Advertisement

एजुकेशन

क्या आपने पढ़ी है ट्रकों के पीछे हिंदी में लिखी ये शायरी....

प्रियंका शर्मा
  • 14 सितंबर 2018,
  • अपडेटेड 3:58 PM IST
  • 1/8

भारतीयों के लिए हिन्दी भाषा मन की भाषा है. जब उन्हें कुछ मजेदार लिखना हो या पढ़ना हो तो वह हिन्दी भाषा को ही पसंद करते हैं. इसी मौके पर हम आपके लिए ट्रक ड्राइवर के ट्रक के पीछे हिन्दी में लिखी उन शायरी की सूची लेकर आएं हैं जिन्हें पढ़कर आप खुशी से लोटपोट हो जाएंगे...

  • 2/8

हमसे अच्‍छा कौन है?
'ये नीम का पेड़ चन्‍दन से कम नहीं, हमारा लखनऊ लन्‍दन से कम नहीं', ये बात तो वही कह सकता है जिसे अपने लखनवी होने पर नाज हो.

  • 3/8

मजाकिया अंदाज
'सब्‍जी के सनम' कहकर इन्‍होंने जता दिया है कि इनका अंदाज तो मजाकिया है.

Advertisement
  • 4/8

हम में है वो बात
'दम है तो क्रॉस कर नहीं तो बरदास्‍त कर' पढ़कर तो लगता है कि ये महाशय अपने आगे किसी को कुछ नहीं समझते.

  • 5/8

रोमांटिक
'आती क्‍या खंडाला' और 'साथ मत छोड़ो साहिबा' से तो यही समझ आता है कि ये रोमांस पसंद आदमी है.

  • 6/8

पसंद-नापसंद
किसी राजनीतिक पार्टी को ट्रक मालिक पसंद करता है और किसे नहीं, ये वो इस अंदाज में कहने में यकीं रखता है.

Advertisement
  • 7/8

शायराना अंदाज
पढ़कर समझ आता है कि इसे तो शायरी पसंद आदमी ने ही लिखवाया होगा. 'जरा कम पी मेरी रानी बहुत महंगा है ईराक का पानी.'

  • 8/8

रौबदार
इस लाइन को पढ़कर तो यही लगता है कि ट्रक मालिक रौब जमाना चाहता है. तभी तो उसने लिखवाया, 'हमारी चलती है. लोगों की जलती है.

Advertisement

लेटेस्ट फोटो

Advertisement