पश्चिम बंगाल चुनाव के बीच ममता बनर्जी की पार्टी TMC यानी तृणमूल कांग्रेस कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंची थी. TMC ने कोर्ट में कहा था कि राज्य के संवेदनशील बूथों पर CRPF यानी केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल को तैनात करने का फैसला गलत तरीके से और एकतरफा लिया गया है. लेकिन कोर्ट ने TMC की ये याचिका खारिज कर दी. जस्टिस कृष्णा राव ने कहा कि CRPF की तैनाती में कोई गलती नहीं है और चुनाव आयोग ने सही प्रक्रिया अपनाई है.
18 अप्रैल को पश्चिम बंगाल के अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने एक आदेश जारी किया. इसमें कहा गया कि अलग-अलग जगहों से मिली जानकारी के आधार पर संवेदनशील बूथों की एक लिस्ट तैयार की गई है और उन बूथों पर CRPF तैनात की जाएगी.
TMC ने कोर्ट में क्या कहा?
TMC ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी. पार्टी के वकील अनिर्बान रे ने कोर्ट में कई दलीलें दीं. पहली बात उन्होंने ये कही कि चुनाव से जुड़े मैनुअल यानी नियम पुस्तिका के मुताबिक संवेदनशील बूथों की पहचान चुनाव से कम से कम 6 महीने पहले होनी चाहिए. लेकिन ये आदेश तब आया जब चुनाव की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी थी.
दूसरी बात ये कही कि मैनुअल में 'संवेदनशील बूथ' जैसी कोई चीज नहीं है. मैनुअल में 'क्रिटिकल पोलिंग स्टेशन" का जिक्र है.
तीसरी बात ये कही कि आदेश में बूथों की लिस्ट का जिक्र था लेकिन वो लिस्ट आदेश के साथ लगाई ही नहीं गई.
यह भी पढ़ें: अब बंगाल का फाइनल राउंड... संदेशखाली से बांग्लादेश बॉर्डर तक ममता के गढ़ में BJP का असली इम्तिहान
चौथी बात ये कही कि CAPF यानी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल में कई शाखाएं हैं जैसे BSF, CISF, CRPF, ITBP वगैरह. लेकिन सिर्फ CRPF को ही क्यों चुना गया?
चुनाव आयोग ने कोर्ट में क्या जवाब दिया?
चुनाव आयोग की तरफ से वकील दामा शेषाद्री नायडू ने दलीलें दीं. उन्होंने पहले ये सवाल उठाया कि TMC की याचिका सुनने लायक भी है या नहीं क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 329(बी) के तहत चुनाव के दौरान कोर्ट को चुनावी मामलों में दखल देने से रोका गया है.
उन्होंने ये भी कहा कि CRPF, CAPF का ही एक हिस्सा है. हर बार सभी यूनिट को नहीं बुलाया जा सकता, एक यूनिट को तैनात किया जाता है और यहां CRPF को चुना गया.
उन्होंने ये भी कहा कि CRPF का किसी भी राजनीतिक पार्टी से कोई दुश्मनी नहीं है. ये देश के हर राज्य में चुनावों के दौरान तैनात होती है.
उन्होंने ये भी बताया कि जिला चुनाव अधिकारी, पुलिस अधिकारी और सेक्टर अधिकारियों की रिपोर्ट और मिली जानकारी के आधार पर ही CRPF तैनाती का आदेश दिया गया था. यानी सारी प्रक्रिया सही तरीके से हुई थी.
कोर्ट ने क्या फैसला किया?
जस्टिस कृष्णा राव ने दोनों पक्षों की बातें सुनने के बाद फैसला दिया. कोर्ट ने पहले ये तय किया कि TMC की याचिका सुनने लायक है. क्योंकि TMC ने चुनाव की प्रक्रिया को चुनौती नहीं दी, सिर्फ CRPF की तैनाती वाले प्रशासनिक आदेश को चुनौती दी. इसलिए संविधान का अनुच्छेद 329(बी) यहां लागू नहीं होता.
लेकिन मामले के असल मुद्दे पर कोर्ट ने TMC के खिलाफ फैसला दिया. कोर्ट ने कहा कि CRPF की तैनाती से पहले सभी जरूरी प्रक्रियाएं अपनाई गई थीं. जिला अधिकारियों और पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर ये फैसला लिया गया था. 2023 के चुनाव मैनुअल के नियमों का पालन किया गया. इसलिए 18 अप्रैल का आदेश गलत नहीं है और TMC की याचिका खारिज की जाती है.
यह भी पढ़ें: AAP में टूट के बीच बंगाल जाएंगे अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी के लिए करेंगे प्रचार
इस फैसले का मतलब क्या है?
इसका मतलब है कि पश्चिम बंगाल के संवेदनशील बूथों पर CRPF की तैनाती जारी रहेगी. TMC की ये कोशिश नाकाम रही कि CRPF को हटाया जाए या इस आदेश को रद्द किया जाए. चुनाव आयोग का फैसला बरकरार रहा.
तपस सेनगुप्ता