पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर मामला सोमवार को एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. वरिष्ठ वकील और टीएमसी की राज्यसभा सांसद मेनका गुरुस्वामी ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच के सामने मेंशनिंग करते हुए दावा किया कि राज्य में करीब 5 से 7 लाख नए वोटरों को फॉर्म-6 के जरिए मतदाता सूची में जोड़ा गया है. उन्होंने मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए इस पर कोर्ट के हस्तक्षेप की मांग की.
मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि फॉर्म-6 का उपयोग नए वोटरों को जोड़ने के लिए किया जाता है, जबकि फॉर्म-7 नाम हटाने और फॉर्म-8 मतदाता से जुड़े विवरण में संशोधन के लिए होता है. इस दौरान उन्होंने बड़े पैमाने पर फॉर्म-6 के इस्तेमाल पर सवाल उठाए. इस पर चीफ जस्टिस जस्टिस सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर रोज नई-नई बातें सामने आ रही हैं, जिससे लगता है कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर से जुड़े मामलों के लिए एक अलग पीठ का गठन करना होगा.
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हालांकि सीजीआई ने यह भी स्पष्ट किया कि पहले इस मामले में औपचारिक याचिका दाखिल की जाए, उसके बाद ही कोर्ट इस पर विचार करेगा. बता दें कि इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने इसी तरह के आरोपों पर सुनवाई से इनकार किया था और कहा था कि इस तरह की आपत्तियां उठाना नया नहीं है, संबंधित पक्ष अपनी आपत्तियां उचित मंच पर दर्ज करा सकते हैं.
इस बीच, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर फॉर्म-6 के कथित दुरुपयोग और बाहरी लोगों को फर्जी मतदाता के रूप में जोड़ने के आरोप लगाए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि विभिन्न राज्यों में चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे एसआईआर अभियान में किसी भी तरह की बाधा बर्दाश्त नहीं की जाएगी और यह प्रक्रिया सुचारु रूप से जारी रहनी चाहिए.
संजय शर्मा