पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में न्यायिक अधिकारियों, नागरिकों और चुनाव ड्यूटी में तैनात कर्मचारियों की सुरक्षा का मुद्दा अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. अखिल भारतीय हिंदू महासभा ने इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. हिंदू महासभा ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई है कि निष्पक्ष, निर्भीक और सुरक्षित चुनाव सुनिश्चित कराने के लिए केंद्र सरकार को निर्देश दें. याचिका में केंद्रीय बल तैनात करने की मांग भी की गई है.
अखिल भारतीय हिंदू महासभा की तरफ से पूर्व उपाध्यक्ष सतीश कुमार अग्रवाल ने दाखिल की है. याचिका में कहा गया है कि साल 2013 के पंचायत चुनावों के दौरान पश्चिम बंगाल में 39 लोग कथित चुनावी और चुनाव बाद की हिंसा में मारे गए थे. तब अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस जीत गई थी और डराने-धमकाने के कारण 34% सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन हुआ था. आम वोटर डर से घर में ही रहे और मतदान के लिए पोलिंग बूथ तक गए ही नहीं.
याचिकाकर्ता की ओर इसका उल्लेख करते हुए कहा कि यह घटनाएं राजनीतिक हिंसा के ऐतिहासिक पैटर्न को और अधिक प्रमाणित करती हैं. लोकतांत्रिक प्रक्रिया में राजनीतिक रूप से प्रेरित हिंसा और हस्तक्षेप अस्वीकार्य है. चुनावी प्रक्रिया के दौरान कई मौकों पर, न्यायिक अधिकारी, प्रशासनिक, कार्मिक और अन्य सार्वजनिक अधिकारियों को चुनाव का काम सौंपा गया, लेकिन उनको सार्वजनिक रूप से धमकियां दी गई हैं.
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याचिकाकर्ता ने यह भी कहा है कि मालदा में एसआईआर की प्रक्रिया में शामिल न्यायिक अधिकारियों पर दल-बल सहित सुनियोजित हमला किया गया, काम बाधित करने की कोशिश की गई. चुनाव आयोग की ओर से बार-बार हस्तक्षेप और केंद्रीय बलों की तैनाती के निर्देशों सहित चुनाव अधिकारियों की सुरक्षा केवल आंशिक रूप से ही की गई है. प्रभाव और धमकी, उत्पीड़न और बाधा डालने की साजिश अभी भी पश्चिम बंगाल के कई जिलों में जारी है.
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याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया है कि संविधान का अनुपालन न कर मनमाने कानून प्रवर्तन का निरंतर पैटर्न इस राज्य के शासनादेश में सिस्टम की विफलताओं को उजागर करता है. राज्य के अधिकारियों की ओर से गैरकानूनी हस्तक्षेप और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री सहित मनी लॉन्ड्रिंग की रोकथाम के तहत जांच अधिनियम (पीएमएलए) और अन्य वैधानिक प्रावधान, वैधानिक अधिकारियों की स्वतंत्रता, सिद्धांत का उल्लंघन करती है. संवैधानिक सर्वोच्चता और कानून के शासन को बनाए रखा जाए.
संजय शर्मा