पश्चिम बंगाल में 15 साल से सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस (TMC) को कई बड़े घोटालों की वजह से जनता की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है. शिक्षक भर्ती घोटाला, कोयला तस्करी और राशन वितरण घोटाले ने पार्टी की छवि को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया है.
इसीलिए 2026 विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 74 बैठे विधायकों के टिकट काटे और "साफ छवि" वाले उम्मीदवारों को मौका देने की बात कही. लेकिन असली सवाल यह है क्या सभी दागी नेताओं को हटाया गया?
जिन्हें हटाया गया
पार्थ चटर्जी - पार्टी के पूर्व नंबर तीन नेता और पूर्व शिक्षा मंत्री. 2022 में ED ने शिक्षक भर्ती घोटाले में गिरफ्तार किया. उनकी करीबी दोस्त के घर से करोड़ों रुपये नकद मिले थे. यह तस्वीर आज भी लोगों के जेहन में है. अभी जमानत पर हैं, CBI ने चार्जशीट में नाम लिया है.
मानिक भट्टाचार्य - प्राथमिक शिक्षा बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष. उनके कार्यकाल में हुई 26,000 नियुक्तियां हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने रद्द कर दीं. 2022 में ED ने गिरफ्तार किया, 2024 में जमानत मिली.
जीवन कृष्ण साहा - शिक्षक भर्ती घोटाले में CBI की दबिश पड़ी तो पहले मोबाइल फोन तालाब में फेंका, फिर दीवार फांदकर भागने की कोशिश की. 2024 में जमानत मिली.
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जिन्हें फिर टिकट दिया गया
परेश चंद्र अधिकारी - मेखलीगंज से उम्मीदवार. शिक्षा राज्य मंत्री रहे. आरोप है कि अपनी बेटी को गलत तरीके से शिक्षक की नौकरी दिलाई. कोर्ट ने बेटी की नौकरी रद्द करके तनख्वाह वापस करने का आदेश दिया. 2022 में मंत्री पद गया, लेकिन इस बार फिर टिकट मिला.
ज्योतिप्रिय मलिक - हबरा से उम्मीदवार. पांच बार विधायक रहे. 2011 से 2021 तक खाद्य मंत्री रहे और इसी दौरान राशन घोटाला हुआ. आरोप है कि गरीबों का राशन बाजार में बेच दिया गया. 2023 में ED ने गिरफ्तार किया, जनवरी 2025 में 14 महीने जेल के बाद जमानत मिली. फिर भी टिकट दिया गया.
मलय घटक - आसनसोल नॉर्थ से उम्मीदवार. पूर्व कानून मंत्री. कोयला तस्करी घोटाले में CBI और ED ने कई बार पूछताछ की और घर पर छापे मारे. हालांकि अभी तक कोर्ट ने दोषी नहीं ठहराया है.
चंद्रनाथ सिन्हा - बोलपुर से उम्मीदवार. वर्तमान कैबिनेट मंत्री. प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाले में ED ने चार्जशीट दाखिल की है जिसमें फर्जी लेनदेन का जिक्र है.
TMC ने कुछ बड़े दागी चेहरे हटाए जरूर, लेकिन कई ऐसे नेताओं को फिर मौका दिया जिन पर घोटालों के गंभीर आरोप हैं. पार्टी का कहना है कि जमीनी समीकरण इतने मजबूत थे कि इन्हें हटाना मुश्किल था. विपक्षी BJP इसे सीधे भ्रष्टाचार को बढ़ावा देना बता रही है.
अनिर्बन सिन्हा रॉय