हैलाकांडी एक सामान्य (अनारक्षित) विधानसभा क्षेत्र है और करीमगंज लोकसभा क्षेत्र के छह हिस्सों में से एक है. हैलाकांडी कस्बा इस विधानसभा क्षेत्र का शहरी केंद्र है और असम की बराक घाटी में स्थित हैलाकांडी जिले का मुख्यालय भी है. 2023 में हुए परिसीमन के बाद, इस विधानसभा क्षेत्र का पुनर्गठन किया गया और इसकी सीमाओं में काफी बदलाव किए गए. मौजूदा
हैलाकांडी विधानसभा क्षेत्र में 2023 से पहले वाले हैलाकांडी क्षेत्र के मुख्य हिस्से शामिल हैं, लेकिन मौजूदा क्षेत्र का ज्यादातर हिस्सा इसके अब खत्म हो चुके पड़ोसी विधानसभा क्षेत्र कटलीचेरा से लिया गया है.
हैलाकांडी और कटलीचेरा, दोनों विधानसभा क्षेत्रों की स्थापना 1951 में हुई थी और 1951 से शुरू होकर, इन दोनों क्षेत्रों में 15 विधानसभा चुनाव हुए हैं। कांग्रेस ने दोनों क्षेत्रों में सबसे ज्यादा बार जीत हासिल की है, हैलाकांडी में सात बार और कटलीचेरा में 12 बार. हालांकि, हाल के चुनावों में AIUDF ने अच्छा प्रदर्शन किया है, उसने हैलाकांडी में 2006 और 2016 में, और कटलीचेरा में 2016 और 2021 में जीत हासिल की. हैलाकांडी में सबसे हालिया चुनाव (2021) AGP ने जीता था. पिछले चुनावों में BJP दोनों क्षेत्रों में मुकाबले में बनी रही है, लेकिन हैलाकांडी में वह सिर्फ एक बार (1991 में) जीत पाई, जबकि कटलीचेरा में उसे कभी जीत नहीं मिली. हालांकि 2011 से पहले दोनों क्षेत्रों में कांग्रेस का दबदबा था, लेकिन हाल के चुनावों में उसका प्रदर्शन बहुत निराशाजनक रहा है.
लोकसभा चुनावों के दौरान हैलाकांडी और कटलीचेरा विधानसभा क्षेत्रों में वोटिंग के पैटर्न से किसी एक पार्टी के दबदबे का कोई साफ संकेत नहीं मिलता. 2009 में, दोनों क्षेत्रों में कांग्रेस ने AIUDF पर बढ़त बनाई थी और BJP तीसरे स्थान पर रही थी, लेकिन 2014 में, AIUDF ने BJP पर बढ़त बनाई और कांग्रेस तीसरे स्थान पर रही. 2021 में, हैलाकांडी में AIUDF ने BJP पर काफी बड़ी बढ़त बनाई थी और कांग्रेस इन दोनों से काफी पीछे थी. वहीं कटलीचेरा में BJP ने AIUDF पर मामूली बढ़त बनाई थी और कांग्रेस एक बार फिर इन दोनों से काफी पीछे थी. हालांकि, 2024 के संसदीय चुनावों में, BJP ने संयुक्त क्षेत्रों में कांग्रेस के मुकाबले 54,527 वोटों के शानदार अंतर से बढ़त बनाई, और मजबूत आंकड़े हासिल किए, जबकि AIUDF काफी पीछे रह गई.
पिछले क्षेत्र (हैलाकांडी और कटलीचेरा) बराक घाटी के मिश्रित, लेकिन मुस्लिम-प्रभावित इलाकों का हिस्सा थे, जिनका ग्रामीण स्वरूप काफी ज्यादा था. 2026 के विधानसभा चुनावों के लिए हैलाकांडी सीट की अंतिम मतदाता सूची में 221,624 योग्य मतदाता थे. SIR 2025 के बाद मतदाताओं की संख्या में 7,543 की बढ़ोतरी देखी गई, जो 2024 में 214,081 थी. 2024 में मतदाताओं की भागीदारी (वोटर टर्नआउट) काफी ज्यादा, यानी 81.79 प्रतिशत रही.
उपलब्ध आंकड़ों (जो ज्यादातर 2011 की जनगणना के अनुपातों पर आधारित हैं और क्षेत्र तथा परिसीमन में हुए बदलावों के हिसाब से समायोजित किए गए हैं) के आधार पर जनसांख्यिकी से पता चलता है कि मतदाताओं की बनावट में बदलाव आया है. 2023 के परिसीमन से पहले, मुस्लिम मतदाताओं का सबसे बड़ा समूह था, पिछली हैलाकांडी विधानसभा सीट में 55 प्रतिशत से ज्यादा और कटलीचेरा विधानसभा सीट में 50 प्रतिशत से ज्यादा मतदाता मुस्लिम थे. वहीं अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों की आबादी काफी कम थी. अपने पिछले स्वरूप में हैलाकांडी विधानसभा सीट मुख्य रूप से ग्रामीण थी. इसके 95.37 प्रतिशत मतदाता ग्रामीण इलाकों में रहते थे, जबकि 4.63 प्रतिशत मतदाता हैलाकांडी शहर की सीमा के भीतर रहते थे. कटलीचेरा विधानसभा सीट भी मुख्य रूप से ग्रामीण थी. इसके 95.56 प्रतिशत मतदाता गांवों में रहते थे, जबकि 4.44 प्रतिशत मतदाता शहरी इलाकों में रहते थे. हैलाकांडी की मौजूदा विधानसभा सीट में असमिया बोलने वाले हिंदू, मुस्लिम, चाय बागान समुदायों (आदिवासियों) और स्थानीय समूहों का मिला-जुला स्वरूप देखने को मिलता है, जो यहां के विविध ग्रामीण मतदाताओं की पहचान है. ऐसा लगता है कि परिसीमन ने इस संतुलन को बदल दिया है. अब यहां हिंदुओं की मौजूदगी ज्यादा मजबूत दिखाई देती है, और चुनाव मैदान में कोई भी प्रमुख मुस्लिम उम्मीदवार नजर नहीं आता.
हैलाकांडी विधानसभा सीट बराक घाटी में स्थित हैलाकांडी जिले के कुछ हिस्सों को कवर करती है. इस क्षेत्र में बराक नदी के किनारे समतल जलोढ़ मैदान हैं, साथ ही यहां आर्द्रभूमि, 'बील' (झीलें) और हल्की-फुल्की ऊबड़-खाबड़ जमीन भी देखने को मिलती है. यहां की जमीन धान की खेती, चाय की खेती और वेटलैंड्स (नम-भूमि) में मछली पकड़ने के काम के लिए उपयुक्त है, लेकिन यहां बराक नदी और उसकी सहायक नदियों से होने वाली मौसमी बाढ़ का खतरा बना रहता है. हैलाकांडी में लोगों की आजीविका मुख्य रूप से धान की खेती, चाय के बागानों, छोटे-मोटे व्यापार, खेती से जुड़े कामों और पर्यटन से जुड़ी कुछ सेवाओं पर निर्भर है. यहां की उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी और भरपूर बारिश इन गतिविधियों को बनाए रखने में मदद करती है.
बुनियादी ढांचे में नेशनल हाईवे 6 के जरिए सड़क संपर्क शामिल है, साथ ही हैलाकांडी-फुलेरतोल सड़क भी है, जिसे बेहतर बनाया जा रहा है और जो हैलाकांडी शहर को पास के फुलेरतोल इलाके से जोड़ती है. इसके अलावा एक नई सड़क भी बन रही है, जिससे हैलाकांडी और आस-पास के गांवों के बीच संपर्क बेहतर होगा. रेल सुविधा हैलाकांडी रेलवे स्टेशन पर उपलब्ध है, जो हैलाकांडी शहर से लगभग 2-5 किमी दूर है, और सिलचर रेलवे स्टेशन पर भी, जो दक्षिण की ओर लगभग 25-40 किमी दूर है. बुनियादी सुविधाओं में ग्रामीण सड़कों का चल रहा विकास और बराक नदी तथा उसकी सहायक नदियों से चलने वाली मानक छोटी सिंचाई योजनाएं शामिल हैं, जबकि इको-टूरिज्म (पर्यावरण-पर्यटन) की सुविधाएं स्थानीय 'बील' (झील) और सांस्कृतिक स्थलों के आस-पास की बुनियादी सेवाओं तक ही सीमित हैं.
आस-पास के शहरों में दक्षिण की ओर सिलचर है, जो लगभग 30-40 km दूर है. राज्य की राजधानी दिसपुर, लगभग 300 km उत्तर में स्थित है. इस निर्वाचन क्षेत्र का कुछ हिस्सा बांग्लादेश की सीमा के बहुत करीब है, जो महज 27.3 km दूर है. स्थानीय कनेक्टिविटी मुख्य रूप से बसों, ऑटो और निजी वाहनों के जरिए सड़क परिवहन से होती है, जिसे जिले के रेल लिंक से भी मदद मिलती है.
हैलाकांडी की एक समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत है जो बराक घाटी से जुड़ी है, इसमें असमिया और बंगाली परंपराओं का मेल, प्राचीन मंदिर और औपनिवेशिक काल से चले आ रहे चाय बागानों की विरासत शामिल है. यहां स्थानीय बाजार, सामुदायिक उत्सव और आज के समय में आधुनिक कृषि और छोटे उद्योगों की ओर बढ़ता रुझान देखने को मिलता है.
इस क्षेत्र में हाल के चुनावों में कांग्रेस कमजोर रही और BJP लगातार मजबूत होती गई. AIUDF पहले एक अहम ताकत हुआ करती थी, लेकिन 2024 के चुनाव से पता चलता है कि परिसीमन (सीमाओं में बदलाव) ने AIUDF की ताकत को कम कर दिया है. हैलाकांडी निर्वाचन क्षेत्र में 12 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें सात निर्दलीय उम्मीदवार शामिल हैं. BJP ने मिलन दास को अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि राहुल रॉय कांग्रेस के उम्मीदवार हैं. सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया (कम्युनिस्ट) ने मयूख भट्टाचार्य को अपना उम्मीदवार बनाया है. नौ निर्दलीय उम्मीदवारों में अजीत नूनिया, गौतम कांति दास, गौतम नाथ, जीबन रॉय, टिंकू भूषण नाथ, ध्रुबो चक्रवर्ती, बिनोद री, विशाल सिंघा मालाकार और सुभाष गून शामिल हैं. किसी भी जाने-माने मुस्लिम उम्मीदवार की पूरी तरह से गैर-मौजूदगी से पता चलता है कि हैलाकांडी में मतदाताओं की बनावट में जबरदस्त बदलाव आया है, और अब यह एक हिंदू-बहुल निर्वाचन क्षेत्र बन गया है. यह बात, और साथ ही 2024 के लोकसभा चुनाव का वोटिंग पैटर्न, जिसमें BJP ने बड़े अंतर से बढ़त बनाई थी. उसे अपने विरोधियों, खासकर कांग्रेस पार्टी से आगे रखती है. 2026 के विधानसभा चुनावों में हैलाकांडी सीट हारने के लिए BJP को शायद अपने ही अति-आत्मविश्वास और लापरवाही के कारण 'सेल्फ-गोल' करना पड़ेगा.
(अजय झा)