सालों से न परीक्षा, न डिग्री, न स्कॉलरशिप... MP नर्सिंग घोटाले की बलि चढ़ा 70 हजार छात्रों का भविष्य!

मध्य प्रदेश के हजारों नर्सिंग छात्र उम्मीद लगाए बैठे हैं कि एक दिन उनकी परीक्षाएं होंगी, उन्हें डिग्री मिलेगी और वे एक सफल नर्स बनकर समाज की सेवा कर पाएंगे. लेकिन जब परीक्षा नहीं होगी, डिग्री नहीं मिलेगी और रोजगार के अवसर भी खत्म हो जाएंगे, तो प्रदेश का स्वास्थ्य मॉडल कैसे बेहतर होगा?

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सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

अमृतांशी जोशी

  • भोपाल,
  • 01 मार्च 2025,
  • अपडेटेड 3:59 PM IST

मध्य प्रदेश में नर्सिंग और पैरामेडिकल के छात्रों की परेशानियां खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं. जहां एक ओर छात्रों को परीक्षाओं और डिग्री के अभाव में भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है, वहीं चार साल से छात्रवृत्ति न मिलने के कारण हजारों विद्यार्थी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं. हालात यह हो गए हैं कि कई छात्र पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर हैं और अपने गांव-शहर लौट रहे हैं.

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छात्रों के टूटते सपने
बैतूल की रहने वाली अंजलि चौरसिया 2021 से बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई कर रही हैं. यह कोर्स चार साल का है, लेकिन अभी तक उनका केवल पहला वर्ष का ही एग्जाम हुआ है, जिसका रिजल्ट अभी तक जारी नहीं हुआ. पिता के निधन के बाद छात्रा की मां किसी तरह घर का खर्च चला रही हैं. आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण अब अंजलि के घरवाले उन्हें वापस बुला रहे हैं क्योंकि वे आगे की फीस भरने में असमर्थ हैं. कॉलेज प्रशासन भी बिना फीस परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दे रहा. मजबूर होकर अंजलि ने पढ़ाई छोड़ने का मन बना लिया है.

नर्सिंग स्टूडेंट अंजलि कहती हैं,  "चार साल से पढ़ाई कर रही हूं, लेकिन अब तक पहला साल भी पूरा नहीं हुआ. स्कॉलरशिप नहीं मिली, फीस नहीं भर पा रहे हैं और कॉलेज परीक्षा में बैठने नहीं दे रहा. घरवाले वापस बुला रहे हैं, अब पढ़ाई छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं है."

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विभागों के चक्कर काटते छात्र
भोपाल में नर्सिंग की पढ़ाई कर रहे मुकेश मालवीय भी इसी समस्या से जूझ रहे हैं. वे नजीरबाद से भोपाल आए थे और पांच साल से पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि कोर्स केवल चार साल का है. अब तक केवल एक ही परीक्षा हुई है. पांच साल पहले उन्हें पहली बार स्कॉलरशिप मिली थी, लेकिन उसके बाद से कोई आर्थिक सहायता नहीं मिली. स्कॉलरशिप के लिए वे विभाग से लेकर कलेक्टर कार्यालय तक कई बार चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं मिला.

मुकेश का कहना है, "2020 में एडमिशन लिया था, लेकिन कोर्स अब तक पूरा नहीं हुआ. पहली बार स्कॉलरशिप मिली थी, लेकिन उसके बाद से बस सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं. कॉलेज प्रशासन कह रहा है कि जब तक फीस नहीं भरेंगे, तब तक परीक्षा में नहीं बैठ सकते. गांव भी नहीं लौट सकते क्योंकि खाली हाथ जाने पर लोग ताने देंगे."

70,000 छात्रों को छात्रवृत्ति का इंतजार
मध्य प्रदेश में नर्सिंग और पैरामेडिकल के एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों के लिए सरकार द्वारा छात्रवृत्ति का प्रावधान है. लेकिन पिछले चार वर्षों से 70,000 से अधिक छात्रों को इसका लाभ नहीं मिला है.

छात्रवृत्ति की राशि-
बीएससी नर्सिंग (SC/ST): ₹56,000
बीएससी नर्सिंग (OBC): ₹30,000
GNM (SC/ST): ₹57,000
GNM (OBC): ₹20,000

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छात्रवृत्ति न मिलने के कारण हजारों विद्यार्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है. परीक्षा नहीं हो रही, डिग्री नहीं मिल रही, और डिग्री के बिना रोजगार भी सपना बन गया है.

छात्रों का विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक घमासान
नर्सिंग घोटाले की जांच के चलते परीक्षाओं और रिजल्ट पर रोक लगी थी, जिसे कोर्ट ने कुछ समय पहले हटा दिया था. लेकिन परीक्षाएं अभी भी समय पर आयोजित नहीं हो पा रही हैं. छात्रों की समस्या को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है.

एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने कहा, "मुख्यमंत्री से मुलाकात कर चुके हैं, लेकिन अब तक न तो परीक्षा हो रही है, न रिजल्ट आ रहे हैं और न ही छात्रवृत्ति मिल रही है. छात्रों की हालत बेहद खराब है, जल्द ही विधानसभा का घेराव करेंगे."

एमपी कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा, "यह सरकार शिक्षा के क्षेत्र में भी अपराध कर रही है. कई छात्र आत्महत्या तक कर चुके हैं, लेकिन सरकार कोई ठोस कदम नहीं उठा रही. छात्रों को पढ़ाई में इतना उलझा दो कि वे नौकरी मांग ही न सकें. यह सरकार केवल भ्रष्टाचार में लिप्त है."

छात्रों को छात्रवृत्ति की राशि देने की बात कर रही सरकार
वहीं, सरकार ने जल्द समाधान का भरोसा दिलाया है. इस पूरे मामले में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री नरेंद्र शिवजी पटेल का कहना है कि सरकार इस मुद्दे को लेकर गंभीर है. कुछ समय पहले मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन था और सीबीआई जांच भी चल रही थी. अब 8 से 10 दिनों के अंदर छात्रवृत्ति की राशि छात्रों के खातों में भेज दी जाएगी.

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