Beat Report: मैंने निर्वाचन आयोग से पूछा था ये सवाल, पूरे 20 दिन बाद मिला जवाब

बंगाल चुनाव में हिंसा रोकने के लिए चुनाव आयोग ने इस बार सख्त कदम उठाए हैं. अब सिर्फ वोटिंग ही नहीं, बल्कि नतीजों के बाद भी 500 से ज्यादा सुरक्षाबल तैनात रहेंगे. 2021 जैसी हिंसा दोहराने से बचने के लिए यह फैसला लिया गया है, ताकि चुनाव के बाद भी हालात काबू में रहें और लोगों को सुरक्षा का भरोसा मिल सके.

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बंगाल चुनाव को लेकर ECI ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है (Photo- ITG) बंगाल चुनाव को लेकर ECI ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है (Photo- ITG)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 03 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 7:52 PM IST

चुनाव घोषणा के लिए निर्वाचन आयोग की 15 मार्च को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में मैने आयोग से एक ही सवाल पूछा था कि पश्चिम बंगाल में अब चुनावी हिंसा का ट्रेंड खत्म होकर चुनाव बाद की हिंसा में बदल गया है. आयोग हिंसामुक्त चुनाव सुनिश्चित करने के बारे में तो बता रहा है लेकिन चुनाव बाद की हिंसा की आशंका को लेकर भी क्या कोई इंतजाम किया जाएगा?

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तब मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सिर्फ इतना कहा था कि हिंसा के मामले में हमारी नीति जीरो टॉलरेंस की है. हिंसा में कोई भी लिप्त होगा उसे बख्शा नहीं जाएगा. लेकिन उस संक्षिप्त जवाब के 20 दिन बाद आयोग ने ताल ठोक कर जवाब भेजा. मालदा में एसआईआर की आपत्तियां और दावे निपटा रहे न्यायिक अधिकारियों के घेराव और हमले की घटना के 36 घंटे से भी पहले आयोग ने ऐलान कर दिया कि पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हिंसा से निपटने या उसके लिए पेशगी इंतजाम करने के लिए अर्धसैनिक बलों यानी सीएपीएफ की 500 से ज्यादा कंपनियां मतगणना पूरी होने तक तैनात रहेंगी. 

जरूरत पड़ने पर उनकी तैनाती आगे भी बढ़ाई जा सकती है.यानी पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद की हिंसा पर निगाह और नियंत्रण रखने की गरज से मतगणना के बाद भी सुरक्षा बल तैनात रहेंगे. हालांकि बंगाल में पहले चरण का मतदान 23 और दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होंगे. पांच दिन बाद मतगणना होगी. यानी बाकी राज्यों में मतदान के दिन के मुकाबले मतगणना में करीब एक चौथाई सुरक्षा बलों की तैनाती होती है. क्योंकि सुरक्षा बलों की तैनाती काफी खर्चीली होती है. लेकिन आयोग ने तय कर लिया कि राज्य में स्वतंत्र, निष्पक्ष के साथ अहिंसक चुनाव और बाद का माहौल बना रहे.

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निर्वाचन आयोग के मुताबिक सीएपीएफ (केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल) की 500 कंपनियां अगले आदेश तक मतगणना पूरी होने के बाद भी चुनाव के बाद कानून और व्यवस्था की ड्यूटी के लिए पश्चिम बंगाल में तैनात रहेंगी.इसके अतिरिक्त, ईवीएम/स्ट्रांग रूम और मतगणना केंद्र की सुरक्षा व्यवस्था के लिए सीएपीएफ की 200 कंपनियों को राज्य में रखा जाएगा और राज्य में मतगणना पूरी होने तक तैनात रहेंगे.2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद हुई व्यापक हिंसा में 50 से अधिक लोगों की जान गई और लगभग 1,300 हिंसक घटनाएं दर्ज की गईं.

टीएमसी की जीत के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं को मुख्य रूप से निशाना बनाया गया, जिससे कई लोग घर छोड़ने पर मजबूर हुए. हिंसा में कूच बिहार, वीरभूम, दक्षिण 24 परगना, मालदा और नंदीग्राम जैसे क्षेत्र विशेष रूप से प्रभावित थे. मामलों की जांच के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग यानी NHRC ने एक विशेष टीम का गठन किया था. टीम ने अपनी रिपोर्ट सौंपी थी. इसके बाद कलकत्ता हाईकोर्ट ने सीबीआई (CBI) जांच के आदेश भी दिए थे.

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