पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए सियासी पारा अपने चरम पर पहुंच गया है. मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने बुधवार को भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र से अपना नामांकन दाखिल कर दिया. इस बार भी भवानीपुर में राज्य का सबसे बड़ा और दिलचस्प मुकाबला देखने को मिलेगा, क्योंकि ममता बनर्जी के सामने एक बार फिर बीजेपी के नेता और नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी मैदान में हैं. शुभेंदु अधिकारी पहले ही 2 अप्रैल को गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में अपना नामांकन दाखिल कर चुके हैं.
नामांकन दाखिल करने के बाद भावुक होते हुए ममता बनर्जी कहा कि वह बचपन से यहीं रही हैं और उनके पास जो कुछ भी है, वह सब यहीं का दिया हुआ है. भवानीपुर के लोगों का आभार जताते हुए उन्होंने सभी तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवारों की जीत की कामना की और पूरा भरोसा जताया कि राज्य में एक बार फिर उनकी पार्टी की सरकार बनेगी.
ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी के बीच यह मुकाबला 2021 की यादें ताजा कर रहा है. पिछले चुनाव में नंदीग्राम सीट पर शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को करीब दो हजार वोटों के अंतर से शिकस्त दी थी. उस हार के बाद ममता बनर्जी ने भवानीपुर उपचुनाव जीतकर विधानसभा में अपनी जगह बनाई थी. इस बार शुभेंदु अधिकारी भवानीपुर और नंदीग्राम दोनों सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं और उन्होंने दावा किया है कि वह नंदीग्राम वाला नतीजा भवानीपुर में भी दोहराकर दिखाएंगे.
नामांकन के दौरान शुभेंदु अधिकारी के साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी नजर आए. अमित शाह ने वहां मौजूद भीड़ में जोश भरते हुए कहा कि इस बार किसी को डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि कोई भी गुंडा बंगाल के मतदाताओं को नहीं रोक पाएगा. उन्होंने लोगों से अपील की कि वे निडर होकर मतदान करें ताकि राज्य से तृणमूल कांग्रेस की सरकार को उखाड़ फेंका जा सके. वहीं दूसरी तरफ ममता बनर्जी ने चुनावी रैलियों में बीजेपी को बंगाल की संस्कृति के लिए बाहरी करार दिया है और उन पर बंगाली अस्मिता का अपमान करने का आरोप लगाया है.
नामांकन में साथ दिखे भाई बाबुन बनर्जी
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जब अपने घर से नामांकन के लिए निकलीं, तो हर साल की तरह इस बार भी उनके भाई बाबुन बनर्जी उनके साथ खड़े नजर आए. बाबुन बनर्जी ने आत्मविश्वास के साथ कहा कि दीदी की जीत पहले से ही तय है. उन्होंने जोर देकर कहा कि वक्त के साथ ममता के प्रति लोगों का प्यार और समर्थन कम होने के बजाय और ज्यादा बढ़ता जा रहा है, जो इस बार के चुनावी नतीजों में साफ दिखेगा.
नामांकन के दौरान सर्वे बिल्डिंग के बाहर भारी संख्या में महिला समर्थक जुटी थीं, जिनका उत्साह देखते ही बन रहा था. वहां मौजूद महिलाओं ने कहा कि ममता बनर्जी ने हमेशा उनके हक की लड़ाई लड़ी है. समर्थकों का मानना है कि 'लक्ष्मी भंडार' जैसी योजनाओं ने जमीन पर बड़ा बदलाव किया है और महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया है. महिलाओं के नारों और भारी भीड़ ने यह साफ कर दिया कि भवानीपुर की जंग में वे अपनी 'दीदी' के साथ मजबूती से खड़ी हैं.
भवानीपुर का सियासी समीकरण
इस सीट पर आबादी की गजब की विविधता देखने को मिलती है. यहां करीब 40 फीसदी बंगाली मतदाता हैं, तो वहीं 40 फीसदी आबादी गुजराती, मारवाड़ी, बिहारी और सिख समुदायों की है. इसके अलावा 20 फीसदी मुस्लिम मतदाता भी यहां हार-जीत तय करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं. यही वजह है कि इसे मिनी इंडिया भी कहा जाता है और यहां हर समुदाय को साधने की चुनौती बड़ी होती है.
इतिहास की बात करें तो भवानीपुर कभी कांग्रेस का मजबूत किला हुआ करता था. 1957 और 1962 में बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर राय यहीं से जीतकर विधानसभा पहुंचे थे. बीच में करीब 40-44 साल तक यह सीट अस्तित्व में नहीं थी, लेकिन 2008 के परिसीमन के बाद यह दोबारा बनी. दिलचस्प बात यह है कि दोबारा बनने के बाद से अब तक यहां हर चुनाव में टीएमसी (TMC) का ही झंडा बुलंद रहा है. अब देखना यह होगा कि क्या ममता बनर्जी अपने इस अभेद्य किले को बचाए रख पाती हैं या शुभेंदु अधिकारी यहां कोई बड़ा उलटफेर करने में कामयाब होते हैं.
इस चुनाव में जहां ममता बनर्जी अपनी लक्ष्मी भंडार योजना और अपने मेनिफेस्टो के 10 वादों के भरोसे जीत की उम्मीद लगाए हुए हैं, वहीं बीजेपी घुसपैठ और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर ममता सरकार को घेर रही है. लक्ष्मी भंडार योजना के तहत टीएमसी महिलाओं और बेरोजगार युवाओं को आर्थिक मदद का वादा कर रही है. पश्चिम बंगाल की 294 सीटों के लिए दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे, जबकि जीत-हार का फैसला 4 मई को मतगणना के बाद होगा.
तपस सेनगुप्ता / इंद्रजीत कुंडू