बिहार: चुनाव के बीच नल-जल योजना से जुड़े ठेकेदारों पर छापा, 2.28 करोड़ कैश बरामद

आयकर विभाग ने शुक्रवार को पटना, हिलसा, कटिहार और भागलपुर में प्रमुख चार ठेकेदारों के यहां एक साथ छापेमारी की. चारों ठेकेदारों के यहां की गई छापेमारी में 75 करोड़ की अघोषित आय का खुलासा हुआ है.

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जल-नल योजना का वर्क आर्डर जब्त. जल-नल योजना का वर्क आर्डर जब्त.

aajtak.in

  • पटना,
  • 31 अक्टूबर 2020,
  • अपडेटेड 3:47 PM IST
  • जल-नल योजना का वर्क ऑर्डर जब्त
  • चार बड़े ठेकेदारों के यहां आयकर की छापेमारी
  • पटना के प्रमुख चार ठेकेदारों की फर्मों पर एक साथ रेड

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के शोर के बीच आयकर विभाग ने बिहार के पटना के प्रमुख चार ठेकेदारों की फर्मों पर एक साथ रेड डाली. आयकर विभाग की छापेमारी में इनके ठिकानों से 75 करोड़ की अघोषित आय का खुलासा हुआ है, तो वहीं नल-जल योजना से संबंधित एक ठेकेदार के यहां से 2.28 करोड़ का कैश बरामद किया गया है. 

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आयकर विभाग ने शुक्रवार को पटना, हिलसा, कटिहार और भागलपुर में प्रमुख चार ठेकेदारों के यहां एक साथ छापेमारी की. चारों ठेकेदारों के यहां की गई छापेमारी में 75 करोड़ की अघोषित आय का खुलासा हुआ है. इनमें से दो ठेकेदार ऐसे हैं, जो नल-जल योजना से सं​बंधित हैं. इनमें से एक ठेकेदार के ठिकाने से आयकर विभाग की टीम को 2.28 करोड़ का कैश बरामद हुआ है.

जल-नल योजना का वर्क ऑर्डर जब्त
वहीं आयकर विभाग ने भागलपुर के ठेकेदार ललन कुमार और उसके भाई सुमन कुमार के यहां से अब तक 82 लाख रुपये का कैश बरामद किया है. इन दोनों भाइयों के यहां से कई एकड़ जमीन खरीदने के सबूत भी बरामद किए गए हैं. इन दोनों भाइयों की लोटस कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड नाम से फर्म है. आयकर विभाग ने जिले की कई पंचायतों में जल-नल योजना में इन ठेकेदार भाइयों को मिले काम का वर्क ऑर्डर भी जब्त किया है. 

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गया में भी हुआ सर्वे 
वहीं आयकर विभाग द्वारा गया के गिट्‌टी कारोबारियों के ठिकानों पर भी छापेमारी की गई. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के अधिकारियों की मानें तो इन फर्मों द्वारा फर्जी पेमेंट कर मोटी कमाई की गई है. बोगस फर्म को दी गई 10 करोड़ की राशि ठेकेदारों ने खुद वापस ले ली. 20 करोड़ का भुगतान ऐसी फर्मों को किया गया, जिनका कोई अता पता नहीं है.

वहीं 15 करोड़ का भुगतान लेबर के नाम पर कर दिया गया. वहीं एक अन्य फर्म ने संपत्ति खरीदने के नाम पर 15 करोड़ का निवेश दिखाया है. आयकर विभाग ने सर्वे के बाद 30 करोड़ फिक्स्ड डिपॉजिट और 16 करोड़ की संपत्ति निगरानी में रखी है.

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