NEET UG 2026 परीक्षा में पेपर लीक और अनियमितताओं के बाद पेपर रद्द कर दिया गया. पिछले कुछ दिनों से पेपर लीक और गिरफ्तारियों को लेकर बवाल मचा हुआ है. मामले में नए-नए खुलासे हो रहे हैं. सूत्रों का दावा है कि इस मामले की जांच कर रही एजेंसियों को NTA के भीतर भी कुछ गड़बड़ी की आशंका नजर आ रही है.
शक ये जताया जा रहा है कि कोई अंदरूनी व्यक्ति संवेदनशील जानकारी बाहर पहुंचा रहा है. इस मामले में सीबीआई ने केस दर्ज कर लिया है और लगातार एक्शन मोड में नजर आ रही है. परीक्षा का आयोजन 3 मई को किया गया था. उस दौरान NTA ने दावा किया था कि सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि इस मामले में अभी तक क्या-क्या हो चुका है?
गेस पेपर लीक होने के बाद मचा हड़कंप
3 मई को आयोजित हुई परीक्षा के बाद राजस्थान के सीकर से पेपर लीक की आशंका ने सुर्खियां बटोरी थीं जिसके बाद राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप को जांच के आदेश दिए गए थे. जांच के दौरान कई खुलासे भी हुए थे. जांच में यह भी सामने आया है कि यह कथित ‘क्वेश्चन बैंक’ केवल व्हाट्सएप तक सीमित नहीं था. कई एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप के जरिए भी इसे शेयर किए जाने के संकेत मिले हैं.
कुछ चैट्स में फॉरवर्डेड मेनी टाइम्स का टैग दिखाई दिया, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह पेपर बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंची. दावा किया गया कि कुल 180 में से 135 सवाल (90 बायोलॉजी और 45 केमिस्ट्री) गेस पेपर से मैच कर रहे थे.
सबसे पहले किसे पास पहुंचा था पेपर?
माना जा रहा था कि ये गेस पेपर सबसे पहले एमबीबीएस कोर्स में एडमिशन कराने वाले एक काउंसिलर राकेश कुमार मंडावरिया के मोबाइल पर आया. परीक्षा के कुल 720 नंबर के सवालों में से करीब 600 नंबर के सवाल दो दिन पहले ही छात्रों तक पहुंच थे.
CBI के पास पहुंची जांच
NTA ने बयान जारी करते हुए परीक्षा रद्द करने की जानाकारी देते हुए कहा कि परीक्षा का दोबारा से आयोजन करवाया जाएगा. एजेंसी के मुताबिक, 8 मई को परीक्षा से जुड़े मामलों को स्वतंत्र जांच और जरूरी कार्रवाई के लिए केंद्रीय एजेंसियों को भेजा गया था. इसके बाद केंद्रीय जांच एजेंसियों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों से मिले इनपुट और जांच रिपोर्ट की समीक्षा की गई. पेपर लीक होने को लेकर CBI जांच के भी आदेश दिए गए हैं.
कैसे छात्रों के पास पहुंचा था पेपर?
सामने आया है कि मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई और उन्होंने इस मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी. अभी तक इसकी जांच राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) कर रही थी. पुलिस ने अब तक इस मामले में 45 लोगों को हिरासत में लिया है. इस पूरे मामले में केरल के एक MBBS छात्र का कनेक्शन भी सामने आया जिसने अपने पिता को पेपर मैसेज में भेजा था. आरोपी के पिता पिजी चलाते हैं और उन्होंने ने ही पेपर हॉस्टल में रह रही लड़कियों को शेयर किया था.
मास्टरमाइंड को दबोचा
पेपर लीक मामले में मनीष यादव और अविनाश लांबा नाम के दो लोगों को मुख्य सरगना माना माना जा रहा है. हालांकि, जांच एजेंसियों ने अभी आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की है. बताया जा रहा है कि दोनों आरोपियों के नेटवर्क के जरिए पश्नपत्र परीक्षा से पहले कुछ लोगों तक पहुंचाया गया था. लेकिन जांच में एक और खुलासे ने हर किसी को हैरान कर दिया. सूत्रों के मुताबिक गुरुग्राम के एक डॉक्टर से जमवारामगढ़ निवासी दो भाई मांगीलाल बिवाल और दिनेश बिवाल ने 26 और 27 अप्रैल को करीब 30 लाख रुपये में कथित तौर पर NEET का पेपर NEET का पेपर खरीदा था. इसके बाद दिनेश बिवाल ने यह पेपर अपने बेटे को दिया, जो सीकर में रहकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा था.
नागौर कनेक्शन ने बढ़ाई चिंता
इसके बाद से नागौर कनेक्शन भी जांच एजेंसियों के घेरे में आ गई. सूत्रों को मुताबिक एक छात्र को कथित तौर पर 28 लाख रुपये में पेपर बेचे जाने की बात सामने आई थी.
जांच में महिला का नाम भी शामिल
इस जांच में एक महिला को भी गिरफ्तार किया गया है. पुणे पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि महिला को शहर के बिबवेवाड़ी इलाके से हिरासत में लिया गया है. पूछताछ के बाद उसे आगे की जांच के लिए सीबीआई के हवाले कर दिया गया है. पुलिस जांच के अनुसार, मनीषा वाघमारे एक ब्यूटीशियन के रूप में काम करती हैं.
जांचकर्ताओं ने उनके और आरोपी धनंजय लोखंडे के बीच हुई टेलीग्राम चैट बरामद की हैं जिनसे कथित तौर पर संकेत मिलता है कि वह इस मामले में शामिल आरोपियों के संपर्क में थीं. पुलिस सूत्रों ने बताया कि वाघमारे पुणे में एक प्रवेश परामर्श सेवा भी चलाती थीं, जहां वह कथित तौर पर विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश दिलाने के लिए 25,000 रुपये लेती थीं. इसी प्रक्रिया के दौरान वह कथित तौर पर आरोपी धनंजय लोखंडे के संपर्क में आईं.
हिरासत में लिए गए लोगों को छोड़ा
नीट पेपरलीक में सीबीआई इस बार पेपरलीक कहा से हुआ है इस पर फोकस कर रही है इसलिए केवल पांच लोगों को दिल्ली लेकर गई है जो पेपर लीक नेटवर्क से जुड़े हैं, बाकि हिरासत में लिए गए 45 लोगों को छोड़ दिया है.
सीबीआई और एसओजी का मानना है कि ये बहुत मज़बूत और पुराना नेटवर्क हो सकता है.
पुणे से निकाला पेपर
सीबीआई और एसओजी का मानना है कि नीट पेपर का हार्डकॉपी पूणे से निकला है. इसलिए महाराष्ट्र के नेटवर्क को खंगाला जा रहा है.
NTA पर भी उठ रहे हैं सवाल
सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसियों का मानना है कि एनटीए में कुछ गड़बड़ है, कोई सिक्रेट इन्फोर्मेशन लीक कर रहा है जिसकी सख्त जांच जरूरी है. सीबीआई और एसओजी का मानना है कि इस बार नीट पेपर लीक करने वाला नेटवर्क पुराना है. पिछले साल की जांच अधूरी रह सकती है और पटना के जिस गैंग को पकड़ा गया था वो पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ था. बिहार गैंग की भी जांच हो रही है.
शरत कुमार / ओमकार