बीट रिपोर्ट: बंगाल में अमित शाह का 'साइलेंट मिशन', दिन में रोड शो-रैलियां और देर रात बैठकों से साध रहे चुनावी गणित

पश्चिम बंगाल में चुनावी शोर के बीच अमित शाह का ‘नाइट मिशन’ सुर्खियों में है, जहां रैलियों के साथ देर रात तक संगठनात्मक बैठकों के जरिए बूथ स्तर की रणनीति को धार दी जा रही है. पीएम मोदी समेत बीजेपी शीर्ष नेतृत्व के आक्रामक प्रचार के समानांतर चल रहा यह साइलेंट ऑपरेशन जमीनी फीडबैक, कमजोर कड़ियों की पहचान और दूसरे चरण की तैयारी पर केंद्रित है.

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बंगाल चुनाव में बीजेपी की रणनीतिक के केंद्र में हैं. (Photo: ITG/@GFX) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बंगाल चुनाव में बीजेपी की रणनीतिक के केंद्र में हैं. (Photo: ITG/@GFX)

ऐश्वर्या पालीवाल

  • नई दिल्ली,
  • 28 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 6:30 PM IST

बंगाल में 15 मार्च को चुनावी बिगुल बजा और राज्य सियासी अखाड़े में बदल गया. सबसे पहले बीजेपी ने बाहरी बनाम लोकल के टीएमसी के नैरेटिव के तोड़ की रणनीति बनाई. बीजेपी की रणनीति थी कि केंद्रीय नेताओं की जनसभाएं और रैलियां तो होंगी, लेकिन स्थानीय नेताओं को ज्यादा तरजीह दी जाएगी. 

इस क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 रैलियां, 3 रोड शो किए और हुगली नदी में नौका विहार कर बता दिया कि सत्ता की राह अब सड़क से ही नहीं, नदी के रास्ते भी तलाश की जा रही है. अमित शाह ने 20 जनसभाएं, 11 रोड शो और 5 संभागीय बैठकों के अलावा कोलकाता में 10 से ज्यादा संगठनात्मक बैठकें कीं. कोलकाता के सेंट्रल वार रूम में जाकर पहले चरण की वोटिंग मॉनिटरिंग के जरिए चुनावी इंजन को फुल स्पीड पर रखा. नितिन नवीन ने 3 सभाओं और 12 रोड शो के जरिए मोर्चा संभाला.

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कुल मिलाकर बीजेपी के स्थानीय नेताओं ने 500 से ज्यादा छोटे-बड़े कार्यक्रम किए- कमल खिलाने की पूरी बागवानी की गई. वहीं बीजेपी के स्थानीय नेताओं में सुवेंदु अधिकारी ने 60 से ज्यादा सभाएं कीं, दिलीप घोष ने 35 से 40 कार्यक्रम किए, और समिक भट्टाचार्य ने 30 से अधिक सभाओं से मोर्चा संभाला. पश्चिम बंगाल चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंकते हुए, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में जोरदार प्रचार अभियान किया. अमित शाह पिछले 8 दिनों तक लगातार कोलकाता में रहे.

क्या है अमित शाह का साइलेंट मिशन?

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव का बहुत शोर है. रैलियां, रोड शो, जनसभाएं और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है, लेकिन इस शोर के पीछे एक साइलेंट ऑपरेशन भी उतनी ही तेजी से चल रहा है. इस ऑपरेशन की कमान संभाले हुए हैं अमित शाह, जो इस बार बंगाल को सिर्फ मंच से नहीं, बल्कि जमीन की बारीक समझ से साधने की कोशिश में हैं. बीजेपी का चुनावी अभियान इस बार दो परतों में चलता दिख रहा है- एक तरफ आक्रामक जनसभाएं, दूसरी तरफ बंद कमरों में गहराती रणनीति.

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बीजेपी ने बंगाल को संगठनात्मक रूप से पांच संभागों- सिलीगुड़ी, बालुरघाट, दुर्गापुर, खड़गपुर और हुगली में बांटा है. गृह मंत्री अमित शाह इन सभी संभागों में जाकर न सिर्फ प्रचार कर रहे हैं, बल्कि रात्रि प्रवास कर कार्यकर्ताओं के साथ मल्टीलेवल बैठकों के जरिए जमीनी हकीकत को समझ रहे हैं. एक के बाद एक रोड शो और फिर देर रात तक बैठकों का दौर. 10 अप्रैल को खड़गपुर में इस मॉडल की शुरुआत हुई. 

दिनभर के कार्यक्रमों के बाद रात 9 बजे से बैठकों का दौर शुरू हुआ, जिसमें लोकसभा स्तर के कार्यकर्ताओं से लेकर जिलों की कोर टीम और फिर संभागीय कोर ग्रुप तक, हर स्तर पर फीडबैक लिया गया. करीब चार घंटे चली इस बैठक में सिर्फ समस्याएं सुनी नहीं गईं, बल्कि उनके समाधान की दिशा भी तय की गई. ठीक यही पैटर्न 13 अप्रैल को दुर्गापुर में दोहराया गया. रैलियों और रोड शो के बाद देर रात तक चली बैठकों में राढ़बंग और वर्धमान क्षेत्र की राजनीतिक नब्ज को टटोला गया. 

साइलेंट लेकिन संगठित चुनावी ऑपरेशन

अमित शाह ने सभी संभागों की बैठक लगभग पूरी कर ली, मंगलवार देर रात को भी शाह चार घंटे तक इसी मिशन में जुटे रहे. 27 अप्रैल तक अमित शाह का कोलकाता में डेरा था, जब तक दोनों चरणों का मतदान पूरा नहीं हो जाता, तब तक उनका पूरा फोकस बंगाल पर ही रहेगा. रैलियों के साथ-साथ लगातार बैठकें और फीडबैक- यह पूरा अभियान एक साइलेंट लेकिन बेहद संगठित चुनावी ऑपरेशन का संकेत देता है. इसी दौरान जनसभाओं में अमित शाह ममता बनर्जी सरकार पर भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था और घुसपैठ जैसे मुद्दों पर तीखा हमला भी कर रहे हैं.

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यानी जमीन पर रणनीति और मंच से आक्रामक राजनीति दोनों समानांतर चल रहे हैं. चुनाव का गणित और ‘नाइट मिशन’ बंगाल में दो चरणों में मतदान होना है. पहला चरण 23 अप्रैल को 16 जिलों की 152 सीटों पर और दूसरा चरण 29 अप्रैल को 142 सीटों पर, नतीजे 4 मई को आएंगे. पहले चरण में पूरी ताकत झोंकने के बाद अब बीजेपी का फोकस दूसरे चरण पर है. अमित शाह का 'नाइट मिशन' इसी रणनीति का अहम हिस्सा बन गया है जहां हर स्तर पर तैयारियों और कमियों का आकलन किया जा रहा है.

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