Tamilnadu Election Result: क्या नई सरकार खत्म करा पाएगी 'NEET'? समझिए क्यों है कंट्रोवर्सी

अब आज चुनावी नतीजों का द‍िन है. इस चुनाव में नीट (NEET) का मुद्दा सबसे अहम रहा है. चुनाव के नतीजे तय करेंगे कि नई सरकार केंद्र पर कितना दबाव बनाएगी और सुप्रीम कोर्ट में इस केस की पैरवी किस आक्रामकता से की जाएगी.

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DMK का मुख्य मुद्दा NEET ban है (Photo: PTI, representative image) DMK का मुख्य मुद्दा NEET ban है (Photo: PTI, representative image)

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली ,
  • 04 मई 2026,
  • अपडेटेड 9:02 AM IST

तमिलनाडु की सत्ता की चाबी किसके पास जाएगी, इसका फैसला आज हो रहा है. लेकिन इस चुनाव में सबसे बड़ा 'इमोशनल कार्ड' नीट परीक्षा रही है. राज्य की क्षेत्रीय पार्टियों ने अपने घोषणापत्र में नीट से मुक्ति दिलाने का वादा किया है. मगर सवाल यह है कि क्या चुनावी जीत मात्र से नीट खत्म हो जाएगा?

क्या है कंट्रोवर्सी? 
तमिलनाडु का तर्क है कि नीट परीक्षा सामाजिक न्याय के खिलाफ है. वरिष्ठ अधिवक्ताओं और राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार सिलेबस का अंतर बहुत बड़ा है. नीट पूरी तरह CBSE पैटर्न पर है, जिससे तमिलनाडु स्टेट बोर्ड (TNSBSE) के छात्र पिछड़ रहे हैं.

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सीटों का गणित भी इसमें बड़ा मुद्दा है. नीट लागू होने से पहले स्टेट बोर्ड के छात्रों के पास 70% सीटें थीं, जो अब गिरकर 47% से भी कम रह गई हैं. यही नहीं इससे कोचिंग का व्यापार बढ़ रहा है. नीट की तैयारी के लिए सालाना 1 से 5 लाख रुपये तक की कोचिंग फीस गरीब और ग्रामीण छात्रों के सपनों के आगे दीवार बन गई है.

कानूनी लड़ाई कहां तक पहुंची?

फिलहाल यह मामला देश की सबसे बड़ी अदालत, सुप्रीम कोर्ट में है. तमिलनाडु सरकार ने 15 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट में राष्ट्रपति के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उन्होंने राज्य के 'एंटी-नीट बिल' को मंजूरी देने से इनकार कर दिया था. राज्य सरकार का तर्क है कि राष्ट्रपति द्वारा बिना ठोस कारण बिल ठुकराना 'संवैधानिक गतिरोध' पैदा करता है.

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फिलहाल राज्य में सरकारी स्कूल के छात्रों के लिए 7.5% का क्षैतिज आरक्षण लागू है, ताकि ग्रामीण बच्चों को मेडिकल सीटों में हिस्सा मिल सके.

क्या नई सरकार नीट खत्म करा पाएगी?
चुनावी नतीजों के बाद 'नई सरकार' के सामने दो रास्ते होंगे. इसमें पहला रास्ता सुप्रीम कोर्ट में चल रहे केस (Original Suit 2025) की आक्रामक पैरवी करना. वहीं दूसरा रास्ता केंद्र सरकार के साथ मिलकर 'समवर्ती सूची' के नियमों के तहत विशेष छूट  के लिए राजनीतिक दबाव बनाना होगा.

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