आसनसोल के बस्तिन बाजार स्थित श्री-श्री दुर्गामाता चैरिटेबल ट्रस्ट के दुर्गा मंदिर के दरवाजे, जो वर्षों से बंद थे, अब श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं. लंबे समय से बंद पड़े इस मंदिर के खुलने के बाद इलाके में खुशी, उत्साह और धार्मिक उमंग का माहौल देखने को मिल रहा है. मंदिर के खुलते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु वहां पहुंचने लगे. लोगों ने पूजा-अर्चना की, मां दुर्गा के जयकारे लगाए और इस अवसर को एक उत्सव की तरह मनाया.
स्थानीय लोगों का कहना है कि वे लंबे समय से इस पल का इंतजार कर रहे थे, क्योंकि यह मंदिर उनकी आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है. जानकारी के मुताबिक, यह मंदिर कई वर्षों से विवादों में घिरा हुआ था. इसी वजह से यहां नियमित रूप से पूजा नहीं हो पाती थी. स्थिति यह थी कि साल में केवल दुर्गा पूजा और लक्ष्मी पूजा जैसे प्रमुख त्योहारों के दौरान ही मंदिर के कपाट खोले जाते थे, जबकि बाकी समय मंदिर बंद रहता था. इससे श्रद्धालुओं को काफी परेशानी होती थी और वे लंबे समय से मंदिर को पूरे साल खोलने की मांग कर रहे थे.
बीजेपी के विजयी उम्मीदवार कृष्णेंदु मुखर्जी ने निभाया अपना वादा
हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने पश्चिम बर्धमान जिले की सभी 9 सीटों पर जीत दर्ज की है. इस राजनीतिक बदलाव के बाद मंदिर के द्वार खुलने की घटना को एक बड़े प्रतीकात्मक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है. आसनसोल उत्तर विधानसभा सीट से बीजेपी के विजयी उम्मीदवार कृष्णेंदु मुखर्जी ने चुनाव प्रचार के दौरान यह वादा किया था कि यदि वे जीतते हैं तो मंदिर को साल के 365 दिन आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा.
चुनाव परिणाम आने के बाद उन्होंने अपने वादे को तुरंत पूरा किया. जीत के बाद वे सीधे बस्तिन बाजार स्थित मंदिर पहुंचे और विधिवत पूजा-अर्चना कर मंदिर के कपाट खोल दिए. मंदिर खुलने के बाद स्थानीय लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई है. लोगों का कहना है कि यह केवल एक धार्मिक स्थल के खुलने की घटना नहीं है, बल्कि उनकी आस्था और लंबे समय से चली आ रही मांगों की जीत भी है. कई श्रद्धालुओं ने इसे क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत बताया है.
माना जा रहा है कि अब मंदिर के नियमित रूप से खुले रहने से न केवल श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी, बल्कि इलाके में धार्मिक गतिविधियां भी बढ़ेंगी. इसके साथ ही स्थानीय व्यापार और छोटे कारोबारों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है, क्योंकि मंदिर में आने वाले भक्तों की संख्या बढ़ने से आसपास की आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा.
अनिल गिरी