ऋषिवंदियम विधानसभा क्षेत्र (संख्या 78) एक मुख्य रूप से आंतरिक ग्रामीण सीट है, जहां चुनाव का फैसला विचारधारा या मीडिया की चर्चाओं से ज्यादा पानी की उपलब्धता, खेती की स्थिरता और विधायक की व्यक्तिगत विश्वसनीयता पर निर्भर करता है. उल्लेखनीय बात यह है कि वर्ष 2011 में अभिनेता-राजनेता विजयकांत ने इस सीट से जीत हासिल की थी. उस समय उनकी पार्टी DMDK ने
AIADMK के साथ गठबंधन किया था, लेकिन वे विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे. DMDK का इस क्षेत्र में आज भी मजबूत स्थानीय जुड़ाव माना जाता है.
राजनीतिक और सामाजिक रूप से यहां का मतदाता वर्ग विविध है. इसमें सबसे अधिक संख्या वन्नियार (MBC) समुदाय की है, जो यहां प्रभावशाली माने जाते हैं. इसके अलावा अनुसूचित जाति समुदाय की भी पंचायतों में अच्छी-खासी उपस्थिति है. क्षेत्र में छोटे और सीमांत किसान, जो नहर और तालाब आधारित सिंचाई पर निर्भर हैं, बड़ी संख्या में हैं. कृषि मजदूर, महिला स्वयं सहायता समूह (SHGs) की सदस्याएं और सरकारी कल्याण योजनाओं से लाभान्वित परिवार भी चुनावी समीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. साथ ही, यहां से कुछ लोग मौसमी काम के लिए बाहर भी जाते हैं, जिन्हें मौसमी प्रवासी श्रमिक कहा जाता है.
भौगोलिक रूप से यह इलाका समतल कृषि भूमि वाला है. यहां सिंचाई मुख्य रूप से मौसमी नहरों और तालाबों के नेटवर्क पर निर्भर करती है. कमजोर मानसून वाले वर्षों में जल संकट गंभीर रूप ले लेता है. अंदरूनी सड़कों की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है और कई गांवों तक पहुंचने में कठिनाई होती है. सार्वजनिक परिवहन की सुविधा भी सीमित है, जिससे लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए परेशानी उठानी पड़ती है.
पर्यटन और सांस्कृतिक दृष्टि से ऋषिवंदियम अपने ऐतिहासिक मंदिरों और प्राकृतिक स्थलों के लिए जाना जाता है. यहां का प्रमुख आकर्षण अर्धनारीश्वरर मंदिर है, जो अपनी अनूठी वास्तुकला और संगीतमय स्तंभों के लिए प्रसिद्ध है और आसपास के जिलों से श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है. इसके अलावा थियागदुरम हिल्स एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक और सांस्कृतिक क्षेत्र है. स्थानीय झीलें और तालाब गांव के जीवन और कृषि से जुड़े पारंपरिक अनुष्ठानों का केंद्र हैं. गांवों में स्थित छोटे मंदिर और मंदिर समूह सामाजिक और राजनीतिक बैठकों के महत्वपूर्ण स्थल माने जाते हैं.
मुख्य मुद्दों की बात करें तो यहां सबसे अहम सवाल नहरों में समय पर पानी छोड़े जाने का है. तालाबों की सफाई (डी-सिल्टिंग) और रखरखाव भी बड़ी चिंता का विषय है. पीने के पानी की आपूर्ति, अंदरूनी सड़कों की उपलब्धता, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) सेवाएँ और एंबुलेंस की समय पर पहुंच भी प्रमुख मांगें हैं. इसके अलावा पेंशन, आवास योजना और मनरेगा (MGNREGA) जैसी कल्याणकारी योजनाओं में देरी भी मतदाताओं की नाराजगी का कारण बनती है.
मतदाताओं का मूड यह दर्शाता है कि वे अपने विधायक से नियमित रूप से गांवों का दौरा करने की अपेक्षा रखते हैं. पानी के विवादों में तुरंत हस्तक्षेप, फसल नुकसान और सूखे के समय उपस्थिति, तथा बुजुर्गों और विभिन्न जातीय समूहों के साथ सम्मानजनक व्यवहार को यहां बहुत महत्व दिया जाता है. कुल मिलाकर, ऋषिवंदियम एक ऐसा ग्रामीण क्षेत्र है जहां चुनावी सफलता का आधार जमीन से जुड़ाव, भरोसा और स्थानीय समस्याओं का समय पर समाधान है.