मुलायम के फॉर्मूले से पश्चिमी यूपी जीतने निकले अखिलेश, इस 'तिकड़ी' से बड़ी उम्मीदें

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में अभी एक साल का समय बाकी है, लेकिन सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मिशन-2027 का आगाज कर दिया है. दादरी की रैली से अखिलेश यादव पश्चिमी यूपी को साधना चाहते हैं, जिसके लिए अपने पिता की तरह ही गुर्जर नेताओं की तिकड़ी बनाई है.

Advertisement
अखिलेश यादव ने दादरी रैली से भरी 2027 की चुनावी हुंकार (Photo-SP) अखिलेश यादव ने दादरी रैली से भरी 2027 की चुनावी हुंकार (Photo-SP)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 30 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 12:21 PM IST

उत्तर प्रदेश पर विधानसभा चुनाव का रंग चढ़ चुका है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने ग्रेटर नोएडा के दादरी में 'समाजवादी समानता भाईचारा रैली' कर मिशन-2027 का आगाज कर दिया है. बीजेपी के मजबूत दुर्ग माने जाने वाले पश्चिमी यूपी में 'शक्ति प्रदर्शन' के जरिए अखिलेश ने सियासी माहौल को गरमा दिया है. 

अखिलेश यादव ने 2027 के चुनाव के लिए दादरी को अपनी सियासी लांचिंग पैड बनाया, जहां रविवार को बड़ी संख्या में लोग एकजुट हुए थे. बुलंदशहर से लेकर अलीगढ़, गाजियाबाद, हापुड़, खुर्जा  से बड़ी संख्या में लोग दादरी पहुंचे थे, खासकर गुर्जर समुदाय के लोगों की भागीदार ने दादरी के मिहिर भोज कॉलेज को पूरी तरह सपा के रंग में रंग दिया. 

Advertisement

पश्चिमी यूपी के सियासी जंग को फतह करने के लिए अखिलेश यादव एक नए समीकरण पर काम कर रहे हैं, जिसके लिए उन्होंने गुर्जर समुदाय को सपा के साथ जोड़ने का प्लान बनाया. इसीलिए दादरी की रैली को कराने से लेकर सियासी माहौल तक बनाने में गुर्जर समाज का मुख्य रोल रहा. सपा ने इस  रैली के जरिए गुर्जर समाज के तीन नेताओं की एक तिकड़ी बनाई है, जिनके सहारे बीजेपी को मात देने की स्टैटेजी मानी जा रही. 

अखिलेश ने पश्चिमी यूपी से भरी चुनावी हु्ंकार
अखिलेश यादव ने दादरी की रैली से अपने चुनावी अभियान का आगाज कर दिया है. सत्ता के बदलाव की आहट बताते हुए उन्होंने लोगों से 2026 चुनाव के लिए एकजुट होने की अपील की. लंबे समय बाद जिले में हुई इस बड़ी जनसभा ने न केवल सपा का शक्ति प्रदर्शन किया, बल्कि यह भी संकेत दिया कि पार्टी पश्चिमी यूपी में अपनी जड़ें मजबूती से जमा रही है. 

Advertisement

सपा प्रमुख ने कहा कि 2027 में हमारी सरकार बनवाइए, हम राजधानी लखनऊ में पीडीए के महापुरुषों के योगदान को जीवंत करने के लिए रिवर फ्रंट पर उनकी प्रतिमाएं स्थापित करेंगे. अखिलेश ने कहा कि PDA के लोग जानते और महसूस करते हैं कि उनके साथ भेदभाव और तिरस्कार होता है.

यही नहीं उनका सम्मान समय-समय पर छीना जाता है. हमें परिवर्तन लाना है, चाहे इसके लिए साल लगे या सदी, हम पीछे नहीं हटेंगे. इस बहाने उन्होंने मिहिर भोज की प्रतिमा को लखनऊ में स्थापित करने का ऐलान करके गुर्जर समुदाय को साधने का बड़ा दांव चला. 

पश्चिमी यूपी में अखिलेश यादव की तिकड़ी 
पीएम मोदी और सीएम योगी का नाम लिए बिना अखिलेश यादव ने कहा कि कल कुछ लोग नोएडा आए थे, जो बोलते हुए चले गए कि 'हम नोएडा नहीं आते'. मैं इस मंच से दोनों को बता दूं कि जितनी चाय उन्होंने मिलकर नहीं पी होगी, उससे कहीं ज्यादा बार मैं नोएडा जिले में अपने कार्यकर्ताओं के घर पीने का काम किया हूं. 

गुर्जर समुदाय से आने वाले राजकुमार भाटी दादरी रैली के संयोजक रहे तो सांसद धर्मेंद्र यादव, हरेद्र मलिक, इकरा हसन और विधायक अतुल प्रधान सहित कई दिग्गज नेता मौजूद रहे. इसके अलावा नसीमुद्दीन सिद्दीकी भी मंच पर नजर आए, जो अभी हाल में सपा में आए हैं. इतना ही नहीं अखिलेश यादव ने रैली के बाद मायावती के गांव जाकर चाय पिया और सियासी संदेश देते नजर आए. 

Advertisement

अखिलेश ने पीडीए का नया फॉर्मूला बनाया
अखिलेश यादव ने कहा कि पीडीए की शक्ति से ही प्रदेश की राजनीति का रुख बदला जा सकता है. आह्वान किया कि वे गांवों-मोहल्लों में जाकर लोगों को संगठित करें और समाजवादी सिद्धांतों को मजबूत बनाएं. अखिलेश यादव ने कहा कि पीडीए यानी पिछड़े,दलित और अल्पसंख्यक एक साथ होकर देश-प्रदेश की करीब 95 प्रतिशत जनसंख्या बनाते हैं, लेकिन सत्ता में उनका प्रतिनिधित्व नाकाफी है. उन्होंने जोर देकर कहा कि समाजवादी पार्टी इसी भेदभाव को समाप्त करने के लिए लड़ाई लड़ रही है.

मुलायम के नक्शेकदम पर चले अखिलेश

मुलायम सिंह यादव के दौर में लंबे समय तक सपा की कमान यूपी में गुर्जर समुदाय से आने वाले रामशरण दास के हाथों में रही. रामशरण दास के निधन के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश से रामसकल गुर्जर, नरेंद्र भाटी, वीरेंद्र सिंह जैसे नेता को साथ रखा. इस तरह से सपा ने पश्चिम यूपी में मुस्लिम और गुर्जर समीकरण के जरिए अपनी मजबूत ताकत बनाए रखी थी, जिस पैटर्न पर अब अखिलेश यादव भी गुर्जर-मुस्लिम समीकरण बनाना चाहते हैं.

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पश्चिमी यूपी में उनकी कोशिश गुर्जर वोटों को जोड़ने की है, जिसके लिए ही गुर्जर समाज के तीन बड़े नेताओं को फ्रंटफुट पर रख रहे हैं. विधायक अतुल प्रधान, राजकुमार भाटी, मुखिया गुर्जर और सांसद इकरा हसन को सपा ने गुर्जर चेहरे के तौर पर आगे बढ़ाकर बीजेपी के गढ़ में सेंदमारी करना चाहती है.

Advertisement

राजकुमार भाटी सपा के प्रवक्ता हैं, जो मीडिया में पार्टी की बात को जोर दरार तरीके से रखते हैं. भाटी को गुर्जर चेहरे के तौर पर आगे बढ़ाना का काम कर रहे हैं, जो 2027 में खुद चुनाव लड़ने से बजाय पार्टी के लिए प्रचार करने का काम करेंगे.गुर्जरों को जोड़ने का बीढ़ा, उन्हीं के कंधों पर है. अखिलेश ने मंच से भी उनके नाम का ऐलान कर बता दिया है कि उनकी सियासी हैसियत सपा में कितनी है. 

गुर्जर समाज से आने वाले अतुल प्रधान मेरठ की सरधना से विधायक हैं. अखिलेश यादव के करीबी नेता माने जाते हैं और पार्टी उन्हें गुर्जर चेहरे के तौर पर आगे बढ़ा रही है. इकरा हसन मुस्लिम गुर्जर हैं और पश्चिमी यूपी के कैराना से सांसद हैं तो उनके भाई नाहिद हसन विधायक हैं. इकरा हसन के जरिए गुर्जर और मुस्लिम दोनों को साधने की स्टैटेजी मानी जा रही है. इकरा हसन ने दादरी की रैली में साफ शब्दों में कहा कि उनकी जीत में मुस्लिमों से ज्यादा हिंदू वोटरों का रोल रहा है. 

बीजेपी के वोटों में क्या लगा पाएंगी सपा सेंध
पश्चिम यूपी में सपा का कोर वोटबैंक सिर्फ मुस्लिम समुदाय है और इस पूरे इलाके में यादव वोटर न के बराबर हैं. 2022 में जयंत चौधरी का साथ लेकर बीजेपी को टक्कर दी थी, लेकिन अब जयंत बीजेपी के पाले में खड़े हैं.ऐसे में अखिलेश इस बात को समझ रहे हैं कि सिर्फ मुसलमानों के सहारे बीजेपी-आरएलडी गठबंधन को मात नहीं दिया जा सकता है. 

Advertisement

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पश्चिम यूपी के सियासी मिजाज को देखते हुए मुस्लिमों के साथ नए जातीय समीकरण की कवायद में जुट गए हैं. मुस्लिम के साथ गुर्जर समाज का समीकरण बनाने की कवायद में है ताकि पश्चिमी यूपी में 'आत्मनिर्भर' बन सके. पश्चिम यूपी में गुर्जर समाज की खासी संख्या है, जो किसी भी दल का खेल बनाने और बिगाड़ने की ताकत रखते हैं. 

गाजियाबाद, नोएडा, बिजनौर, संभल, मेरठ, सहारनपुर, कैराना जिले की करीब दो दर्जन सीटों पर गुर्जर समुदाय निर्णायक भूमिका में है, जहां 20 से 70 हजार के करीब इनका वोट है.यही नहीं नोएडा और गाजियाबाद बीजेपी के गढ़ हैं. ऐसे में भाजपा के गढ़ से शुरुआत कर अखिलेश ने भाजपा के वोटबैंक में सेंध लगाना है और पीडीए के एजेंडे को मजबूत करने का दांव चला है. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement