पुराने पैटर्न पर ही होगी NEET-PG सुपर स्पेशियलिटी परीक्षा, SC की फटकार के बाद झुकी केंद्र सरकार

केंद्र और राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड ने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष स्वीकार किया कि इस वर्ष NEET सुपर स्पेशियलिटी परीक्षा पुराने पैटर्न के अनुसार आयोजित की जाएगी.

Advertisement
पुराने पैटर्न पर ही होगी NEET-PG सुपर स्पेशियलिटी परीक्षा पुराने पैटर्न पर ही होगी NEET-PG सुपर स्पेशियलिटी परीक्षा

अनीषा माथुर / संजय शर्मा

  • नई द‍िल्ली ,
  • 06 अक्टूबर 2021,
  • अपडेटेड 12:50 PM IST
  • पुराने पैटर्न पर ही होगी NEET-PG सुपर स्पेशियलिटी परीक्षा
  • SC की फटकार के बाद झुकी केंद्र सरकार

NEET Superspeciality DM Exams Pattern: सुप्रीम कोर्ट ने आज बताया कि नीट सुपर स्पेशियलिटी डीएम परीक्षा के पैटर्न में इस साल कोई बदलाव नहीं होगा. यह परीक्षा पुराने पैटर्न पर ही आयोजित होगी. केंद्र और राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड ने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष स्वीकार किया कि इस वर्ष NEET सुपर स्पेशियलिटी परीक्षा पुराने पैटर्न के अनुसार आयोजित की जाएगी. नया पैटर्न अगले साल से लागू होगा.  

Advertisement

सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद केंद्र सरकार ने पुराने पैटर्न पर ही NEET-PG सुपर स्पेशियलिटी परीक्षा 2021 कराने की बात कही है. 
केंद्र ने अदालत को बताया कि ये परीक्षा पुराने प्रश्न पैटर्न के अनुसार होगी. नया पैटर्न अगले सत्र 2022-2023 से लागू होगा. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के प्रस्ताव पर संतुष्टि जताई है. 

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा सुपर स्पेशियलिटी (NEET-SS) 2021 के पैटर्न में किए गए "लास्ट मिनट चेंजेज" पर अपनी नाराजगी व्यक्त की थी. कोर्ट ने कहा था कि प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि इसके जरिये केवल रिक्त पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल सीटों को भरने का इरादा है. केंद्र सरकार के परीक्षा दो महीने टालने के नए प्रस्ताव को सुप्रीम कोर्ट ने नामंजूर किया. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को बुधवार को फिर से विचार कर आने को कहा. सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक कहा कि या तो सरकार खुद पुराने पैटर्न पर परीक्षा कराए वरना कानून के हाथ लंबे हैं. 

Advertisement

लेकिन अदालत ने कहा कि अभी पैटर्न की वैधता को तय करने की जरूरत नहीं  है. अभी ये मामला अदालत में खुला रहेगा. जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि सरकार इस मामले में अब तक निष्पक्ष रही है.  सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आखिरी वक्त में परीक्षा पैटर्न में बदलाव तार्किक होना चाहिए. सरकार के कदम से संदेश मिल रहा है कि मेडिकल पेशा एक बिजनेस बन गया है. मेडिकल शिक्षा भी एक बिजनेस बन गई है. हम भविष्य के लिए योजना नहीं बनाते, यही समस्या है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आखिरी वक्त में पैटर्न बदलने की जरूरत क्या है. सरकार नया पैटर्न ला सकती है ये उसके डोमैन में है, लेकिन ये अगले साल लागू हो. 

जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा कि आपको उन्हें कुछ समय देने की जरूरत है. बदलाव करने की क्या जल्दी है. सरकार को छात्रों के लिए कुछ चिंता करनी चाहिए, इन छात्रों ने इतने लंबे समय से तैयारी की है. जिस दिन से वे MBBS में शामिल होते हैं, उनका लक्ष्य सुपर स्पेशि‍यलिटी में जाने का होता है. वे लगातार अध्ययन करते हैं और प्रतिबद्ध हैं. अब आप कह रहे हैं कि परीक्षा दो महीने और टाल दी जाए.  क्यों दो महीने और बर्बाद होने दें जबकि ये छात्र इतने लंबे समय से तैयारी कर रहे हैं.  

Advertisement

जब केंद्र की ओर से उपस्थित एएसजी ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि केवल 41 छात्रों ने याचिका दायर की है जबकि पांच हजार छात्र परीक्षा में बैठते हैं. इस पर जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने कहा अदालत का दरवाजा खटखटाने वाले लोगों की संख्या कोई मायने नहीं रखती. जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा कि इन 41 के पास कोई विकल्प नहीं है. यह उनके जीवन और करियर का मामला है, उन्हें भी अंततः परीक्षा में शामिल होना होगा. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को बुधवार तक का समय दिया था. 

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »