दक्षिण भारत के सबसे बड़े सियासी गढ़ तमिलनाडु में मंगलवार को चुनाव प्रचार का शोर थम जाएगा. राज्य की कुल 234 विधानसभा सीटों पर एक साथ गुरुवार को मतदान है जबकि नतीजे 4 मई को आएंगे. 5.67 करोड़ से अधिक मतदाता तय करेंगे कि तमिलनाडु की सत्ता 'द्रविड़ मॉडल' के पास रहेगी या एक्टर से नेता बने थलापति विजय की सियासी एंट्री से सारे समीकरण ध्वस्त हो जाएगा.
तमिलनाडु की सियासत लंबे समय से DMK और AIADMK के बीच सिमटी रही है, इन्हीं दोनों क्षत्रपों के सहारे बीजेपी और कांग्रेस अपनी-अपनी राजनीति करती रही हैं. इस बार चुनाव मुकाबला केवल DMK और AIADMK के बीच नहीं है, बल्कि यह त्रिकोणीय तब्दील हो चुका है.
डीएमके प्रमुख और मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने कांग्रेस से लेकर लेफ्ट और डीएमडीके के साथ गठबंधन कर सत्ता को बचाए रखने की जंग लड़ रहे हैं तो AIADMK ने बीजेपी के साथ मिलकर सत्ता में वापसी के लिए बेताब है. इन दोनों के बीच सिमटे सियासी समीकरण को थलापति विजय त्रिकोणीय बनाने की कवायद करते नजर आ रहे. देखना है कि इस बार सियासी बाजी कौन मारता है?
तमिलनाडु की 234 सीटों का पूरा गुणा-गणित
तमिलनाडु की सभी 234 विधासभा सीट पर एक साथ एक ही चरण में 23 अप्रैल को मतदान है. राज्य में 234 विधानसभा सीटें हैं, जिसमें से 44 सीटें अनुसूचित जाति (SC) और 2 सीटें अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित हैं. इसके अलावा 188 सीटें सामान्य वर्ग के लिए हैं.
तमिलनाडु पश्चिमी, दक्षिणी, मध्य और उत्तरी- चार राजनीतिक क्षेत्रों में विभाजित है. राज्य की 234 सीटों पर कुल 4023 उम्मीदवार अलग-अलग दलों और निर्दलीय रूप से किस्मत आजमा रहे हैं, जिनकी किस्मत का फैसला 5 करोड़ 73 लाख 43 हजार 291 मतदाता गुरुवार को करेंगे.
मुख्य चुनाव अधिकारी ने बताया कि कुल 75 हजार 64 मतदान केंद्र मतदान के लिए तैयार हैं. निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए 7 हजार 14 सूक्ष्म पर्यवेक्षक तैनात किए गए हैं. 136 सामान्य पर्यवेक्षक, 40 पुलिस पर्यवेक्षक और 150 व्यय पर्यवेक्षक तैनात किए हैं. राज्य में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल की तीन सौ कंपनियों को तैनात किया गया है, जिनमें 83 हजार से अधिक पुलिसकर्मी और 40 हजार से अधिक गैर-पुलिसकर्मी है.
तमिलनाड में किस तरह के सियासी समीकरण
तमिलनाडु की 234 सीटों पर 4023 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं. इस बार विधानसभा चुनाव दो प्रमुख गठबंधनों के बीच है. इंडिया गठबंधन की अगुवाई तमिलनाडु में डीएमके कर रही है, जो करीब 164 विधानसभा सीट पर किस्मत आजमा रही है तो उसकी सहयोगी कांग्रेस 28 सीट, डीएमडीके 10, वीसीके 8 वामदल 10 सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं. इसके अलावा एमडीएमके 4, IUML 2, KMDK 2 और एमएमके 2 सीटों पर किस्मत आजमा रही हैं.
वहीं, AIADMK के नेतृत्व वाले बीजेपी और पीके साथ मजबूत गठबंधन बना रखा है. AIADMK 166 सीटों पर उम्मीदवार उतार रखे हैं तो उसकी सहयोगी बीजेपी 27 सीटों पर किस्मत आजमा रही हैं. रामदास की पार्टी पीएमके 18 सीट पर चुनाव लड़ रही है तो दिनाकरण की AMMK 11 सीट पर मैदान में है. इसके अलावा तमिल मनीला कांग्रेस भी पांच सीट पर चुनाव लड़ रही.
अभिनेता से नेता बने थलापतिविजय की पार्टी (TVK) ने सभी 234 सीटों पर उम्मीदवार उतार रखे हैं. इस चुनाव का सबसेबड़ा 'शॉकर' अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कलगम (TVK) है. विजय ने किसी भी गठबंधन से हाथ नहीं मिलाया है और अकेले दम पर किस्मत आजमा रहे हैं. विजय भी खुद दो सीटों- पेरम्बूर और तिरुचि ईस्ट से चुनाव लड़ रहे हैं, जिसके चलते मुकाबला रोचक हो गया है.
तमिलनाड में किसका क्या दांव पर लगा है
तमिलनाडु में एमके स्टालिन लगातार दूसरी बार सत्ता हासिल करने की जंग लड़ रहे हैं, जिसके लिए उन्होंने कांग्रेस ही नहीं बल्कि डीएमडीके जैसे दल के साथ भी हाथ मिला रखा है. इसके अलावा लेफ्ट और अन्य क्षेत्रीय दलों को साथ ले रखा है. स्टालिन अपनी कल्याणकारी योजनाओं और 'द्रविड़ पहचान'के दम पर सत्ता बचाने की कवायद में है.
AIADMK और भाजपा मिलकर ग्रामीण और पश्चिमी बेल्ट (कोंगु क्षेत्र)में सेंध लगाने की कोशिश में है, लेकिन विजय (TVK) और सीमान (NTK) जैसे खिलाड़ी उन 'न्यूट्रल' वोटर्स पर नजर गड़ाए हुए हैं जो पुराने द्रविड़ दलों से ऊब चुके हैं. विजय के पास जबरदस्त फैन फॉलोइंग है और उन्हें अच्छे वोट शेयर मिलने का पूरा भरोसा है. ऐतिहासिक रूप से, तमिलनाडु में डीएमके और एआईएडीएमके के बीच मुकाबला रहा है. यह कहना मुश्किल है कि विजय की पार्टी इसे बदल पाएगी या नहीं, लेकिन उनके प्रशंसक बहुत बड़ी संख्या में हैं.
बीजेपी के परिसीमन विधेयक के खिलाफ डीएमके ने अलग ही सियासी माहौल बना दिया है तो बीजेपी महिला आरक्षण को लेकर राजनीतिक एजेंडा सेट कर रही. स्टालिन के लिए सत्ता विरोधी लहर से निपटना चुनौती है, लेकिन जाति और जमीनी स्तर पर चुनावी समीकरण से माहौल को बदलने की कवायद में है.
बीजेपी-AIADMK मिलकर क्या गुल खिलाएंगे
भाजपा को उम्मीद है कि वह 2021 से बेहतर प्रदर्शन करेगी. वह 27 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जो एआईएडीएमके गठबंधन में शामिल होने के बाद से उसकी सबसे अधिक सीटों में से एक है. बीजेपी को दक्षिण और पश्चिमी तमिलनाडु में अच्छा प्रदर्शन करने की उम्मीद है. साथ ही, वह राज्य के अन्य हिस्सों में भी सीटें जीतने की उम्मीद कर रही है.
यललिता की पार्टी एआईएडीएमके प्रमुख विपक्षी दल है. यह भाजपा के साथ गठबंधन में है. गठबंधन ने 2021 में 234 सीटों में से 75 सीटें जीती थीं और इस बार बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद कर रहा है. एआईएडीएमके का पूरे राज्य में मजबूत संगठन है और 2021 में उसे 33 प्रतिशत वोट मिले थे,लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के अलग से चुनाव लड़ने पर उसका वोट शेयर घटकर 27 प्रतिशत रह गया था. ऐसे में देखना है कि दोनों मिलकर क्या स्टालिन को दबदबे को तोड़ पाएंगे?
कुबूल अहमद