ऑटो में बैठकर नामांकन करने पहुंचे RJD के बाहुबली विधायक सुरेन्द्र यादव, लगातार सात बार से हैं विधायक

बिहार की राजनीति में चर्चित और लगातार सात बार के विधायक सुरेन्द्र यादव आज निराले अंदाज में नामांकन दाखिल करने पहुंचे. घर से ऑटो में सवार हुए सुरेन्द्र यादव के पीछे समर्थकों की भारी भीड़ थी.

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सुरेन्द्र यादव (फाइल फोटो आजतक) सुरेन्द्र यादव (फाइल फोटो आजतक)

aajtak.in

  • बेलागंज,
  • 06 अक्टूबर 2020,
  • अपडेटेड 8:20 PM IST
  • सुरेन्द्र यादव ने नामांकन दाखिल किया
  • बिहार के दबंग नेता हैं सुरेन्द्र यादव
  • लालू परिवार के करीबी हैं सुरेन्द्र यादव

बिहार की राजनीति में चर्चित और लगातार सात बार के विधायक सुरेन्द्र यादव आज निराले अंदाज में नामांकन दाखिल करने पहुंचे. घर से ऑटो में सवार हुए सुरेन्द्र यादव के पीछे समर्थकों की भारी भीड़ थी. उन्होंने गया की बेलागंज विधानसभा से नामांकन दाखिल किया है. 

लालू के करीबी हैं सुरेन्द्र यादव 

बेलागंज विधानसभा से विधायक और लोकसभा सांसद रहे सुरेंद्र प्रसाद यादव आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके बेटे तेजस्वी यादव के काफी करीबी माने जाते हैं. सुरेंद्र यादव पर तीन दर्जन से ज्यादा आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, जिसमें हत्या से प्रयास, आपराधिक साजिश से लेकर दंगे तक शामिल हैं.

चुनावी हलफनामे के मुताबिक साल 1992 में उन्होंने मगध यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन की है. बताया जाता है कि साल 1981 में जब सुरेंद्र प्रसाद यादव 22 साल के थे, तब वे लालू प्रसाद यादव के संपर्क में आए. उस समय लालू यादव लोक दल पार्टी के सदस्य थे. सुरेन्द्र यादव को 1985 में महज 26 साल की उम्र में लोक दल के टिकट पर जहानाबाद लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने का मौका मिला. लेकिन वे जीत नहीं पाए.

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1990 में जीता पहला चुनाव 

सुरेन्द्र यादव ने 1990 में लोकदल की टिकट पर बेलागंज विधानसभा सीट से चुनाव जीता, इसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. हर चुनाव में उन्हें जीत मिली. उन्होंने लोगों के बीच ऐसा दबदबा कायम किया कि उनकी कुर्सी आज तक कोई नेता हिला नहीं पाया. 2015 चुनाव की बात करें तो सुरेंद्र प्रसाद यादव को 53 हजार 079 वोट मिले थे, जिसमें एनडीए में रहे हम पार्टी के उपविजेता मोहम्मद शरीम अली को 48 हजार 441 वोट मिले. विजेता रहे सुरेंद्र यादव ने मोहम्मद शरीम अली को 4 हजार 638 वोट से हरा दिया था.

दबंग हैं सुरेन्द्र यादव

सुरेन्द्र यादव की पहचान एक दबंग नेता के रूप में भी है. पहली बार वे सुर्खियों उस समय आए, जब गया कलेक्ट्रेट के पास 1991 के संसदीय चुनावों के दौरान एक पूर्व विधायक जय कुमार पलित को कथित तौर पर पीटने का आरोप लगा. जय कुमार पलित को पिलग्रिम अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

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इसके बाद 1998 में सुरेन्द्र यादव जहानाबाद लोकसभा सीट से 13 महीने तक सांसद रहे. सांसद रहते हुए उन्होंने वो किया, जिसे भारतीय संसद के इतिहास में बदनुमा दाग माना जाता है. उन्होंने सदन में तत्कालीन उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के हाथों से महिला आरक्षण बिल की कॉपी लेकर फाड़ दी थी. साल 2002 में उन पर अतुल प्रकाश कस्टोडियल किडनैपिंग मामले में कथित तौर पर आरोप भी लगे थे.

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