उत्तर प्रदेश बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष कुंवर बासित अली ने मेरठ में गुरुवार को एक रोजा इफ्तार की पार्टी रखी है, जिसमें बड़ी संख्या में मुसलमानों के शामिल होने की बात कही जा रही है. यूपी में योगी आदित्यनाथ के अगुवाई में बीजेपी की सरकार बनने के बाद पहली बार रोजा इफ्तार की दावत रखी गई है, लेकिन जिस तरह यह आयोजन लखनऊ के बजाय पश्चिमी यूपी के मुस्लिम बहुल मेरठ में रखा गया है, उसके राजनीतिक मायने को समझा जा सकता है?
2027 के विधानसभा चुनाव की बिसात अभी से बिछाई जाने लगी है. सपा और कांग्रेस की नजर बसपा के कोर वोटबैंक पर है तो बीजेपी की नजर सपा के सबसे मजबूत वोटबैंक माने जाने वाले सेंधमारी की है. इसी मद्देनजर बीजेपी के अल्पसंख्यक मोर्चा ने मेरठ में रोजा इफ्तार की पार्टी रखी है.
बीजेपी का 'रोजा इफ्तार'आयोजनों को मुस्लिम समुदायों के बीच पहुंच बनाना एक सोची-समझी 'माइक्रो-मैनेजमेंट' रणनीति का हिस्सा है. बीजेपी ने रोजा इफ्तार के बहाने मुस्लिम समाज के साथ अपने रिश्ते की डोर को मजबूत करने का दांव माना जा रहा है.
मेरठ में आज बीजेपी की रोजा इफ्तार पार्टी
यूपी बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा की तरफ मेरठ में गुरुवार को 'रोजा इफ्तार' का आयोजन किया गया है. इस इफ्तार पार्टी में योगी सरकार के कई मंत्री, बीजेपी के तमाम विधायक, पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सदस्य सहित पार्टी के तमाम नेता शिरकत करेंगे. बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष कुंवर बासित अली कहते हैं कि रमजान आपसी भाईचारे का महीना है. इस महीने में हम सब मिलकर देश के अमन-चैन और खुशहाली के लिए एकजुट हो रहे हैं. हम सब मिलकर विकसित उत्तर प्रदेश को बनाने का काम करेंगे.
कुंवर बासित अली कहते हैं कि हमारी संस्कृति आपसी सम्मान, प्रेम और सद्भाव का प्रतीक है. रोजा इफ्तार जैसे कार्यक्रम समाज में एकजुटता और समरसता को और अधिक सशक्त करते हैं. इस देश में सबके लिए जगह है और सबके दिल में जगह है.इसी तरह मिलजुल कर देश आगे बढ़ेगा. जब हम इफ्तार के लिए एक साथ बैठते हैं, खाते हैं, बातें करते हैं और अच्छी बातें करते हैं,तो बहुत अच्छा लगता है.
बासित अली कहते हैं कि बीजेपी के तमाम बड़े नेताओं के रोजा इफ्तार पार्टी में शिरकत करने से यूपी के मुसलमानों को हौसला मिलेगा. देश की मोदी और यूपी की योगी सरकार का संदेश साफ है सबको साथ लेकर चलने की है. रोजा इफ्तार के बहाने अल्पसंख्यक समुदाय के साथ संवाद कार्यक्रम भी शुरू कर रहे हैं. पश्चिमी यूपी में मुसमलानों की तादाद सबसे ज्यादा है और उसका केंद्र मेरठ है. इसीलिए लखनऊ के बजाय मेरठ में रोजा इफ्तार का आयोजन किया जा रहा है.
रोजा इफ्तार में योगी के मंत्री से सांसद तक
बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बासित अली की तरफ से आयोजित रोजा इफ्तार पार्टी में बीजेपी के सांसद दुष्यंत गौतम, राज्यसभा सांसद गुलाम अली खटाना, पूर्व सांसद राजेंद्र अग्रवाल, पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी, पूर्व सांसद सैय्यद जफर इस्लाम दिल्ली से मेरठ में पहुंचेगें तो योगी सरकार के मंत्री डा. सोमेंद्र तोमर और अल्पसंख्यक मंत्री दानिश आजाद अंसारी भी शिरकत करेंगे. इसके अलावा बीजेपी की मीडिया सह प्रभारी डा. संजय मयूख भी रोजा इफ्तार में शामिल होंगे.
बीजेपी एमएलसी अश्वनी त्यागी, कुंदरकी से पार्टी विधायक ठाकुर रामवीर सिंह और संगठन मंत्री अमित बाल्मिकी को भी रोजा इफ्तार की दावत दी गई है. इसके अलावा रोजा इफ्तार में कई राज्यों के बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी पहुंच रहे हैं. इसमें राजस्थान बीजेपी अल्पसंख्यक प्रदेश अध्यक्ष हमीज खान मेवाती, महाराष्ट्र बीजेपी अल्पसंख्यक प्रदेश अध्यक्ष वसीम खान और दिल्ली अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष अनीस अब्बासी भी शामिल होंगे. इसके अलावा बीजेपी की सहयोगी हम पार्टी के मुस्लिम चेहरा माने जाने वाले दानिश रिजवान भी पहुंचेगे.
रोजा इफ्तार के बहाने 2027 को साधने का दांव
बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के रोजा इफ्तार में जिस तरह से बीजेपी के तमाम बड़े नेताओं को बुलाया गया है, उससे साफ है कि पार्टी की नजर मुसलमानों के वोट बैंक को अपने साथ जोड़ने की रणनीति है. 2024 के लोकसभा चुनाव में मुस्लिमों का बड़ा हिस्सा सपा के साथ गया था, जिसे बीजेपी अब अपने साथ जोड़ने की कवायद में है. इसीलिए यूपी में बीजेपी पहली बार योगी सरकार के बनने के बाद रोजा इफ्तार पार्टी का आयोजन कर रही है.
नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद से बीजेपी ने रोजा इफ्तार का आयोजन बंद कर दिया था, लेकिन 2025 में पार्टी के कुछ नेताओं ने जरूर आयोजन किया था. उत्तर प्रदेश का राज्यपाल रहते हुए राम नाइक हमेशा इफ्तार पार्टी का आयोजन करते थे, लेकिन बीजेपी के द्वारा इफ्तार आयोजन नहीं किया जाता था. 2027 के चुनावी सरगर्मी को देखते हुए बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा ने रोजा इफ्तार की दावत मुस्लिम बहुल मेरठ में रखी गई है, जिसके जरिए पश्चिम यूपी को साधने की दांव है.
रोजा इफ्तार पार्टी के जरिए बीजेपी यूपी के मुस्लिमों के दिल में उतरने की कवायद कर रही ताकि सपा के पीडीए फॉर्मूले को काउंटर किया जा सके.यही वजह है कि बीजेपी ने रोजा इफ्तार के लिए पश्चिमी यूपी के तमाम जिलों से मुस्लिम समुदाय के लोगों को निमंत्रण दिया है. मेरठ में होने वाले रोजा इफ्तार में आठ से दस हजार मुस्लिम समुदाय के शामिल होने की उम्मीद है. रोजा इफ्तार के बाद बीजेपी नेता मुस्लिम समुदाय के साथ संवाद करेंगे और उनके तमाम संदेह को दूर करने की कोशिश करते नजर आएंगे.
सपा के पीडीए का काउंटर प्लान रोजा इफ्तार
उत्तर प्रदेश में 2022 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनाव में मुस्लिम समुदाय ने एकमुश्त वोट सपा को दिया था. सीएसडीएस के मुताबिक 87 फीसदी मुस्लिमों का वोट इंडिया ब्लॉक को मिला था. सपा के पक्ष में मुस्लिम वोटों की लामबंदी ने बीजेपी का सारा गेम बिगाड़ दिया था. बीजेपी की सीटें घटकर यूपी में सिर्फ 33 रह गईं. यही वजह है कि बीजेपी ने मुस्लिमों के बीच अपनी पैठ जमाने के लिए रोजा इफ्तार रखा है ताकि उनके साथ संवाद कर उनके दिल की बात को समझा जा सके.
अखिलेश यादव के 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) और पारंपरिक 'M-Y' (मुस्लिम-यादव) समीकरण को कमजोर करने के लिए बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चे को सक्रिय कर रही है. 2022 में बीजेपी जिन मुस्लिम बहुल सीटों पर हारी थी, वहां पार्टी अब आक्रामक तरीके से अपनी पहुंच बढ़ा रही है.
रोजा इफ्तार जैसे कार्यक्रम मुस्लिम समुदायों के साथ संवाद का एक 'सॉफ्ट' जरिया बनता है. बीजेपी अपनी छवि को 'सर्वसमावेशी' दिखाने का प्रयास कर रही है. इफ्तार जैसे आयोजनों से वह यह संदेश देना चाहती है कि वह किसी विशेष धर्म के खिलाफ नहीं है, बल्कि 'तुष्टिकरण के बिना विकास' में विश्वास रखती हैय
विपक्ष अक्सर बीजेपी पर मुस्लिम विरोधी होने का आरोप लगाता है. इफ्तार और मुस्लिम मोर्चे के कार्यक्रमों के जरिए बीजेपी इस 'डर' के माहौल को कम कर उनके बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाना चाहती है.
बीजेपी का मकसद मुसलमानों का एकमुश्त वोट हासिल करना नहीं, बल्कि विपक्षी गठबंधन के मजबूत वोट बैंक में 'सेंधमारी' करने का है. ऐसे में अगर बीजेपी 5 से 10 प्रतिशत मुस्लिम वोट भी अपनी ओर खींच लेती है, तो 2027 में विपक्ष के लिए सत्ता की राह बेहद मुश्किल हो सकती है.
कुबूल अहमद