बिना खाए-पिए कैसे बचेगी जान? US फाइटर जेट F35 पायलट ट्रेनिंग क्या आएगी ईरान के खिलाफ काम ?

F-35 फाइटर जेट, दुनिया के सबसे एडवांस्ड स्टील्थ मल्टी-रोल विमानों में से एक है, जिसे पायलटों को अत्याधुनिक सिमुलेटर और लाइव फ्लाइट ट्रेनिंग के जरिए ऑपरेट करना सिखाया जाता है. ईरान जैसे संवेदनशील और जोखिम भरे इलाके में काम करना चुनौतीपूर्ण होता है, जहां एयर डिफेंस सिस्टम, दुश्मन विमानों और प्राकृतिक बाधाओं से बचना जरूरी है. पायलटों को स्टील्थ टेक्नोलॉजी, हाई-एंगल फ्लाइट, और तेज गति का उपयोग करके खतरे से बचने की ट्रेनिंग दी जाती है. साथ ही उन्हें ईमरजेंसी परिस्थितियों में जीवित रहने की कला जैसे बिना खाना-पानी, छुपकर बचना, पैरा-लैंडिंग के बाद सुरक्षित जगह तक पहुंचना और बचाव टीम से संपर्क करना भी सिखाया जाता है.

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F‑35 Pilot Training  (Photo: Lockheed Martin official website) F‑35 Pilot Training (Photo: Lockheed Martin official website)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 04 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 2:04 PM IST

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक सनसनीखेज खबर सामने आई है. ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी F‑35 स्टील्थ फाइटर जेट को निशाना बनाया. IRGC ने यह भी दावा किया है कि उसने उसके पायलट को पकड़ लिया है. हालांकि, इस दावे का संयुक्त राज्य अमेरिका की तरफ से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. अमेरिका के सबसे हाई-टेक लड़ाकू विमान F35 को उड़ाने वाले पायलट दुनिया के सबसे चुनिंदा एविएटर्स में शुमार होते हैं. इस विमान की आधुनिक तकनीक और युद्ध‑दक्षता के चलते पायलटों को बेहद सख्त शैक्षणिक मानदंड, कठिन ट्रेनिंग और जीवन‑रक्षा स्किल सिखाएं जाते हैं. इस खबर के बाद पायलटों की ट्रेनिंग और उनकी सुरक्षा पर नई बहस तेज हुई है. लेकिन क्या अमेरिकी पायलट ट्रेनिंग के स्किल से अपनी जान बचा पाएगा?

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F-35 फाइटर जेट

F-35 को अमेरिकन कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने बनाया है. दुनिया में अमेरिका समेत 15 देश ऐसे हैं जिनके बेड़े में F-35 शामिल है. ये एक सिंगल इंजन, 5वीं पीढ़ी का सुपरसॉनिक, स्टेल्थ तकनीक से लैस फाइटर जेट है. F-35 के कई वर्जन शामिल हैं जिसमें मरीन ऑपरेशंस में शामिल होने वाले जेट्स भी हैं. एयरो इंडिया में हिस्सा लेने आए जेट का नाम F-35 Lightning || है. 

पढ़ाई से लेकर ट्रेनिंग तक 

अगर आप अमेरिका की वायु सेना में F‑35 जैसे फाइटर जेट का पायलट बनना चाहते हैं, तो आपको कुछ मुख्य स्टेप्स से गुजरना पड़ता है. यह कोई आसान रास्ता नहीं है बल्कि पढ़ाई और ट्रेनिंग की पूरी प्रक्रिया है. इसके लिए सबसे पहले कमिशन्ड ऑफिसर बनना होता है. इसका मतलब है कि आपको वायु सेना में अधिकारी के तौर पर चुने जाते हैं. इसके लिए सबसे आम तरीका है U.S. Air Force Academy में एडमिशन लेना जो, कोलोराडो स्प्रिंग्स, कोलोराडो में है. वहां आप बैचलर डिग्री पूरी करेंगे और उसी दौरान आपको होने वाली पढ़ाई और ट्रेनिंग अधिकारी बनने की बुनियादी योग्यता देती है. लेकिन अगर आपके पास पहले से ही 4 साल की डिग्री (Bachelor’s Degree) है, तो आप सीधे ऑफिसर ट्रेनिंग कार्यक्रम (जैसे AFROTC या Officer Training School)  ज्वाइन कर सकते हैं और फिर पायलट ट्रेनिंग की तरफ आगे बढ़ सकते हैं. 

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ट्रेनिंग प्रक्रिया 

उसके बाद आपको अंडरग्रेजुएट पायलट ट्रेनिंग (UPT) करना होगा, जो लगभग एक साल का बेसिक फ्लाइट ट्रेनिंग प्रोग्राम है. इसी में आप उड़ान की शुरुआत सीखते हैं. जब यह ट्रेनिंग पूरी हो जाती है, तो एयरफोर्स आपको एक विमान असाइन करता है. अगर आप F‑35 जैसे हाई‑टेक लड़ाकू विमान के लिए चुने जाते हैं, तो उसके बाद आपको विशेष ट्रेनिंग लेनी होती है जैसे Introduction to Fighter Fundamentals और फिर F‑35 Basic कोर्स. यह ट्रेनिंग छह‑नौ महीनों से लेकर लंबी सेवा ट्रेनिंग तक चल सकती है. इसके बाद मिशन‑क्वालिफिकेशन ट्रेनिंग (MQT) और निरंतर उन्नत प्रशिक्षण भी होता. 

SERE ट्रेनिंग है खास 

अमेरिकी वायु सेना में F‑35 या किसी भी फाइटर जेट पायलट को केवल विमान उड़ाने की ट्रेनिंग नहीं दी जाती है बल्कि ऐसी ट्रेनिंग भी दी जाती है जो आपात स्थिति में उनका जीवन बचाने में मदद कर सके. अगर कोई पायलट युद्ध क्षेत्र में विमान के क्रैश या गिरने की स्थिति में फंस जाए, तो उसकी सबसे बड़ी उम्मीद होती है कि उसने पहले से जो सर्वाइवल स्किल्स सीखी हैं, उनका इस्तेमाल कर सके. इन ट्रेनिंग और स्किल्स का आधार SERE (Survival, Evasion, Resistance, and Escape) कार्यक्रम है, जो पायलटों को कठिन हालात में  जीवित रहने, दुश्मन से बचने और आखिरकार रेस्क्यू तक पहुंचने की क्षमता देती है. 

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क्या होता है ट्रेनिंग में? 

SERE का मतलब Survival, Evasion, Resistance, and Escape है.  इसे U.S. एयर फोर्स की Survival School में सिखाया जाता है, यहां पायलटों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना सिखाया जाता है जैसे- 

जंगल, रेगिस्तान, बर्फीली धरती जैसे कठिन वातावरण में जीवित रहना. 

बिना मदद के पानी, भोजन और आश्रय ढूंढना. 

दुश्मन के इलाके में छिपकर बचना और रडार से बचना. 

मानचित्र, नेविगेशन, संकेत और दिशा‑निर्देश सीखना. 

अगर आपको दुश्मन पकड़ा जाता है तो, मानसिक और शारीरिक दृढ़ता से निपटना सिखाया जाता है. 

इसके साथ ही रेस्क्यू टीम तक पहुंचने के लिए सिग्नलिंग और रेस्क्यू सिग्नल्स का इस्तेमाल भी सिखाया जाता है. 

SERE ट्रेनिंग में पायलट यह भी जानता है कि किस तरह रडियो, कंपास, इमर्जेंसी सिग्नलिंग उपकरण और बचाव किट को उपयोग में लाया जाए ताकि उसे जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकाला जा सके. 

 

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