पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के बीच धार्मिक ध्रुवीकरण की पिच तैयार की जा रही है. अयोध्या में बाबरी विध्वंस की बरसी पर 6 दिसंबर के दिन मुर्शिदाबाद में एक मस्जिद की नींव रखी गई. टीएमसी से निष्कासित विधायक हुमाऊ कबीर ने इसे बाबरी मस्जिद के नाम पर बना रहे हैं, जिसे लेकर अब हिंदू संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है और किसी भी सूरत में मस्जिद नहीं बनने देने का ऐलान किया है.
लखनऊ की सड़कों पर 'मुर्शिदाबाद चलो' की अपील वाले तमाम पोस्टर लगाए गए हैं. हिंदू संगठनों ने 10 फरवरी को बंगाल के मुर्शिदाबाद पहुंचने की अपील की है. हिंदू संगठनों ने लिखा है, 'हुमायूं हम आएंगे', 'बाबरी फिर से गिराएंगे', 'बंटोगे तो कटोगे','चलो मुर्शिदाबाद'. अब हिंदू संगठन के लोग बंगाल के लिए कूच कर रहे हैं.
पश्चिम बंगाल में जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे हिंदू-मुस्लिम की राजनीति तेज हो गई है. इसका मुख्य केंद्र मुर्शिदाबाद जिला बना हुआ है. यहां टीएमसी से बाहर किए गए हुमायूं कबीर मुसलमानों के बीच अपनी सियासी पकड़ बनाने में जुटे हैं तो बीजेपी धार्मिक ध्रुवीकरण में अपनी सियासी संभावना. इस तरह से बंगाल में चुनाव से पहले बाबरी के मुद्दे पर नई सियासी प्रयोगशाला बन रहा है, जो ममता बनर्जी के लिए सियासी टेंशन बढ़ा रहा है.
हिंदू संगठन अब बंगाल कूच कर रहे
विश्व हिंदू रक्षा परिषद के द्वारा लखनऊ में होर्डिंग लगाई गई. लखनऊ के 1090 चौराहा, अंबेडकर चौराहा, हजरतगंज चौराहे के साथ साथ शहर के अलग अलग हिस्सों में होर्डिंग लगाकर हिंदुओं से मुर्शिदाबाद चलने की अपील की गई.
हिंदू संगठन के द्वारा लगाए पोस्टर में पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी की भी तस्वीर लगाई है. इस तरह हिंदू संगठन नई बाबरी के निर्माण में सीधे-सीधे ममता बनर्जी को भी बराबर का शरीक मान रहे हैं. मंगलवार को सुबह से हिंदू संगठन के लोग बड़ी संख्या में लखनऊ में एकजुट हुए हैं ताकि मुर्शिदाबाद के लिए कूच कर सकें.
हुमाऊं कबीर ने जिंदा किया मुद्दा
अयोध्या में बाबरी मस्जिद का वजूद ही खत्म हो चुका है. अब उसे बंगाल के मुर्शिदाबाद में जिंदा कर हुमायूं कबीर ने एक ऐसे विवाद को जन्म दे दिया है जिसे लेकर सियासत गर्मा गई है. लखनऊ के ये पोस्टर इसी की तस्दीक कर रहे हैं तो हुमाऊं कबीर ने भी हिंदू संगठनों को खुली चेतावनी दे दी है कि देखते हैं कि कौन आकर बाबरी मस्जिद के निर्माण को रोकता है.
बंगाल में बाबरी के नाम पर मस्जिद का निर्माण हुमाऊं कबीर करा रहे हैं और अपनी अलग राजनीति खड़ी करना चाहते हैं. 6 दिसंबर को मस्जिद की बुनियाद रखने के बाद मुस्लिम समुदाय के लोग वहां बड़ी संख्या में लोग दान और निर्माण सामग्री लेकर पहुंचे. इस तरह हुमायूं कबीर बाबरी मस्जिद के बहाने अपनी राजनीतिक दशा और दिशा तय कर ली है.
धार्मिक ध्रुवीकरण की बिछी बिसात
हिंदू संगठन एक तरफ मुर्शिदाबाद चलकर बाबरी को किसी भी सूरत में नहीं बनने देने का ऐलान कर रहे हैं तो हुमाऊं कबीर ने भी खुली धमकी दे रहे हैं. इस मुद्दे पर सियासी टकराव वाली स्थिति बन गई है.बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के सवाल खड़े कर दिए हैं और सत्ताधारी पार्टी के भीतर की बेचैनी को उजागर कर दिया है. ऐसे में अब
टीएमसी को सियासी तौर पर बेचैन कर दिया है.
हिंदू-मुसलमान के बीच की खाई चौड़ी कर हुमायूं कबीर मुर्शिदाबाद में जिस मुस्लिम वोट बैंक पर कब्जे की ख्वाहिश सजा रहे हैं उसी का साइड इफेक्ट लखनऊ में लगे ये पोस्टर हैं. हिंदू संगठन के इस अपील पर हिंदुओं का जत्था मुर्शिदाबाद पहुंचता है तो ममता के लिए हिंदू और मुस्लिम वोटों के बीच सियासी बैलेंस बनाए रखना मुश्किल हो जाएगा.
मुस्लिम-हिंदू वोट का बंटवारा होगा?
बाबरी मस्जिद बनाने के बहाने हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद के मुस्लिम वोटों को साधने का दांव चला तो अब नई पार्टी बनाकर बंगाल के मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण करने का पूरा प्लान बना रखा. इस तरह से उनकी नजर बंगाल के 30 फीसदी मुस्लिम वोटों पर है, जो फिलहाल ममता बनर्जी का कोर वोटबैंक बना हुआ है. ऐसे में हुमायूं कबीर की सियासत ममता बनर्जी के लिए चिंता का सबब बन गए हैं.
बंगाल में करीब 30 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं, जो सूबे के 294 सीटों में से करीब-करीब 100 पर निर्णयक भूमिका में हैं. 2010 के बाद से बंगाल में मुस्लिम मतदाता टीएमसी का कोर वोटबैंक माना जाता है. ममता बनर्जी की लगातार तीन बार जीत में मुस्लिम वोटरों की बड़ी भूमिका रही है, लेकिन बाबरी मस्जिद के मुद्दे पर मुस्लिम वोटों को बांट सकता है.
हुमायूं के कदम से ममता बनर्जी की टीएमसी के लिए मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं तो अब हिंदू संगठनों ने मुर्शिदाबाद पहुंच कर बाबरी निर्माण को रोकने की धमकी धार्मिक ध्रुवीकरण की संभावना को जन्म दे सकता है. हिंदू और मुस्लिम के बीच खाईं गहरी हो सकती है, जिसका सीधा नुकसान ममता बनर्जी को उठाना पड़ सकता है.
बीजेपी की नजर हिंदू वोटों पर लगी
पश्चिम बंगाल में पहचान की राजनीति चुनावी गणित में अहम रोल अदा करती है. बंगाल में 2019 के लोकसभा और 2021 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने हिंदुत्व के मुद्दों पर अच्छा प्रदर्शन किया था. 2014 में कांग्रेस और 2019 में वाम दलों के गिरते प्रदर्शन के बाद बीजेपी पश्चिम बंगाल में मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी.
2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने राज्य में 42 में से 18 सीटें जीतीं. यह रुझान 2021 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में भी दिखा था. बंगाल में बीजेपी की सीटें भले ही 2019 की तुलना में 2024 में कम आईं हों, लेकिन हिंदू वोटों पर उसकी पकड़ मजबूत हो रही है.
पिछले विधानसभा चुनाव में 87 फीसद मुस्लिमों ने टीएमसी को वोट दिया था जबकि 54 फीसदी हिंदुओं ने बीजेपी को वोट दिए थे. यह ट्रेंड 2024 के लोकसभा चुनावों में भी जारी रहा. यह स्थापित हो चुका है कि ममता को अधिकांश मुस्लिम वोट मिल रहे हैं और बहुसंख्य हिंदू वोट बीजेपी को जा रहे हैं.
बीजेपी 50 फीसदी से ज्यादा हिंदू वोटों को अपने साथ लामबंद करने में अभी तक सफल रही है. बीजेपी हिंदुत्व राजनीति के माध्यम से हिंदू वोट हासिल करने के लिए बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले,अवैध प्रवासन, रोहिंग्या जैसे मुद्दों को उठाती रही है और अब उसे बाबरी का मुद्दा भी हाथ लग गया है. ऐसे में धार्मिक ध्रुवीकरण होता है तो फिर ममता बनर्जी के लिए अपने किले को बचाए रखना मुश्किल हो जाएगा.
कुबूल अहमद