बंदूक-बम-बंकर... कैसे हो रही इजरायल और ईरान में पढ़ाई? कोरोना से भी बुरा दौर

2026 में इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध ने छात्रों की शिक्षा और सुरक्षा को गंभीर संकट में डाल दिया है. इजरायल में स्कूल बंद कर ऑनलाइन क्लासेस शुरू की गई हैं, जबकि बच्चों को बंकरों में पढ़ाई करनी पड़ रही है. ईरान में मिसाइल हमलों ने कई स्कूलों को नुकसान पहुंचाया है और सैकड़ों मासूम बच्चों की जान गई है. यूनेस्को और अन्य संस्थाएं इस युद्ध को एक पीढ़ी के लिए शिक्षा संकट मान रही हैं

Advertisement
ईरान-इजरायल जंग: बंकर और Zoom में सिमटी पढ़ाई. (Rep. Photo (r): AP) ईरान-इजरायल जंग: बंकर और Zoom में सिमटी पढ़ाई. (Rep. Photo (r): AP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 19 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 9:06 AM IST

कल्पना कीजिए, एक बच्चा सुबह स्कूल जाने के लिए तैयार होता है, लेकिन बस्ते में टिफिन की जगह उसे सिखाया जाता है कि सायरन बजते ही बंकर की तरफ कैसे भागना है....यह किसी फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि 2026 में इजरायल और ईरान के छात्रों की कड़वी सच्चाई है.

कोरोना के दौर में हमने घरों में कैद होकर पढ़ाई देखी थी, लेकिन आज मिडिल ईस्ट के छात्र जिस दौर से गुजर रहे हैं, वह उससे कहीं ज्यादा खौफनाक है. वहां स्क्रीन पर टीचर की आवाज के साथ-साथ बैकग्राउंड में मिसाइलों के फटने की गूंं  सुनाई देती है.

Advertisement

अगर इजरायल की बात करें तो यहां इन दिनों 'पूरीम' (Purim) का त्योहार मनाया जाना था. बच्चे रंग-बिरंगी ड्रेस पहनकर स्कूलों में जश्न की तैयारी कर रहे थे. लेकिन ईरानी मिसाइल हमलों के बाद पूरीम की खुशियां मातम और डर में बदल गईं.

इजरायल के शिक्षा मंत्रालय ने देश के सभी स्कूलों को बंद कर 'रिमोट लर्निंग' यानी ऑनलाइन क्लासेज पर शिफ्ट कर दिया है. शिक्षा मंत्री योआब किश ने मीड‍िया में साफ कि‍या है कि हालात बहुत जटिल हैं. अब पढ़ाई का मतलब सिर्फ सिलेबस पूरा करना नहीं, बल्कि 'इमोशनल सपोर्ट' बन गया है. यहां सोमवार से जब जूम पर क्लास शुरू हुई, तो शिक्षकों का पहला काम बच्चों के मन से धमाकों का डर निकालना और उन्हें मानसिक रूप से संभालना था.

बंकर ही अब क्लासरूम

जिन बोर्डिंग स्कूलों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं, वहां तो बच्चे वहीं रहकर पढ़ रहे हैं. लेकिन जहां सुरक्षा की कमी थी, वहां से बच्चों को रातों-रात सुरक्षित ठिकानों पर शिफ्ट किया गया है. इसके अलावा छात्रों और माता-पिता के बढ़ते तनाव को देखते हुए 24 घंटे की एक 'इमोशनल सपोर्ट' हेल्पलाइन (6312) शुरू की गई है, जहां प्रोफेशनल काउंसलर्स डरे हुए बच्चों की काउंसलिंग कर रहे हैं.

Advertisement

ईरान: मलबे में तब्दील होती उम्मीदें

दूसरी तरफ ईरान की तस्वीर और भी डरावनी है. वहां केवल स्कूल बंद नहीं हुए हैं, बल्कि कई स्कूल जंग की सीधी चपेट में आ गए हैं.

मीड‍िया र‍िपोर्टस के अनुसार दक्षिणी ईरान के मिनाब में एक प्राइमरी स्कूल पर हुई मिसाइल स्ट्राइक ने पूरी दुनिया का कलेजा चीर दिया है. एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, इस हमले में 100 से ज्यादा मासूम बच्चों की जान चली गई. जो हाथ कलम पकड़ने के लिए थे, वे मलबे के नीचे दब गए. ईरान में इंटरनेट की समस्या और लगातार होती बमबारी ने ऑनलाइन पढ़ाई को भी लगभग नामुमकिन बना दिया है.

इंड‍ियन स्टूडेंट्स आए वापस 

इस जंग के बीच करीब 2000 भारतीय छात्र भी फंसे थे जो ईरान में मेडिकल की पढ़ाई करने गए थे. उनके हॉस्टल्स के पास धमाके हो रहे हैं. फ्लाइट्स बंद हैं और वे आर्मेनिया या अजरबैजान के रास्ते सुरक्षित निकलने की कोशिश में लगे हैं. उनके लिए अब डिग्री से ज्यादा अपनी जान बचाकर वतन लौटना प्राथमिकता बन गई है.

इन हालातों पर यूनेस्को (UNESCO) और सेव द चिल्ड्रन जैसी संस्थाएं चेतावनी दे रही हैं कि यह युद्ध एक पूरी पीढ़ी को 'अनपढ़' बना सकता है. जब बच्चा स्कूल की घंटी के बजाय मिसाइल की आवाज पहचानने लगे, तो समझ लीजिए कि मानवता हार रही है. इजरायल में हिब्रू यूनिवर्सिटी जैसे बड़े संस्थान अब जूम के सहारे एकेडमिक कैलेंडर बचाने की कोशिश कर रहे हैं. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement