सोचने लगा है और सोशल मीडिया पर बहुत लोग इसी नजर से फिल्मों की रिलीज के लिए ईद बनाम होली का डिस्कशन निकाल लाए हैं. लेकिन फिल्मों को 100-100 करोड़ के बिजनेस प्रोजेक्ट की तरह देखने पर आपको रिलीज प्लान में त्योहारों का महत्व समझ आएगा. फिल्मों के तगड़े बिजनेस के लिए दो चीजें सबसे जरूरी होती हैं- पहले कुछ दिन छुट्टी वाले मिल जाएं और जनता सेलिब्रेशन के मूड में हो.
होली का सेलिब्रेशन अधिकतर जगहों पर, अधिकतर घरों में एक दिन का होता है. दोपहर तक लोग रंग खेलते हैं और उसके बाद अगर कहीं हिम्मत बची रही तो बाहर मौज करने निकलते हैं. होली पर फिल्मों के पास बस इतना ही मौका होता है. लेकिन ईद का सेलिब्रेशन लगभग तीन दिन चलता है और इसके साथ अगर वीकेंड जुड़ जाए तो ये फिल्मों को एक लंबा पीरियड दे देता है.
ठीक वैसे ही जैसे दिवाली पर फिल्मों को 3-4 दिन प्लस वीकेंड और साल के अंत में क्रिसमस-न्यू ईयर-न्यू ईयर हॉलिडे का लंबा पीरियड मिलता है. इसलिए फिल्मों के रिलीज कैलेंडर को ईद वर्सेज होली की नजर से नहीं, बिजनेस रिकवरी की नजर से देखें. क्योंकि कमाएगा सिनेमा, तभी तो एंटरटेन कर पाएगा सिनेमा.
सुबोध मिश्रा