पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले एक बड़ा सियासी उठापटक शुरू हो गया है. यह हलचल आ रही है फुरफुरा शरीफ से, जो भारत का दूसरा सबसे बड़ा सूफी दरगाह है. यहां के धार्मिक नेता अब्बास सिद्दीकी और उनके चाचा तौहा सिद्दीकी, दोनों ने TMC यानी तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ खुलकर बोलना शुरू कर दिया है. यह इसलिए बड़ी बात है क्योंकि फुरफुरा शरीफ का असर बंगाल के करीब 30 फीसदी वोटरों पर माना जाता है. अगर यह वोट TMC से खिसका तो बंगाल की सियासत पूरी तरह बदल सकती है.
फुरफुरा शरीफ पश्चिम बंगाल में एक बड़ा धार्मिक केंद्र है. यह भारत का दूसरा सबसे प्रभावशाली सूफी दरगाह माना जाता है. यहां के धार्मिक नेताओं की बात को लाखों लोग मानते हैं.
बंगाल में मुस्लिम वोटर एक बहुत बड़ा तबका हैं. फुरफुरा शरीफ का असर इन वोटरों पर बहुत गहरा है और माना जाता है कि राज्य के करीब 30 फीसदी वोटर इस दरगाह के धार्मिक नेताओं की बात सुनते हैं और उससे प्रभावित होकर वोट करते हैं. अब तक यह दरगाह TMC के लिए एक मजबूत आधार रहा है. लेकिन अब यहां से ही TMC के खिलाफ आवाजें उठ रही हैं.
अब्बास सिद्दीकी क्या कह रहे हैं?
अब्बास सिद्दीकी फुरफुरा शरीफ के एक प्रमुख धार्मिक नेता हैं और वो TMC के खिलाफ बहुत आक्रामक तरीके से बोल रहे हैं. उनका सबसे बड़ा आरोप यह है कि TMC ने मुस्लिम समुदाय को सिर्फ वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया है. उनका कहना है कि वादे तो बहुत हुए लेकिन असल में कुछ नहीं मिला. वो कहते हैं, 'समुदाय को कलम और नौकरी चाहिए, सिर्फ खोखले वादे नहीं.'
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अब्बास ने कुछ ठोस उदाहरण भी गिनाए हैं. उन्होंने कहा कि फुरफुरा शरीफ जैसे बड़े धार्मिक केंद्र के पास आज तक एक भी अच्छा अस्पताल नहीं बना. इस इलाके में कोई सीधी रेल कनेक्टिविटी नहीं है. कोई बड़ा उद्योग नहीं लगा. यह सब साबित करता है कि इस इलाके के साथ जानबूझकर अनदेखी हुई है.
अब्बास ने एक और बड़ी बात कही है. उन्होंने कहा कि TMC और BJP दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. उनका मतलब यह है कि TMC की कमजोरी और नाकामी ही BJP को फायदा पहुंचाती है. जब असली नेतृत्व नहीं मिलता तो लोग BJP की तरफ जाते हैं.
उन्होंने SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन का भी मुद्दा उठाया है. उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया में मुसलमानों के नाम वोटर लिस्ट से काटे जा रहे हैं और TMC सरकार कोई सुरक्षा नहीं दे रही.
तौहा सिद्दीकी क्या कह रहे हैं, यह क्यों ज्यादा चोट करता है TMC को
तौहा सिद्दीकी, अब्बास के चाचा हैं और फुरफुरा शरीफ के एक बड़े धार्मिक नेता हैं. अब तक वो TMC के प्रति थोड़े नरम माने जाते थे. इसीलिए उनका अब खुलकर नाराजगी जताना TMC के लिए और भी बड़ा झटका है.
तौहा सिद्दीकी ने कहा, 'हम सत्ता में बैठी सरकार से बहुत निराश हैं. ममता बनर्जी अच्छी इंसान हो सकती हैं, लेकिन उनकी पार्टी के कुछ विधायक पूरी तरह भ्रष्ट हैं. TMC ने फुरफुरा के लिए कुछ काम किए हैं, लेकिन जो वादे किए थे वो पूरे नहीं हुए.'
तौहा ने जंगीपाड़ा से TMC के उम्मीदवार स्नेहाशिष चक्रवर्ती का नाम लेकर कहा कि वो उनके खिलाफ वोट करेंगे. उन्होंने कहा कि ऐसे भ्रष्ट नेताओं को हराना जरूरी है.
एक और हैरान करने वाली बात तौहा ने कही. उन्होंने कहा कि उनके पास आने वाले हजारों लोगों ने यह नहीं बताया कि BJP के विधायकों ने उनके साथ कुछ गलत किया. बल्कि उनका कहना है कि समुदाय में नफरत फैलाने का काम खुद भ्रष्ट TMC नेता कर रहे हैं ताकि अपनी सियासत चमका सकें.
TMC के लिए यह इतना बड़ा खतरा क्यों है?
बंगाल की सियासत को समझने के लिए एक बात जाननी जरूरी है. यहां मुस्लिम वोट बैंक TMC की जीत की सबसे बड़ी बुनियाद रहा है. अगर यह वोट टूटा तो TMC के लिए सत्ता बचाना बहुत मुश्किल हो जाएगा.
अब तक TMC को डर था कि अब्बास सिद्दीकी जैसे नेता उनके खिलाफ बोलते हैं. लेकिन तौहा सिद्दीकी जैसे नेता, जो पहले उनके करीब माने जाते थे, उनका भी यही रुख होना बहुत बड़ी बात है.
दोनों नेता अलग-अलग बोल रहे हैं लेकिन उनकी बात एक ही दिशा में जा रही है, कि TMC ने समुदाय के साथ इंसाफ नहीं किया. युवा पीढ़ी भी इस बदलाव में अहम है. नौकरी और विकास न मिलने से युवा नाराज हैं और वो बदलाव चाहते हैं.
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2026 का चुनाव क्या रंग लेगा
2026 का यह चुनाव सिर्फ दो पार्टियों की लड़ाई नहीं रह गई है. यह अब मुस्लिम समुदाय के हक, उनके विकास और उनकी पहचान की लड़ाई बन गई है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह नाराजगी एक नई सियासी ताकत बनेगी या यह बस बिखर जाएगी. अगर फुरफुरा शरीफ के दोनों नेता एकजुट होकर किसी एक विकल्प की तरफ इशारा करें तो TMC का गढ़ टूट सकता है.
लेकिन अगर यह नाराजगी बंटी रही तो इसका फायदा किसे मिलेगा, यह भी देखने वाली बात होगी.
बंगाल की सियासत में अभी तक जो समीकरण थे, वो इस बार हिलते हुए दिख रहे हैं. और इस हलचल की शुरुआत हो रही है फुरफुरा शरीफ की उन्हीं गलियों से जहां से कभी TMC की ताकत आती थी.
तपस सेनगुप्ता