'चुनाव आयोग जल्द करे निपटारा...', वोटर लिस्ट से गायब हुआ नंदलाल बोस के पोते का नाम तो SC ने दिए निर्देश

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले सुप्रबुद्ध सेन और उनकी पत्नी का नाम मतदाता सूची से गायब पाया गया. सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को मामले को जल्द सुलझाने और बुजुर्ग दंपती की हर संभव मदद करने का निर्देश दिया है.

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प्रख्यात चित्रकार नंदलाल बोस के पोते हैं 82 साल के सुप्रबुद्ध सेन प्रख्यात चित्रकार नंदलाल बोस के पोते हैं 82 साल के सुप्रबुद्ध सेन

अनीषा माथुर

  • नई दिल्ली,
  • 06 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 6:02 PM IST

पश्चिम बंगाल में जारी चुनावी हलचल के बीच जारी SIR में बड़ी बात सामने आई. प्रख्यात चित्रकार रहे नंदलाल बोस के पोते सुप्रबुद्ध सेन और उनकी पत्नी का नाम पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से गायब हो गया था. इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से इस मामले को जल्द सुलझाने और बुजुर्ग दंपती की हर संभव मदद करने के लिए कहा है, साथ ही यह भी कहा कि इस मामले में किसी तरह की देरी नहीं करनी चाहिए.

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संविधान की मूल प्रति को सजाने वाले चितेरे थे नंदलाल बोस
भारतीय संविधान के निर्माता नंदलाल बोस के पोते ने बताया कि SIR के दौरान उनका और पत्नी का नाम शुरू में पेंडिंग बताया गया, लेकिन बाद में उन्हें हटा दिया गया. यह घटना राज्य विधानसभा चुनाव से पहले चल रहे मतदाता सूची संशोधन अभियान के बीच आई है. बता दें कि जब भारत का संविधान बन रहा था तब तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के कहने पर नंदलाल बोस ने संविधान की मूल प्रति को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के लिए चित्र बनाए थे.

SIR का ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां अहम सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि अगर उनके परिवार की ओर से अपील दायर की जाती है, तो चुनाव आयोग (ECI) को इसमें पूरा सहयोग देना चाहिए, ताकि अपील प्रक्रिया जल्दी पूरी हो सके. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि क्या अपील दायर की गई है. इस पर परिवार के वकील ने बताया कि अपील पहले ही दाखिल की जा चुकी है. इसके बाद मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने कहा कि उन्हें भी यह जानकारी मिली है कि आवेदक या उनके परिवार ने अपील दाखिल कर दी है.

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सुप्रीम कोर्ट ने अपीलीय प्राधिकरण से अनुरोध किया कि वह इस अपील को सोमवार को अंतिम सुनवाई के लिए लिस्ट करें, ताकि मामले का जल्द निपटारा हो सके. कोर्ट ने यह भी साफ किया कि इस मामले में किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए. चुनाव आयोग ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि अपील की प्रक्रिया को तेज करने के लिए हर संभव मदद दी जाएगी. आयोग ने कहा कि वह परिवार को जरूरी सहयोग देगा, ताकि कानूनी प्रक्रिया जल्द पूरी हो सके और मामले का समाधान तेजी से हो.

गायब मिला था बुजुर्ग दंपती का नाम
बता दें कि प्रसिद्ध कलाकार नंदलाल बोस के पोते सुप्रबुद्ध सेन और उनकी पत्नी दीपा सेन के नाम मतदाता सूची से गायब मिले थे. दोनों ने आरोप लगाया है कि सभी जरूरी दस्तावेज जमा करने के बावजूद उन्हें आगामी विधानसभा चुनाव में वोट देने के अधिकार से वंचित कर दिया गया है. सुप्रबुद्ध सेन 88 साल के हैं और उनकी पत्नी दीपा 82 साल की हैं. दोनों शांति निकेतन में रहते हैं. उन्होंने बताया कि शुरुआत में उनके नाम पेंडिंग कैटेगरी में रखे गए थे. इसके बाद चुनाव अधिकारियों के सामने पेश होकर उन्होंने सभी जरूरी दस्तावेज जमा किए. इन दस्तावेजों में पासपोर्ट, पेंशन रिकॉर्ड, रोजगार से जुड़े कागजात और शैक्षणिक प्रमाण पत्र शामिल थे.

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सुप्रबुद्ध सेन, नंदलाल बोस की छोटी बेटी जमुना सेन के पुत्र हैं. उनका पालन-पोषण अपने दादा के संरक्षण में हुआ. उन्होंने 1954 में विश्व-भारती विश्वविद्यालय के पाठ भवन से अपनी माध्यमिक शिक्षा पूरी की और आगे की पढ़ाई भी वहीं से की. बाद में उन्होंने जाधवपुर यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की. शिक्षा पूरी करने के बाद वे दामोदर वैली कॉर्पोरेशन (DVC) में कार्यरत रहे. करीब 32 वर्षों की सेवा के बाद 1996 में सेवानिवृत्त हुए और स्थायी रूप से शांतिनिकेतन में बस गए. चूंकि वे नौकरी के दौरान अन्य जगहों पर रहते थे, इसलिए साल 2002 की वोटर लिस्ट में उनके नाम शामिल नहीं थे.

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