क्या है नेसेट, जहां पीएम मोदी के जाने से इजरायल में मची है खलबली!

इजरायल में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र भव्य स्वागत हुआ. वहां वह कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे. इनमें से ही एक है, नेसेट में पीएम मोदी का संबोधन. इस कार्यक्रम को लेकर इजरायल में काफी बवाल मचा हुआ है. ऐसे में जानते हैं कि नेसेट क्या है और पीएम मोदी के वहां भाषण देने को लेकर क्यों खलबली मची हुई है.

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पीएम मोदी का इजरायल नेसेट में देंगे भाषण (Photo - AP) पीएम मोदी का इजरायल नेसेट में देंगे भाषण (Photo - AP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 25 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:31 PM IST

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजरायल पहुंच चुके हैं. बेन गुरियन हवाई अड्डे पर उनका भव्य स्वागत हुआ. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामीन नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा खुद पहुंची हुई थीं.  इजरायल के यरूशलम रवाना होने से पहले, दोनों राष्ट्राध्यक्ष एयरपोर्ट में ही बैठक करेंगे. 

इजरायल में भारत के राजदूत जेपी सिंह ने द यरूशलम पोस्ट को बताया कि दोनों देशों के नेताओं की चर्चा बेहद सहज रहने की उम्मीद है. साथ ही क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों" पर चर्चा होगी. उन्होंने दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत संबंधों को बेहद सौहार्दपूर्ण, मैत्रीपूर्ण और भाईचारे वाला बताया. इस प्रारंभिक बैठक में प्रेस को प्रवेश की अनुमति नहीं है - केवल आधिकारिक फोटोग्राफरों ही मौजूद होंगे. 

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इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम है, नेसेट में पीएम मोदी की का संबोधन है. नेसेट को संबोधित करने वाले वह पहले भारतीय प्रधानमंत्री होंगे. पीएम मोदी से पहले नेसेट  को संबोधित कर चुके विश्व नेताओं में अमेरिकी राष्ट्रपति, मिस्र के दिवंगत राष्ट्रपति अनवर सादात और हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई शामिल हैं.

नेसेट में पीएम मोदी के भाषण को लेकर बवाल क्यों? 
नेसेट इजरायल का संसद है. वहां पीएम मोदी के भाषण से पहले ही खलबली मची हुई है. क्योंकि, यह कार्यक्रम वहां के एक घरेलू राजनीतिक विवाद से प्रभावित होता दिख रहा है. इजरायल के विपक्षी नेता यायर लैपिड ने कहा है कि उनका गुट संसद के इस सत्र का बहिष्कार करेगा. क्योंकि नेसेट अध्यक्ष अमीर ओहाना ने सर्वोच्च न्यायालय के अध्यक्ष इसहाक अमित को आमंत्रित करने से इनकार कर दिया है - जो संसदीय परंपरा का उल्लंघन है.

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 लैपिड ने नेतन्याहू से इस मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह करते हुए लिखा है कि हम सत्र में रहना चाहते हैं, हमें सत्र में रहना आवश्यक है. उन्होंने पहले ही चेतावनी दी है कि विपक्ष नहीं चाहता कि मोदी आधे खाली सदन को संबोधित करें. वहीं ओहाना ने विपक्ष की इस धमकी भरे बहिष्कार को राजनीतिक में एक नाजायज हथियार बताया है. 

नेसेट में भारत के प्रधानमंत्री के संबोधन और इस विवाद के मद्देनजर, इजरायल की संसद के बारे में समझना जरूरी है. क्योंकि, इससे इजरायल की पूरी संसदीय व्यवस्था को समझना बेहद आसान हो जाता है. 

नेसेट क्या है और कैसे काम करता है
नेसेट इजराइल का प्रतिनिधि सभा है या यूं कहें कि यही इजरायली संसद है. इसमें 120 सदस्य होते हैं. नेसेट यरुशलम में स्थित है.नेसेट इजरायल का  लेजिस्लेटिव ऑथरिटी और एकमात्र सरकारी निकाय है जिसके पास कानून बनाने की शक्ति है. इजरायल  के संविधान के निर्माण में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है.

 नेसेट वहां की सरकार के कार्यों की निगरानी भी करती है और कई अर्ध-न्यायिक भूमिकाएं निभाती है. एक निर्वाचक निकाय के रूप में, नेसेट राष्ट्रपति और स्टेट कंट्रोलर का चुनाव करती है. नेसेट के सदस्यों का चुनाव मतदाताओं द्वारा सीधे नहीं किया जाता है. वे आम चुनावों में हिस्सा लेने वाली पार्टी लिस्ट के तहत उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ते हैं. नेसेट के सदस्य लोगों के प्रतिनिधि होते हैं, और वे उन पार्टियों का प्रतिनिधित्व करते हैं जिनकी ओर से उन्हें चुना गया है. 

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चुनावों के बाद, नेसेट के सदस्य पार्लियामेंट्री ग्रुप्स (जिन्हें  फ़ैक्शन भी कहा जाता है) के फ्रेमवर्क में काम करते हैं. इन संसदीय समूहों को नेसेट के कार्यकाल के दौरान विभाजित या विलय करने की सुविधा होती है.ये पार्लियामेंट्री ग्रुप्स दो हिस्सों में बंटे हैं. एक जो कोएलिशन के मेंबर हैं यानी सरकार को सपोर्ट करते हैं. दूसरा जो अपोजिशन के मेंबर हैं और आम तौर पर सरकार का विरोध करते हैं. प्रधानमंत्री और उप-प्रधानमंत्री दोनों का संसद का सदस्य होना अनिवार्य है. मंत्रियों के लिए संसद सदस्य होना अनिवार्य नहीं है.

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