नीट (NEET-UG 2026) पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के हाथ बहुत बड़ा और पुख्ता दस्तावेज लगा है. यह दस्तावेज कोई साधारण रिपोर्ट नहीं, बल्कि लातूर के नामी 'आरसीसी (RCC) कोचिंग इंस्टीट्यूट' के डायरेक्टर शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर का 'अरेस्ट मेमो' है. aajtak.in के पास मौजूद इस एक्सक्लूसिव अरेस्ट मेमो ने साफ कर दिया है कि ये सिर्फ एक मामूली नकल का मामला नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक बहुत बड़ा संगठित सिंडिकेट काम कर रहा था, जिसने परीक्षा से कई दिन पहले ही पूरे सिस्टम को हैक कर लिया था.
सीबीआई के इस आधिकारिक अरेस्ट मेमो (FIR नंबर: RC2212026E0010) के मुताबिक, शिवराज मोटेगांवकर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS 2023), प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट और नए बने कड़े कानून यानी 'लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम 2024' के तहत केस दर्ज कर गिरफ्तार किया गया है.
सीबीआई की इस तफ्तीश में जो 5 सबसे बड़े और चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, वो इस प्रकार हैं:
1. परीक्षा से 10 दिन पहले (23 अप्रैल को ही) आ गया था लीक पेपर!
सीबीआई की जांच में जो सबसे बड़ा और सनसनीखेज सच सामने आया है, वो यह है कि शिवराज मोटेगांवकर नीट का पेपर लीक करने वाले और उसे बाजार में घुमाने वाले एक बेहद शातिर और संगठित गैंग का सक्रिय सदस्य है. अरेस्ट मेमो के मुताबिक, मोटेगांवकर ने बाकी आरोपियों के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची और नीट परीक्षा के असली सवाल और उनके जवाब परीक्षा होने से बहुत पहले, यानी 23 अप्रैल 2026 को ही अपने पास मंगा लिए थे.
2. छापेमारी में कोचिंग मालिक के मोबाइल से बरामद हुए नीट के सवाल
बीती 14 मई 2026 को जब सीबीआई की टीम ने लातूर के शिवाजी नगर स्थित शिवराज मोटेगांवकर के आलीशान ठिकाने पर छापा मारा, तो वहां सीधा और अकाट्य सबूत हाथ लगा. मोटेगांवकर के निजी मोबाइल फोन के भीतर नीट 2026 के लीक हुए प्रश्नपत्र मौजूद थे. सीबीआई ने तत्काल उस मोबाइल फोन को सर्च लिस्ट के तहत जब्त कर लिया है और उसे डेटा रिकवरी व विस्तृत फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है.
3. NTA के सरकारी बाबुओं और अफसरों के साथ तगड़ी साठगांठ
यह खेल बिना अंदरूनी मदद के मुमकिन नहीं था. सीबीआई ने अरेस्ट मेमो में साफ लिखा है कि शिवराज मोटेगांवकर ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) से जुड़े और परीक्षा कराने की मुख्य प्रक्रिया को संभालने वाले सरकारी कर्मचारियों और लोक सेवकों (Public Servants) के साथ मिलकर इस पूरी आपराधिक साजिश को अंजाम दिया था. यानी एनटीए के भीतर बैठे विभीषणों ने ही इस पूरे पेपर को लीक करने में मदद की थी.
4. 'हाथ से लिखकर' बांटे गए पर्चे, कई नाम छुपा रहा है आरोपी
जांच से पता चला है कि पेपर हासिल करने के बाद मोटेगांवकर और उसके सिंडिकेट ने लीक क्वेश्चन पेपर्स और आंसर शीट्स की कॉपियां विवेक पाटिल समेत कई रसूखदार लोगों और अभ्यर्थियों को मोटी रकम के बदले बांटी थीं. सीबीआई ने खुलासा किया है कि मोटेगांवकर बेहद शातिर तरीके से पूछताछ में उन सभी लोगों के नामों को छुपा रहा है, जिन्हें उसने हाथ से लिखी (Hand-written) हुई लीक कॉपियां सप्लाई की थीं.
5. सबूत मिटाने के लिए परीक्षा के तुरंत बाद जला दिए पेपर!
शातिर कोचिंग संचालक को पता था कि वह कानून के शिकंजे में आ सकता है, इसलिए उसने सबूत मिटाने (Destruction of Evidence) की भी पूरी तैयारी की थी. जैसे ही नीट की परीक्षा खत्म हुई, मोटेगांवकर ने अपने पास मौजूद लीक प्रश्नपत्रों और कॉपियों को पूरी तरह नष्ट कर जला दिया. हालांकि, वह अपने मोबाइल के डिजिटल फुटप्रिंट्स को मिटाना भूल गया, जो अब उसकी बर्बादी का सबसे बड़ा कारण बन चुका है.
सीबीआई ने साफ कर दिया है कि देश के लाखों बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले इस आरोपी के खिलाफ गैर-जमानती और बेहद गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है और उसकी गिरफ्तारी के पर्याप्त और अकाट्य कारण मौजूद हैं.
दिव्येश सिंह / शरत कुमार