BJP संग 1000cr की 'डील' या AI वीडियो? 14 दिनों में ही टूटी ओवैसी-हुमायूं कबीर की जोड़ी

असद्दुीन ओवैसी की AIMIM ने हुमायूं कबीर की AJUP पार्टी से गठबंधन तोड़ दिया है. यह फैसला टीएमसी द्वारा जारी एक विवादित स्टिंग वीडियो के बाद आया है, जिसमें कबीर के कथित विवादित बयान और बीजेपी से संबंध दिखाए गए हैं.

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असदुद्दीन ओवैसी और हुमायूं कबीर का गठबंधन टूट गया है असदुद्दीन ओवैसी और हुमायूं कबीर का गठबंधन टूट गया है

अनुपम मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 10 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 4:56 PM IST

असद्दुीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी के साथ अपना गठबंधन तोड़ दिया है. यह फैसला तब आया जब सत्तारूढ़ टीएमसी ने एक कथित स्टिंग वीडियो जारी किया, जिसमें कबीर को पश्चिम बंगाल के मुसलमानों के बारे में विवादित बयान देते और बीजेपी से ‘संबंध’ होने का दावा करते हुए दिखाया गया है.

हुमायूं कबीर को टीएमसी ने किया था निलंबित
हुमायूं कबीर को पिछले साल के अंत में टीएमसी से निलंबित कर दिया गया था और उन्होंने बाद में अपनी पार्टी AJUP बनाई. हुमायूं कबीर ने इस वीडियो को 'एआई-जनरेटेड' बताते हुए खारिज कर दिया. गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में टीएमसी ने यह भी आरोप लगाया कि पीएमओ का मकसद सिर्फ सीएम ममता बनर्जी को हराना है.

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टीएमसी की ओर से शेयर किए गए वीडियो में कथित तौर पर कबीर यह कहते हुए सुनाई देते हैं कि वे पीएमओ के संपर्क में थे और उन्हें बीजेपी शासित राज्यों के नेताओं के साथ तालमेल बनाने की सलाह दी गई थी. इनमें विपक्ष के नेता शुवेंदु अधिकारी और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा शामिल हैं.

वीडियो में कथित तौर पर कबीर के ऐसे बयान भी शामिल हैं, जिनमें कहा गया है कि 'मुसलमानों को बेवकूफ बनाना आसान है' और बाबरी मस्जिद मुद्दे का जिक्र किया गया है, साथ ही 200 करोड़ रुपये की अग्रिम फंडिंग की मांग भी दिखाई गई है.

क्लिप में यह भी कथित तौर पर दिखाया गया है कि कबीर अल्पसंख्यक वोटों को टीएमसी से दूर करने की रणनीति बता रहे हैं, जिससे चुनावी रूप से बीजेपी को फायदा हो सकता है. साथ ही वे 1000 करोड़ रुपये की योजना का जिक्र करते हुए कहते सुनाई देते हैं कि 200 करोड़ रुपये पहले ही एडवांस के रूप में मिल चुके हैं.

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टीएमसी ने की है वीडियो के जांच की मांग
टीएमसी ने इस वीडियो में सामने आए दावों की जांच के लिए ईडी से जांच की मांग की है. हालांकि, कबीर ने टीएमसी लीडरशिप पर उनके खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया और कहा कि वे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करेंगे. आजतक इस वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है. 

आरोपों को खारिज करते हुए हुमायूं कबीर ने कहा कि नवंबर 2019 के बाद से उनका किसी भी बीजेपी नेता से कोई संपर्क नहीं है. उन्होंने कहा,'अगर उनके पास कोई सबूत है, कोई फोटो है, तो दिखाएं.' उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और हिमंत बिस्वा सरमा का नाम लिया.

उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और पार्टी नेताओं कुनाल घोष तथा फिरहाद हाकिम पर “फर्जी” स्टिंग ऑपरेशन कराने का आरोप लगाया. कबीर ने कहा, “वे मुझसे राजनीतिक रूप से नहीं लड़ सकते, इसलिए एआई का इस्तेमाल कर मेरी छवि खराब कर रहे हैं. मैं उनके खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज करूंगा.”

उन्होंने मुस्लिम समुदाय से भी अपील की कि वे इन दावों से गुमराह न हों. उन्होंने कहा, “यह टीएमसी की साजिश है, जो मुस्लिम वोट खोने के डर से मुझे बदनाम करना चाहती है. इस फर्जी वीडियो के जरिए मुसलमानों की भावनाओं का भी अपमान किया गया है.”

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AIMIM ने तोड़ा गठबंधन

इस विवाद का तत्काल राजनीतिक असर पड़ा. असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM ने वीडियो सामने आने के बाद कबीर की पार्टी से गठबंधन खत्म करने का ऐलान कर दिया. पार्टी ने बयान में कहा कि वह ऐसे बयानों से खुद को नहीं जोड़ सकती जो मुसलमानों की गरिमा पर सवाल उठाते हों, और अब वह पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ेगी.

AIMIM ने कहा, “हुमायूं कबीर के खुलासों से यह दिखता है कि बंगाल के मुसलमान कितने असुरक्षित हैं. AIMIM किसी भी ऐसे बयान के साथ नहीं खड़ी हो सकती, जिसमें मुसलमानों की ईमानदारी पर सवाल उठाया जाए.” पार्टी ने आगे कहा, “हमारा उद्देश्य हाशिए पर मौजूद समुदायों को स्वतंत्र राजनीतिक आवाज देना है. हम बंगाल चुनाव अकेले लड़ेंगे और आगे किसी भी पार्टी से गठबंधन नहीं करेंगे.”

यह घटनाक्रम कुछ ही हफ्तों बाद सामने आया है, जब ओवैसी ने राज्य चुनावों के लिए कबीर की AJUP के साथ गठबंधन की घोषणा की थी. गौरतलब है कि कबीर को पिछले साल टीएमसी से उस समय निष्कासित कर दिया गया था, जब उन्होंने मुर्शिदाबाद जिले में बाबरी मस्जिद के मॉडल पर मस्जिद बनाने का वादा किया था. 294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा के चुनाव 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को दो चरणों में होंगे, जबकि मतगणना 4 मई को होगी.

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