कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों पर सवाल उठाते हुए 50 विधानसभा सीटों पर दोबारा मतदान की मांग की है. पार्टी का दावा है कि इन सीटों पर जीत का अंतर उन वोटों से कम है, जिन्हें विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से हटाया गया.
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने बुधवार को केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल और असम में बड़े पैमाने पर चुनावी हेरफेर किया गया है. उन्होंने कहा कि पहले मतदाताओं के अधिकार बहाल किए जाएं और फिर प्रभावित सीटों पर दोबारा चुनाव कराया जाए.
खेड़ा ने आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों में जानबूझकर छेड़छाड़ की जा रही है और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है. उन्होंने कहा, 'अबकी बार लोकतंत्र का अंतिम संस्कार हो रहा है.'
7.2 करोड़ वोटर हटाने का दावा
कांग्रेस का दावा है कि 12 राज्यों में लगभग 7.2 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए, जो देश के कुल मतदाताओं का करीब 10.2 प्रतिशत है. खेड़ा के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान 90 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए, जिनमें से 27 लाख लोगों को उचित प्रक्रिया का मौका भी नहीं दिया गया.
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि कम से कम 50 सीटों पर हटाए गए वोटरों की संख्या जीत के अंतर से अधिक है, जिससे चुनाव परिणाम “पहले से तय” हो गए. पार्टी ने इन नतीजों को “निर्मित जनादेश” बताया है.
कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेकर हस्तक्षेप करने की अपील की है. खेड़ा ने कहा कि जिन मतदाताओं के अधिकार छीने गए हैं, उन्हें वापस मतदान का अधिकार दिया जाए और संबंधित सीटों पर पुनर्मतदान कराया जाए. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने हमेशा लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की है और इस बार भी न्याय की उम्मीद है.
कांग्रेस ने कहा कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस के साथ INDIA गठबंधन इस मुद्दे पर एकजुट है. पार्टी ने इसे लोकतांत्रिक संकट बताते हुए कहा कि यह सिर्फ एक राज्य का नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा है.
अन्य राज्यों में भी आरोप
कांग्रेस ने असम, कर्नाटक, हरियाणा और महाराष्ट्र में भी चुनावी गड़बड़ियों के आरोप लगाए. पार्टी ने कहा कि यह एक “सिस्टमेटिक प्रयास” है, जिससे मताधिकार को कमजोर किया जा रहा है. खेड़ा ने चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि आयोग निष्पक्ष तरीके से काम नहीं कर रहा और ऐसी प्रक्रियाओं को बढ़ावा दे रहा है.
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