उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव एक साल बाद है, लेकिन सियासी रंग पूरी तरह से चढ़ चुका है. चौधरियों के गढ़ माने जाने वाले पश्चिमी यूपी 2027 की चुनावी प्रयोगशाला बनता नजर आ रहा है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने गुर्जर बहुल ग्रेटर नोएडा के दादरी से मिशन-2027 का आगाज किया तो उसी दिन सरधना विधानसभा क्षेत्र के सकौती में जाट समाज के पूर्वज वीर शिरोमणि महाराजा सूरजमल की प्रतिमा का अनावरण किया गया, जहां पर जाटों के तमाम बड़े नेताओं ने शिरकत किया.
महाराजा सूरजमल की प्रतिमा अनावरण समारोह के चलते सरधना विधानसभा क्षेत्र जाट राजनीति की नई प्रयोगशाला बनकर उभरी है. देश के कई राज्य के जाट नेता सरधना में जुटे, जिसमें पंजाब के सीएम भगवंत मान, राजस्थान से नौगार सीट से सांसद हनुमान बेनीवाल, बीजेपी नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान, पूर्व किक्रेटर प्रवीण कुमार पहुंचे थे.
जाट समुदाय के बीच संजीव बालियान ने अपनी जमकर भड़ास निकाली और 2024 के लोकसभा चुनाव में हार का हिसाब करने का भी ऐलान करते नजर आए. संजीव बालियान ने जिस तरह से अपनी हार के अपमान का बदला लेने और सूद व ब्याद सहित वापस लौटाने की बात कही है, उसे बीजेपी के पूर्व विधायक संगीत सोम के साथ चली आ रही अदावत से जोड़कर देखा जा रहा है.
बालियना के निशाने पर क्या फिर संगीत सोम
संजीव बालियान ने कहा कि राजनीति और सामाजिक जीवन में कई बार अपमान सहना पड़ता है,लेकिन वह इस अपमान को भूले नहीं हैं और इसे 'सूद व ब्याज समेत' वापस लौटाएंगे.' बालियान यहीं पर नहीं रुके उन्होंने कहा कि चुनाव में हार-जीत एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, वो लगी रहती है, उसका दुख नहीं होता. दुख उस अपमान का होता है,जो षड्यंत्र के तहत किया गया हो. मेरा दो बार अपमान हुआ है और मैं इसे भूलने वाला नहीं हूं.'
सरधना में जाट समुदाय के लोगों से संजीव बालियना ने कहा कि अगर मैं अपनी हार के अपमान को भूल जाऊं तो तुम याद दिलाना, और तुम भूलोगे तो मैं तुम्हें भूलने नहीं दूंगा. इस तरह पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान को अपनी चुनावी हार का दर्द मंच से छलक उठा और क्या संगीत सोम से अपनी बार का हिसाब बराबर चाहते हैं.
संगीत सोम बनाम संजीय बालियना की अदावत
सरधना विधानसभा सीट भले ही मेरठ जिले का हिस्सा हो, लेकिन यह मुजफ्फरनगर लोकसभा क्षेत्र में आती है. संजीय बालियान और संगीत सोम को राजनीतिक पहचान और बुलंदी मुजफ्फरनगर दंगे से मिली. बालियान मुजफ्फरनगर से दो बार सांसद बने तो संगीत सोम सरधना से दो बार विधायक रहे. 2022 में संगीत सोम सरधना से चुनाव हार गए तो 2024 में संजीव बालियान मुजफ्फरनगर से चुनाव हार गए. यहीं से संजीव बालियान और संगीत सोम के बीच विवाद पनपा.
संगीत सोम को अपनी हार के पीछे जाट वोटों का कम मत में पड़ने को वजह मानी. संगीत सोम ने इसका ठीकरा संजीव बालियान के सिर पर फोड़ा था. इसके चलते दोनों ही नेताओं के बीच आपसी विवाद और गहराने लगा. लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान दोनों ही नेताओं की सियासी अदावत खुलकर सामने आ गई और संजीव बालियान ने अपनी हार के लिए संगीत सोम पर निशाना साधा. इस तरह जाट बनाम ठाकुर का सियासी रंग देने की कवायद की गई, क्योंकि संगीत सोम ठाकुर तो संजीव बालियान जाट हैं.
बालियान ने संगीत सोम का नाम लिए बिना कहा था कि कुछ जयचंद और विभीषण जनता के बीच में जाकर गुमराह करने में कामयाब रहे. कुछ लोग शिखंडी की तरह नजर आए.इसमें मेरी कमी है, जनता को मैं पूरी तरह समझा नहीं पाया पर जो जयचंद हैं पार्टी उन्हें देखेगी. संगीत सोम का नाम लिए बगैर संजीव बालियान ने कहा कि कुछ लोग सपा को यहां खुलेआम चुनाव लड़ा रहे थे. ऐसे में बालियान और संगीत सोम के बीच का विवाद खत्म कराने को खुद सीएम योगी आदित्यनाथ ने साथ बिठाकर गिले शिकवे दूर करने की कोशिश की थी, लेकिन अभी भी अदावत जगजाहिर है.
सरधना में जाट बनाम ठाकुर की लड़ाई
संगीत सोम और संजीव बालियान के बीच राजनीतिक अदावत ने ठाकुर बनाम जाट का रंग ले लिया है. संगीत सोम अपनी हार के लिए जाट के कम वोट होने की वजह मानते हैं तो संजीव बालियान को अपनी हार में ठाकुर वोटों का छिटकना बताते रहे हैं. सरधना में जाट समुदाय के वीर शिरोमणि महाराजा सूरजमल की प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम में संजीव बालियान ने जिस तरह जाटों से अपने हार के अपमान का सूद समेत हिसाब बराबर करने की बात कही है, उससे साफ है 2027 में संजीव बालियान के लिए सियासी राह आसान नहीं रहने वाली है.
बालियान के हमले के बाद सोमवार सुबह सरधना से बीजेपी के पूर्व विधायक संगीत सोम गांव सकौती जा पहुंचे, जहां पर उन्होंने महाराजा सूरजमल की मूर्ति पर माल्यार्पण किया. इसके बाद संगीत सोम जाट समाज को साधने के लिए उनके साथ काफी देर बैठे और बातकर दुख दर्द जाना. इस तरह जाट समुदाय को साधते नजर आए, लेकिन 2022 में उन्हें चुनाव हराने वाले सपा विधायक अतुल प्रधान भी जाट वोटों पर नजर लगाए हुए हैं,
सरधना विधानसभा क्षेत्र से सपा विधायक अतुल प्रधान दादरी में पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की रैली में थे. जैसे ही उन्हें पता चला कि उनके विधानसभा क्षेत्र से जुड़े बीजेपी नेता संजीव बालियान ने पूर्व विधायक सगीत सोम पर निशाना साधा है, तो अतुल प्रधान फौरन अखिलेश यादव से विदा लेकर रात में ही सकौती पहुंचे. महाराजा सूरजमल की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया. जाट समाज के साथ खड़े होने का भरोसा दिया. मूर्ति फाउंडेशन से 'जाट' शब्द हटाने पर समाधान निकलवाने का वादा किया.
जयंत चौधरी ने क्यों बनाए रखा दूरी?
जाट समाज के पूर्वज वीर शिरोमणि महाराजा सूरजमल की प्रतिमा अनावरण समारोह में कई प्रदेश के जाट नेता पहुंचे, लेकिन राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष चौधरी जयंत सिंह की गैरमौजूदगी हर किसी को खली है. पश्चिमी यूपी में जाट समुदाय को आरएलडी का वोटबैंक माना जाता है. जयंत के दादा चौधरी चरण सिंह और पिता अजित सिंह का मुजफ्फरनगर कर्मभूमि रही है. मूर्ती अनावरण के कार्यक्रम के लिए जो पोस्टर लगाए गए थे, उसमें भी जयंत चौधरी की तस्वीर लगी हुई थी. इसके बाद भी नहीं पहुंचे, जिसे लेकर तरह से कयास लगाए जा रहा हैं.
आरएलडी के क्षेत्रीय अध्यक्ष की तरफ से एक पत्र भी जारी किया गया, जिसमें लिखा था कि चौधरी जयंत सिंह 29 मार्च को संसद के सत्र में मौजूद रहने के कारण प्रतिमा अनावरण में शामिल नहीं हो सकेंगे. शिरोमणी महाराजा सूरजमल हमारे आदर्श हैं,लेकिन बड़ी बात यह है कि 29 मार्च को रविवार था और रविवार को संसद नहीं चलती. ऐसे में सवाल है कि क्यों जयंत चौधरी ने दूरी बनाए रखा.
आरएलडी नेताओं की मानें तो आयोजन समिति की तरफ से चौधरी जयंत को अधिकारिक तौर पर कोई निमंत्रण नहीं दिया गया. इतना ही नहीं आयोजन से पहले मशविरा भी नहीं किया. जयंत के गढ़ वेस्ट यूपी में केंद्रीय मंत्री होने के बाद भी आप नेता पंजाब के सीएम भागवंत मान को बतौर मुख्य अतिथि बना दिया गया. इसके चलते ही आरएलडी ने दूरी बना ली, लेकिन 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए कहीं जयंत चौधरी से बहुत बड़ी चूक तो नहीं हो गई है.
कुबूल अहमद