मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 के पेपर लीक विवाद के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की कि रद्द की गई NEET-UG 2026 की परीक्षा अब 21 जून 2026 को आयोजित की जाएगी. शिक्षा मंत्री ने साफ किया है कि परीक्षा की शुचिता से कोई समझौता नहीं होगा और इसके लिए डॉ के राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों को सख्ती से लागू किया जा रहा है. ऐसे में कई लोगों के मन में ये सवाल है कि आखिर क्या है इन सिफारिशों में जो NEET में हो रही गड़बड़ी को सही करने में मददगार साबित हो सकता है.
समिति की 5 सबसे बड़ी सिफारिशें-
पेन-पेपर मोड खत्म, हाइब्रिड मॉडल की शुरुआत
समिति ने सुझाव दिया है कि इन गड़बड़ियों से बचने के लिए प्रश्न पत्रों को फिजिकल रूप से केंद्रों तक ले जाने की प्रक्रिया को खत्म किया जाना चाहिए. इसके बजाय कंप्यूटर एडेड पेन-पेपर टेस्ट (CPPT) या हाइब्रिड मॉडल अपनाया जाए. इसमें प्रश्न पत्र डिजिटल रूप से परीक्षा शुरू होने के ठीक पहले केंद्र पर भेजे जाएंगे और वहीं प्रिंट किए जाएंगे. इससे रास्ते में पेपर लीक होने की गुंजाइश खत्म हो जाएगी.
कई चरणों में हो सकती है नीट परीक्षा
JEE Main और Advanced की तर्ज पर नीट को भी दो चरणों में आयोजित करने का सुझाव दिया गया है. पहला चरण स्क्रीनिंग टेस्ट (ताकि भारी भीड़ को छांटा जा सके) और दूसरा चरण में मुख्य परीक्षा का आयोजन किया जाए.
सरकारी केंद्रों को प्राथमिकता और निजी केंद्रों पर लगाम
इसके साथ ही समिति ने सिफारिश की है कि परीक्षाएं मुख्य रूप से केंद्रीय विद्यालयों (KV) और नवोदय विद्यालयों (JNV) जैसे सरकारी संस्थानों में ही आयोजित की जानी चाहिए. निजी केंद्रों पर निगरानी रखना कठिन होता है, इसलिए परीक्षा केंद्रों के रूप में उनका उपयोग कम से कम किया जाए.
डिजी-एग्जाम और बायोमेट्रिक सुरक्षा
फर्जी उम्मीदवारों (डमी कैंडिडेट) को रोकने के लिए डिजी-यात्रा की तर्ज पर डिजी-एग्जाम सिस्टम लागू करने की बात कही गई है. इसमें आवेदन से लेकर परीक्षा केंद्र में प्रवेश तक AI-आधारित फेस रिकग्निशन और आधार बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन अनिवार्य होगा यानी मतलब साफ है कि डिजिटल टेक्नोलॉजी पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है.
एनटीए (NTA) का पुनर्गठन
समिति ने पाया कि एनटीए बाहरी आउटसोर्सिंग और संविदा कर्मचारियों पर बहुत अधिक निर्भर है. सिफारिश की गई है कि एनटीए में स्थायी विशेषज्ञों की भर्ती की जाए और इसके भीतर टेस्ट ऑडिट, नैतिकता और डेटा सुरक्षा के लिए अलग-अलग सशक्त उप-समितियां बनाई जाएं.
क्यों जरूरी हैं ये बदलाव?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि वर्तमान पेन-पेपर मोड में पेपर लीक के कई लीक पॉइंट्स (जैसे प्रिंटिंग प्रेस, ट्रांसपोर्टेशन और बैंक लॉकर) होते हैं. राधाकृष्णन समिति के ये सुझाव तकनीक के माध्यम से मानवीय हस्तक्षेप को कम करने पर केंद्रित हैं. हमारा लक्ष्य एक ऐसी व्यवस्था बनाना है जो अटूट हो और जहां एक भी मेधावी छात्र के साथ अन्याय न हो.
क्यों हुआ था राधाकृष्णन समिति का गठन?
समिति की सिफारिशें NEET को लेकर बढ़ते विवाद के मद्देनजर सामने आई हैं. हाल के सालों में NEET को कई समस्याओं का सामना करना पड़ा है, जिससे इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं. मौजूदा संकट की जड़ इस साल की शुरुआत में NEET परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने में है, जिसने जनता के भरोसे को हिला दिया और छात्रों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया. संदिग्ध शैक्षणिक पृष्ठभूमि वाले छात्रों के असाधारण रूप से उच्च अंक प्राप्त करने की खबरें सामने आईं और परीक्षा के दौरान उत्तर पुस्तिकाओं में हेरफेर की खबरों ने परीक्षा के सुरक्षा प्रोटोकॉल पर सवाल खड़े कर दिए.
NEET विवाद इसकी शुरुआत से ही चला आ रहा है. शुरुआत में पूरे भारत में मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं को मानकीकृत करने के उद्देश्य से बनाई गई NEET ने कई क्षेत्रीय और संस्थान-विशिष्ट परीक्षाओं का स्थान लिया. इस एक समान परीक्षा को देशभर के छात्रों को समान अवसर प्रदान करने के एक तरीके के रूप में देखा गया. NEET का पेपर-आधारित प्रारूप इसे लॉजिस्टिक्स संबंधी समस्याओं और सुरक्षा उल्लंघनों के प्रति संवेदनशील बनाता है. जबकि NTA ने JEE इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा को पूरी तरह से कम्प्यूटरीकृत परीक्षा बनाने में कामयाबी हासिल की है, ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल पहुंच को लेकर चिंताओं के कारण NEET अभी भी पेपर पर ही आधारित है.
बार-बार प्रश्नपत्र लीक होने और अनियमितताओं के बाद जनता के आक्रोश ने विपक्षी दलों को NTA और इसकी परीक्षा प्रक्रियाओं में पूर्ण बदलाव की मांग करने के लिए प्रेरित किया है. पक्षपात और बेकार मैनेजमेंट के आरोपों ने स्थिति को और भी जटिल बना दिया खासकर तब जब NEET के शीर्ष रैंक वाले उम्मीदवार प्रभावशाली व्यक्तियों से जुड़े विशिष्ट परीक्षा केंद्रों से असमान रूप से उभरे. इसलिए, राधाकृष्णन समिति की सिफारिशें केवल सुधार ही नहीं हैं बल्कि NEET के भविष्य के लिए एक संभावित जीवन रेखा हैं. ये भारत की सबसे महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं में से एक की विश्वसनीयता बहाल करने की सामूहिक आशा का प्रतिनिधित्व करती हैं.
आजतक एजुकेशन डेस्क