तमिलनाडु का 'विजयपथ'... जानें- किन वजहों से दोनों बड़े गठबंधनों को मिली मात

विजय की तमिलगा वेत्री कड़गम ने अपने पहले ही चुनाव में प्रचंड जीत दर्ज की है. करूर भगदड़ और CBI जांच जैसी चुनौतियों के बावजूद विजय की लोकप्रियता कायम रही, जिसने TVK को मजबूत राजनीतिक विकल्प के रूप में स्थापित कर दिया.

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51 वर्षीय विजय का यह चुनावी डेब्यू उनके फिल्मी करियर की तरह ही रोमांच से भरा रहा. (Photo- PTI) 51 वर्षीय विजय का यह चुनावी डेब्यू उनके फिल्मी करियर की तरह ही रोमांच से भरा रहा. (Photo- PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 05 मई 2026,
  • अपडेटेड 6:31 AM IST

तमिलनाडु की राजनीति में अभिनेता से नेता बने विजय ने अपने पहले ही चुनाव में बड़ा कमाल कर दिखाया है. उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) ने प्रचंड जीत दर्ज की है. चुनावी नतीजों पर गौर करें तो उससे यह साफ नजर आ रहा है कि कि राज्य में मुकाबला अब सीधे TVK और DMK के बीच सिमटता जा रहा है.

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51 वर्षीय विजय का यह चुनावी डेब्यू उनके फिल्मी करियर की तरह ही रोमांच और अनिश्चितता से भरा रहा. हालांकि, करूर में 27 सितंबर 2025 को हुई भगदड़, जिसमें 41 लोगों की मौत हो गई थी, इस पूरे अभियान पर एक बड़ा साया बनकर उभरी. इस घटना के बाद राजनीतिक रैलियों को लेकर सख्त दिशानिर्देश बनाए गए और विजय को इस मामले में CBI जांच का भी सामना करना पड़ा. इसके बावजूद, विजय की लोकप्रियता और करिश्मा पर इसका खास असर नहीं पड़ा. 

1977 के बाद से तमिलनाडु में सत्ता DMK और AIADMK के बीच ही बदलती रही है. अब TVK ने इस पैटर्न को तोड़ दिया है. विजय की पार्टी की इस आंधी में मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन समेत कई वरिष्ठ नेता भी अपनी सीटें बचाने में नाकाम रहे हैं. राज्य की राजनीति में ऐसा कम ही होता है जब बड़े नेता अपनी सीट हार जाएं. वोट प्रतिशत देखें तो DMK को 34.44% वोट मिले, जो TVK के 34.82% से बहुत कम नहीं हैं, जबकि AIADMK को 26.42% वोट मिले. 

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अब सवाल उठता है कि थलपती विजय की पार्टी की इस धमाकेदार जीत के फैक्टर क्या हैं? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य में मौजूदा सरकार के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी लहर ने TVK को बड़ा फायदा पहुंचाया. खास तौर पर पहली बार वोट देने वाले युवा, महिलाएं और शहरी मतदाता विजय के समर्थन में खुलकर सामने आए. तमिलनाडु की जनता को DMK और AIADMK से अलग विकल्प की जरूरत थी, जिसके लिए टीवीके सबसे सटीक पार्टी बनकर उभरी है. बीजेपी पर हमेशा बाहरी पार्टी होने का आरोप स्थानीय पार्टियां लगाती रही हैं. 

विजय का विशाल फैन बेस भी चुनाव में निर्णायक साबित हुआ. फिल्मों से मिली लोकप्रियता को उन्होंने सीधे राजनीतिक समर्थन में बदलने में सफलता हासिल की. इसके साथ ही, TVK के 'सुपर सिक्स' वादों ने भी मतदाताओं को आकर्षित किया. इनमें महिलाओं के लिए हर साल छह मुफ्त LPG सिलेंडर और मासिक आर्थिक सहायता जैसे वादे शामिल थे.

हालांकि, एक राजनीति में नए होने के कारण विजय को आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा. विपक्ष ने उन पर आरोप लगाया कि उनकी चुनावी सभाएं फिल्मों के संवादों जैसी लगती हैं. इसके बावजूद, उन्होंने अपने दम पर पूरी चुनावी मुहिम चलाई, जो एक तरह से 'वन-मैन शो' रही.

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