स्टीफन हॉकिन्स ने की ये बड़ी रिसर्च, दुनिया खत्म होने की बताई ये वजह

जानें एक ऐसे वैज्ञानिक के बारे में जिनका दिमाग को छोड़कर शरीर का कोई भी भाग काम नहीं करता.

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Stephen Hawking Stephen Hawking

अनुज कुमार शुक्ला

  • नई दिल्ली,
  • 08 जनवरी 2018,
  • अपडेटेड 10:16 AM IST

मशहूर वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिन्स आधुनिक विज्ञान की दुनिया में अपने ज्ञान और शोध के कारण एक अलग पहचान रखते हैं. आज उनका जन्मदिन हैं.

जानें उनके बारे में..

- उनका जन्म 8 जनवरी 1942 में यूनाइटेड किंगडम में हुआ था.

- वे अपनी शारीरिक अक्षमता के बावजूद आज विश्व के सबसे बड़े वैज्ञानिक हैं. उन्हें एमयोट्रॉफिक लैटरल सेलेरोसिस (amyotrophic lateral sclerosis) नाम की बीमारी है. इस बीमारी में मनुष्य का नर्वस सिस्टम धीरे-धीरे खत्म हो जाता है और शरीर के मूवमेंट करने और कम्यूनिकेशन पावर समाप्त हो जाती है. हॉकिन्स के दिमाग को छोड़कर उनके शरीर का कोई भी भाग काम नहीं करता है.

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- हॉकिन्स ने एक बताया कि उनकी बीमारी ने उन्हें वैज्ञानिक बनाने में सबसे बड़ी भूमिका अदा की है. बीमारी से पहले वे अपनी पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान नहीं देते थे लेकिन बीमारी के दौरान उन्हें लगने लगा कि वे अब जिंदा नहीं रहने जा रहे हैं, जिसके बाद उन्होंने अपना सारा ध्यान रिसर्च पर लगा दिया. हॉकिन्स ने ब्लैक हॉल्स पर रिसर्च किया है.

- 1974 में ब्लैक हॉल्स पर असाधारण रिसर्च करके उसकी थ्योरी मोड़ देने के कारण वे साइंस की दुनिया के सेलेब्रेटी बन गए. हॉकिन्स ने अपने रिसर्च के माध्यम से यह कहा है कि ईश्वर ने यह दुनिया नहीं रची है बल्कि यह तो भौतिक विज्ञान के नियमों का नतीजा है. स्टीफन अपनी किताब 'ग्रांड डिजाइन' में कहा कि गुरुत्वाकर्षण जैसे कई नियम हैं और ब्राह्मांड कुछ नहीं से भी खुद को बना सकता है. ब्रह्मांड एक स्फूर्त सृजन का नतीजा है.

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- हॉकिन्स ने अनुमान लगाया है कि ग्लोबल वार्मिंग और नए वायरसों के कारण संपूर्ण मानवता नष्ट हो सकती है.

- बता दें, ब्रिटेन के स्टीफन हॉकिंग की पीएचडी थीसिस को लाखों बार देखा गया है. ऑनलाइन जारी होने के बाद इस थीसीस को काफी लोग सर्च कर रहे हैं. हॉकिंग ने इस पर साल 1966 में काम किया था और इसे कैंब्रिज यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर पिछले ही हफ्ते जारी किया गया था.

- बीबीसी न्यूज के अनुसार पीएचडी थीसिस को बीस लाख बार देश के हर कोने से 8,00,000 ब्राउजरों से देखा गया है.

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